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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 96688 (ALL)

RAJA SINGH v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

BAIL/32094/2025 · 2025-09-24

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32094 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0205/2025, अंतगर्त धारा 147, 420, 467, 468, 471, 323, 504, 506, 384, 342, 120-बी. भा.दं.सं., थाना नौबस्ता, िजला कानपुर नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना कािरत नहीं की गयी है एवं िकसी प्रकार की धोखाधड़ी/ जालसाजी नहीं की गयी है। वतर्मान प्राथिमकी लगभग 15 वषर् िवलंिबत है, क्योंिक प्राथिमकी से ही स्पष्ट है िक किथत घटना वषर् 2010 में घिटत हुई थी और इसिलए अिभयोजन पक्ष के बयान में सूचनाकतार् द्वारा ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। सूचनाकतार् ने िदनांक 23.06.2010 को गोपाल िसह पुत्र तारा िसह नामक एक सह-अिभयुक्त के साथ आराजी संख्या 1115 (क्षेत्रफल 0.3690 हेक्टेयर) एवं आराजी संख्या 1118 (क्षेत्रफल 0.1780 हेक्टेयर) के संबंध में समझौता िकया था। इस प्रकार यह स्पष्ट है िक आवेदक का वतर्मान समझौते से कोई संबंध नहीं है। सूचनाकतार् ने सह-अिभयुक्त गोपाल िसह पुत्र तारा िसह के िवरुद्ध िसिवल जज (एस.डी.) कानपुर नगर की अदालत में वाद संख्या 788/2014 (कािसम राजा बनाम गोपाल िसह) के अंतगर्त अस्थायी िनषेधाज्ञा के िलए वाद दायर िकया है। यहाँ भी यह स्पष्ट है िक आवेदक का इस मामले से संबंिधत िववाद से कोई संबंध नहीं है और यह भी स्पष्ट है िक इस मामले से संबंिधत िववाद िसिवल प्रकृ ित का है, न िक आपरािधक प्रकृ ित का। इसके अितिरक्त, यहां यह उल्लेखनीय है िक आवेदक ने पहले ही सी.पी.सी. की धारा 9 के Versus Counsel for Applicant(s) : Akshay Raghuvanshi, B.K.Singh Raghuvanshi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Raja Singh .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) तहत िसिवल जज (एसडी) की अदालत में वाद संख्या 388/2019 के तहत सूचनाकतार् के साथ-साथ तीन अन्य सह-अिभयुक्तों के िखलाफ वाद प्रस्तुत िकया है। संबंिधत न्यायालय द्वारा वाद संख्या 388/2019 (राजा िसह बनाम कािसम राजा एवं अन्य) में आवेदक के पक्ष में िदनांक 04.03.2020 के आदेश द्वारा पािरत अंतिरम िनषेधाज्ञा अभी भी प्रभावी है। (ख) आवेदक ने उत्तर प्रदेश राजस्व संिहता की धारा 34 के तहत नायब तहसीलदार, पाली, तहसील कानपुर नगर, कानपुर सदर, में एक आवेदन भी दायर िकया था, िजसमें आराजी संख्या 1117 और 1118 (प्रश्नगत प्लॉट) के आवेदक के नाम पर दािखल खािरज कराने का अनुरोध िकया गया था और आदेश िदनांक 04.05.2023 के तहत आवेदक के आवेदन को स्वीकार कर िलया और संबंिधत प्रािधकािरयों को आराजी संख्या 1117 और 1118 ( प्रश्नगत प्लॉट) के संबंध में राजस्व अिभलेखों में आवेदक का नाम दजर् करने का िनदेर्श िदया था। यह दािखल खािरज आवेदन आवेदक द्वारा पंजीकृ त वसीयत के आधार पर दायर िकया गया था, िजसे उसके िपता ने िदनांक 05.04.2004 को आवेदक के पक्ष में िनष्पािदत िकया था। इस प्रकार, उपरोक्त आदेश िदनांक 04.05.2023 के अनुपालन में, संबंिधत प्रािधकािरयों ने आवेदक का नाम आराजी संख्या 1117 एवं 1118 (प्रश्नाधीन भूखण्ड) के स्वािमत्व धारक के रूप में दजर् कर िलया। प्रश्नगत िववाद पूणर्तः दीवानी प्रकृ ित का है और अिभलेख से ही स्पष्ट है िक इस मामले में शािमल उसी िववाद के संबंध में पक्षकारों के बीच पहले से ही कई मुकदमे लंिबत हैं। उक्त के अितिरक्त, जैसा िक सवोर्च्च न्यायालय ने एस.एन. िवजय लक्ष्मी बनाम कनार्टक राज्य के मामले में पहले ही माना है, िक "दीवानी िववाद में आपरािधक कायर्वाही शुरू नहीं की जा सकती"। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 26.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में BAIL No. 32094 of 2025 2 संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 25, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32094 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad