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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7609 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदकगण श्री मती अनीता एवं कुं वरपाल की ओर से मु०अ०स० 76/2013 अन्तगर्त धारा 498ए/ 304बी भा.दं.सं व धारा 3/4 दहेज प्रितषेध अिधिनयम, थाना जसरथपुर, िजला एटा में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के अनुसार प्रासंिगक तथ्य यह है िक िदनांक 13-06- 2013 की मध्य राित्र 12:00 बजे घिटत हुई, उस िदन मौसम के कारण िबजली लगभग 12:00 बजे आयी। राित्र में मृतका और उसका पित आँगन में सो रहे थे, जैसे ही प्रकाश हुआ, मृतका सोने के िलए अपने कमरे में गई और िबजली के कू लर को छू िलया, जो पहले से ही सीधे जुड़ा हुआ था, ट्रांसफॉमर्र में खराबी के कारण 440 बोल्टेज के स्थान पर हाई वोल्टेज करंट आ गया, िबजली उच्च वोल्टेज (11,000) आ गयी, िजससे सभी िबजली के सामान जल गए और तार भी जलने लगे तथा 11,000 हाई वोल्टेज से मृतका की मौके पर ही मृत्यु हो गई। (ख) आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह तकर् भी प्रस्तुत िकया गया िक प्रश्नगत घटना की सूचना प्राप्त होने पर संबंिधत थाना, तहसीलदार व क्षेत्रािधकारी तुरन्त घटनास्थल पर पहुंचे तथा उच्च वोल्टेज (11,000) िवद्युत करंट के कारण हुई समस्त क्षित को देखा। पुिलस द्वारा मृतक के पिरवार के सदस्य और उनके िरश्तेदार की मौजूदगी में पंचायतनामा व जाँच िरपोटर् और स्थल योजना की कायर्वाही शुरू की गई। जांच िरपोटर् पूरी होने के बाद, शव को पोस्टमाटर्म के िलए िदनांक 13-06-2013 को लगभग समय 05:10 अपराह्न पर भेजा गया। डॉक्टर Versus Counsel for Applicant(s) : Gyan Singh, Sukhvir Singh Counsel for Opposite Party(s) : Dileep Singh Yadav, G.A. Smt. Anita And Another .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
द्वारा पोस्टमाटर्म िरपोटर् तैयार की गई, िजसमें उन्होंने कहा िक मृतका के मृत्यु का कारण उंगली में करंट लगना है। िकतु अिभयोजन पक्ष द्वारा दुराशय के कारण आवेदकगण के पूरे पिरवार के िवरुद्ध पंजीकृ त करा िदया गया, िजसके उपरांत क्षेत्रािधकारी द्वारा जांच शुरू की गई और सूचनाकतार् तथा स्वतंत्र गवाहों के बयान दजर् िकए गए तथा पोस्टमाटर्म िरपोटर् के अवलोकनोपरान्त वे इस िनष्कषर् पर पहुंचे िक मृतका की मृत्यु उच्च वोल्टेज करंट (11,000) लगने के कारण हुआ है। उपयुर्क्त तथ्यों के आधार पर उनके द्वारा संबंिधत न्यायालय के समक्ष अंितम िरपोटर् दािखल की गयी, िजसमें सूचनाकतार् के िवरुद्ध धारा 182 भा.द.सं.
के तहत प्राथर्नापत्र की िसफािरश की गई तथा अंितम िरपोटर् पर सूचनाकतार् ने संबंिधत न्यायालय में िवरोध यािचका (प्रोटेस्ट िपटीशन) दायर की, इस िवरोध यािचका पर संबंिधत न्यायालय ने िदनांक 01-10-2015 को आगे की जांच के िनदेर्श िदए। उस आदेश के अनुसरण में आगे की जाँच शुरू की गई और सूचनाकतार् और सभी ग्रामीणों का बयान क्षेत्रािधकारी द्वारा पुनः दजर् िकया गया, िजसमें उन्होंने पुनः पाया िक आवेदक के िवरुद्ध कोई इस अपराध में कोई साक्ष्य नहीं पाया गया, क्योंिक उसकी मृत्यु उच्च वोल्टेज करंट (11000) के कारण हुई थी और उन्होंने िदनांक 20-11-2015 को दूसरी अंितम िरपोटर् न्यायालय में दािखल की गयी, िकतु दूसरी अंितम िरपोटर् के िवरुद्ध सूचनाकतार् द्वारा संबंिधत न्यायालय में िवरोध यािचका (प्रोटेस्ट िपटीशन) प्रस्तुत िकया िकया, िजस पर संबंिधत मिजस्ट्रेट ने अंितम िरपोटर् को अस्वीकार कर िदया और इसे िदनांक 28-05-2016 को िशकायती मामला माना तथा इसी दौरान, सी.बी.सी.आई.डी. मामले में िदनांक 16-06-2018 को उस आवेदन के अनुसरण में शािमल हुई जो सूचनाकतार् ने मानवािधकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत िकया था। उसके पश्चात, सी. बी.सी.आई.डी.
ने भी पूणर् अिधकार के साथ जांच शुरू की तथा सभी अिभलेिखत साक्ष्यों को स्थानांतिरत िकया और पाया िक उस दुभार्ग्यपूणर् रात को उक्त दुघर्टना 11,000 वोल्ट की उच्च वोल्टेज करंट के कारण हुई थी। अंितम िरपोटर् िदनांिकत 06-05-2018 को प्रस्तुत की गई िजसमें सूचनाकतार् के िवरुद्ध धारा 182 आईपीसी के अंतगर्त अनुशंसा आवेदन िकया गया, तथा माननीय न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 04-04-2024 के द्वारा उक्त िनदेर्श, "यिद आवेदक अपने अिधवक्ता के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर िडस्चाजर् का आवेदन प्रस्तुत करते हैं, तो उसका िनस्तारण िवचारण न्यायालय द्वारा कानून के अनुसार िनणीर्त एवं स्पष्ट आदेश द्वारा तीन सप्ताह के भीतर कर िदया जाए। िडस्चाजर् आवेदन के िनस्तारण तक आवेदकों के िवरुद्ध कोई कठोर कारर्वाई नहीं की जाएगी।" के साथ आदेश पािरत िकया और मामले का िनस्तारण कर िदया। आदेश िदनांक 04-04-2024 के अनुसरण में, आवेदकगण ने अपना िडस्चाजर् प्राथर्नापत्र मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, एटा के समक्ष प्रस्तुत िकया, िजसके तहत संबंिधत न्यायालय ने आवेदकों द्वारा दायर िडस्चाजर् आवेदन िदनांक 18.05.2024 को अस्वीकार कर िदया। िजससे क्षुब्ध होकर आवेदकगण ने उक्त आदेश िदनांक 18-05-2024 के िवरुद्ध एक बार िफर उच्च न्यायालय के समक्ष प्रकीणर् प्राथर्नापत्र संख्या 18186/2024 यािचका दायर की, िजसे माननीय न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 02-09-2024 द्वारा िनस्तािरत िकया, िजसमें आवेदकगण को आदेिशत िकया गया िक "वे आज से तीन सप्ताह की NABAIL No. 7609 of 2025 2 अविध के भीतर मिजस्ट्रेट के समक्ष उपिस्थत समिपत हों। आवेदकगण की उपिस्थित पर, मिजस्ट्रेट संबंिधत िवचारण न्यायालय को मामला दो सप्ताह में रेफर करेंगे एवं के स के सत्र न्यायालय में रेफर होने के चार सप्ताह के भीतर िडस्चाजर् आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता रहगी। उसके बाद सेशन्स कोटर्, आवेदकों द्वारा प्रस्तुत िडस्चाजर् आवेदन को उसके गुण-दोष के आधार पर िनणर्य करेगा। इस सम्पूणर् प्रिक्रया, आवेदकगण की उपिस्थित, के स का रेफर होना, िडस्वाजर् का प्राथर्नापत्र एवं उसका िनस्तारण होने तक आवेदकगण की िगरफ्तारी या कठोर कारर्वाई नहीं की जाएगी।" तत्पश्चात आवेदकगण ने िजला एवं सत्र न्यायाधीश, एटा के समक्ष सत्र वाद सं० 586/2024 दािखल िकया, परंतु संबंिधत न्यायालय ने मामले के पहलुओं पर िवचार िकए िबना ही जल्दबाजी में प्राथर्नापत्र अस्वीकार कर िदया। इसके पश्चात आवेदकगण ने िफर से दािण्डक प्रकीणर् प्राथर्नापत्र (अंतगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस.) सं० 17469/2025 (अनीता एवं अन्य बनाम राज्य यूपी एवं अन्य) उच्च न्यायालय में दािखल िकया, िजसमें िदनांक 29.05.2025 द्वारा आदेिशत िकया गया िक मात्र अिभयुक्त (रंजीत) को उपरोक्त मामले में तीन महीने की अविध तक िगरफ्तार नहीं िकया जाएगा और उसे वीिडयो
कॉन्फ्रें िसग के माध्यम से न्यायालय में उपिस्थत होने की अनुमित दी जाएगी। तत्पश्चात उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पािरत करने के बाद, िवद्वान सत्र न्यायाधीश, एटा ने सभी आवेदकों के िखलाफ िदनांक 03.09.2025 को गैर जमानतीय अिधपत्र जारी िकया। (ग) आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने पुनः तकर् प्रस्तुत िकया िक इस मामलें प्रासंिगक तथ्य यह है िक आवेदकगण को उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उन्हें आशंका है िक उन्हें उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उनके िवरुद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदकगण द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेदकगण द्वारा मृतका से िकसी प्रकार के अितिरक्त दहेज की माँग नहीं की गयी है, न ही िकसी प्रकार की क्रू रतापूवर्क यातना दी गयी है। इस दुभार्ग्यपूणर् दुघर्टना की सूचना िमलने के बाद, मृतका के िपता और उसके पिरवार के सदस्यों को इस दुभार्ग्यपूणर् दुघर्टना के बारे में सूिचत िकया गया। सूचना देने वाला ( मृतका का िपता) घटनास्थल पर आया और पूरे गाँव में जो कु छ भी हुआ, उसे देखा। पोस्टमाटर्म आख्या, जांच और िवचारण न्यायालय में डॉक्टर के साक्ष्य से यह स्पष्ट है िक मृत्यु उच्च वोल्टेज िवद्युत के कारण हुई थी, यह एक आकिस्मक मामला है। उक्त घटना पूरे गाँव में हुई, िजससे न के वल आवेदकगण के घर को बिल्क पूरे गांव को नुकसान हुआ। मृतका िशिक्षका थी और िदनांक 30.04.2012 को िववाह के बाद से अपने माता-िपता के साथ रह रही थी। मृतका और उसका पित दोनों सरकारी नौकरी में हैं और वे घटना के दो िदन पहले ही गाँव आ गए थे.
इसिलए िकसी भी प्रकार की कु रता और दहेज की माँग की कोई संभावना नहीं है। मृतका की मौत आकिस्मक रूप से हुई है तथा मृतका की मृत्यु कािरत करने में आवेदकगण की कोई भूिमका नहीं है। आवेदकगण की और से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वे कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वे ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद की उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी NABAIL No. 7609 of 2025 3
तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेदकगण द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेदकगण द्वारा अितिरक्त दहेज हेतु वादी की पुत्री को शारीिरक एवं मानिसक रूप से प्रतािड़त कर क्रू रता कािरत की तथा वादी की पुत्री से शादी के मात्र एक वषर् दो माह के अंदर संिदग्ध पिरिस्थितयों में िवद्युत करन्ट लगाकर उसकी हत्या कािरत कर दी गयी। मृतका के शव िवच्छेदन आख्या में मृत्यु का कारण मृत्यु पूवर् िवद्युत करंट लगने से जलने के पिरणामस्वरूप पहुंचे आघात के कारण मृत्यु होना अंिकत है, िजससे यह स्पष्ट रूप से पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदकगण द्वारा ही मृतका की हत्या कािरत की गयी। आवेदकगण को उन्मोचन प्राथर्नापत्र के िनस्तारण तक आवेदकगण को राहत प्रदान की गयी थी, िकन्तु आवेदकगण द्वारा दािखल उन्मोचन प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जा चुका है, िजससे आवेदकगण को प्राप्त राहत स्वतः समाप्त हो गयी। आवेदकगण द्वारा दािखल दािण्डक प्रकीणर् प्राथर्नापत्र (अंतगर्त धारा 528 बी.एन. एस.एस.) सं० 17469/2025 (अनीता एवं अन्य बनाम राज्य यूपी एवं अन्य) में भी आवेदकगण को कोई राहत प्रदान नहीं की गयी है। अिग्रम िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा न्यायालय को इस तथ्य से अवगत कराया गया िक आवेदकगण िदनांक 01.03.2023 से फरार चल रहे हैं तथा न्यायालय के समक्ष उपिस्थत नहीं हो रहे हैं तथा उनके िवरुद्ध गैर जमानतीय अिधपत्र भी जारी िकये जा चुके हैं। अतः यह स्पष्ट है िक यिद आवेदकगण की अिग्रम जमानत प्रदान की जाती है, तो आवेदकगण िवचारण एवं न्याियक प्रिक्रया में सहयोग नहीं करेंगे, इसिलए आवेदकगण को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः आवेदकगण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय।
5.
यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
7. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदकगण की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए एवं सम्पूणर् दस्तावेजों के अवलोकन से यह िविदत होता है िक आवेदकगण द्वारा पूवर् में िदये गये अंतिरम आदेश का दुपर्योग िकया जा रहा है। अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्रुसार आवेदकगण का अिग्रम जमानत NABAIL No. 7609 of 2025 4
आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है।
8. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है।
9. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
10. आवेदकगण िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है। कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 17, 2025 S.Mishra NABAIL No. 7609 of 2025 5 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad