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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 96566 (ALL)

AMIT DIXIT URF MONU DIXIT v. STATE OF U.P.

BAIL/31721/2025 · 2025-09-15

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 31721 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 293/2025, अंतगर्त धारा 352/308(5) बी.एन.एस., थाना ताजगंज, िजला आगरा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसा िक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से िकसी प्रकार की िफरौती की माँग नहीं की गयी है, न ही उसे जान से मारने की धमकी दी गयी है। िदनांक 03.05.2025 को पुिलस गश्त के दौरान आवेदक को संबंिधत पुिलस द्वारा िगरफ्तार िकया गया और आवेदक के कब्जे से 1850 रुपये, एक तमंचा 315 बोर और 3 मोबाइल बरामद िकए गए, जो िक फजीर् एवं बनावटी है तथा उक्त बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। मोबाइल फोन की बरामदगी के आधार पर आवेदक पर कु छ अन्य मुकदमें भी पंजीकृ त कर िदए गए, िजनमें आवेदक जमानत पर है। उक्त घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है तथा सी.सी.टी.वी. फु टेज में भी आवेदक के िवरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं पाया गया है।आवेदक के िवरुद्ध प्राथिमकी में यह आरोप लगाया गया है िक वह सह-अिभयुक्त जय भगवान यादव का िमत्र है, परन्तु वास्तव में आवेदक का सह-अिभयुक्त जय भगवान यादव से न तो कोई संबंध है और न ही वह उसका िमत्र है। सूचनाकतार् द्वारा आवेदक को कोई धनरािश नहीं िदया गया है, न ही आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से िकसी प्रकार से कोई लाभ प्राप्त िकया गया है। अिभलेख पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात यह स्पष्ट है िक सूचनाकतार् द्वारा 10,000 रुपये आवेदक को नहीं, बिल्क सह-अिभयुक्त जय भगवान यादव को िदए गए थे तथा वतर्मान घटना को कािरत करने में मुख्य भूिमका जय भगवान यादव की ही विणत की गयी है। वतर्मान घटना से आवेदक का कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 20 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Amit Dixit Urf Monu Dixit .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 04.05.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 16, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 31721 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad