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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 95862 (ALL)

AKHILESH KUMAR SINGH @ THALLU v. STATE OF U.P.

NABAIL/7806/2025 · 2025-09-24

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7806 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. यह आवेदक का िद्वतीय अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र है। आवेदक का प्रथम अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िदनांक 01.09.2025 को शतोर्ं का अनुपालन न िकये जाने के आधार पर िनरस्त िकया जा चुका है। 2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 102/2022 से उद्भूत वाद सं० 35323/2023, अन्तगर्त धारा 504, 506, 409, 419, 420, 452, 467, 468, 471 भा.दं.सं., थाना मुगल सराय, िजला चंदौली में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री प्रदीप कु मार िमश्रा एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री जय िकशन चौरिसया को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री प्रदीप कु मार िमश्रा की तरफ से आज वकालतनामा दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदक द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना नहीं की गयी है, न ही कोई फजीर्वाड़ा/धोखाधड़ी कािरत की गयी है। आवेदक को पूवर् के अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र में सशतर् अंतिरम अिग्रम जमानत प्रदान की गयी थी एवं आवेदक न्यायालय द्वारा अिधरोिपत शतोर्ं का बखूबी अनुपालन कर रहा था एवं आगे भी करता रहेगा। आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 6. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Kumar Singh, Sanjay Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Akhilesh Kumar Singh @ Thallu .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) िकया गया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेदक के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर संबंिधत न्यायालय में आरोपपत्र दािखल िकया जा चुका है। पूवर् में भी आवेदक को िदनांक 22.05.2024 को सशतर् अंतिरम अिग्रम जमानत प्राप्त हुई थी। तत्पश्चात् िदनांक 30.05.2024 को जमानतीय अिधपत्र पूणर् िकया गया एवं िदनांक 30.07.2024 को आवेदक उपिस्थत हुआ। उसके पश्चात िदनांक 20.10.2024, 13.12.2024 एवं उसके आगे भी अनुपिस्थत रहा। िजससे यह स्पष्ट है िक आवेदक न्यायालय द्वारा िनयत ितिथयों पर अनुपिस्थत रहता था एवं न्याियक प्रिक्रया में सहयोग नहीं कर रहा था। यह भी स्पष्ट है िक यिद आवेदक को पुनः अिग्रम जमानत प्रदान की गयी, तो वह िफर से िनयत ितिथयों पर उपिस्थत नहीं होगा एवं न्याियक प्रिक्रया में सहयोग नहीं करेगा। इसिलए आवेदक को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः अिभयुक्त का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 7. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 8. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक आवेदक को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई नवीन आधार पिरलिक्षत नहीं हो रहा है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 9. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 10. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 25, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 7806 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad