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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7730 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 59/2019 अन्तगर्त धारा 366, 376 भारतीय दण्ड संिहता, थाना शाहगंज, िजला आगरा में अि्षम जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्शी चन्दन िसह को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक िनदरॏष है, उसे उपरो्व धाराओं में ्षेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरो्व विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरू्ध कोई िव्षसनीय साष्य नहीं है। यहां ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता के धारा 164 दं०्ऺ०सं० के बयान से पिरलि्षत हो रहा है िक वह सहमत प्षकार है तथा आवेदक व किथत पीिड़ता के मध्य िववाह का अनुबंध भी हुआ है। किथत पीिड़ता बािलग तथा अपना अच्छा-बुरा समझने में पूणर्तः स्षम है। आगे यह भी कहा गया िक मामलें के सहअिभयु्व अजीज खान व दो अन्य की अि्षम जमानत अवर न्यायालय ्षारा स्वीकार िकया जा चुका है। आवेदक का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः आवेदक की ओर से यह भी आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया गया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध गंभीर ्ऺकृ ित का है तथा इस मामलें में अिभयु्व के िवरू्ध पयार्प्त साष्य के आधार पर आरोप प्ऴ दािखल िकया जा चुका है तथा अिभयु्व की भूिमका अिभयोजन सा्षीगण ्षारा Versus Counsel for Applicant(s) : Mahendra Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sakir Khan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
अिभकिथत है। पीिड़ता ्षारा अपने धारा 164 दं०्ऺ०सं० के बयान में अिभयु्व की भूिमका स्प्ि रूप से विणत िकया गया है, जो गंभीर ्ऺकृ ित का है। इसिलए, अिभयु्व को अि्षम जमानत पर मु्व िकये जाने का कोई औिचत्य ्ऺतीत नहीं हो रहा है। अतः अिभयु्व का यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाय।
5.
यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अि्षम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की ्ऺकृ ित और गंभीरता, अिभयु्व का पूवर्वृ्त, अिभयु्व के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयु्व के िवरु्ध उपलब्ध संपूणर् साम्षी का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयु्व की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
6. वतर्मान मामले में अि्षम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िस्धांतों को ध्यान में रखते हुए और प्षकारों के िव्षान अिधव्वाओं के कथनों, आरोपों की ्ऺकृ ित, आवेदक की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक, पीिड़ता ्षारा अपने धारा 164 दं०्ऺ०सं० के बयान में अिभयु्व की भूिमका स्प्ि रूप से विणत िकया गया है, जो गंभीर ्ऺकृ ित का है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार ्ि्व िकए यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ अस्वीकार िकया जाता है।
7. तद्नुसार, इस अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ को िनरस्त िकया जाता है।
8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
9. कायार्लय को िनदरॏिशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनि्ात करें।
October 6, 2025 CP.sahani NABAIL No. 7730 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad