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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32910 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 108/2025, अंतगर्त धारा 318(4), 338, 336(3), 351(2) बी.एन.एस., थाना औरंगाबाद, िजला बुलंदशहर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। िदनांक 18.12.2024 के िवक्रय िवलेख के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक जयपाल िसह पुत्र हरवंश िसह नामक व्यिक्त ने सूचनाकतार् के पक्ष में िवक्रय-िवलेख िनष्पािदत िकया, जो िक वतर्मान आवेदक नहीं है, क्योंिक आवेदक का नाम जयपाल पुत्र िछद्दा है एवं उक्त तथ्य प्रश्नगत िवक्रय-िवलेख में भी अंिकत िकया गया है। आवेदक का नाम किथत िवक्रे ता (जयपाल िसह पुत्र हरवंश िसह) के समान होने की वजह से अिभयुक्त बना िदया गया है। आवेदक ने न तो सूचनाकतार् को कोई भूखंड बेचा और न ही िदनांक 18.12.2024 के उपरोक्त िवक्रय-िवलेख का साक्षी है।आवेदक मध्यस्थता का काम करता है, िकन्तु उसके द्वारा सूचनाकतार् को कभी भी कोई जमीन नहीं िदखाई गयी और न ही कोई िवक्रय-िवलेख िनष्पािदत िकया गया। आवेदक सूचनाकतार् से पिरिचत नहीं है। आवेदक का िकसी भी सह-अिभयुक्त से कोई संबंध नहीं है और वह अपने पुत्र मोहन प्रताप उफर् मोनी (सह-अिभयुक्त) से अलग रहता है। आवेदक प्रश्नगत वाद में िकसी भी प्रकार से लाभाथीर् नहीं है एवं उसके द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना नहीं की है, न ही िकसी व्यिक्त के साथ जान-बूझकर धोखाधड़ी कािरत की है। आवेदक किथत िवक्रय िवलेख का न तो िवक्रे ता है और न ही क्रे ता, न ही गवाह है। किथत घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह Versus Counsel for Applicant(s) : Niyaj Ahamad Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Jaypal .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 18.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32910 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad