SURENDRA SHARMA AND ANOTHER v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NABAIL/7536/2025 · 2025-09-14
Gautam Chowdhary
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 94391 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7536 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदकगण Surendra Sharma and Bikau @ Yogesh Yadav की ओर से पिरवाद सं० 186/2018, अन्तगर्त धारा 376, 506 भा.दं.सं., थाना कोठीभार, िजला महराजगंज में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री चंदन िसह तथा जय िकशन चौरिसया को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदकगण िनदोर्ष हैं, उन्हें उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उन्हें आशंका है िक उन्हें उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उनके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदकगण द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है। उपरोक्त प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् करने के संबंध में, पीिड़ता का िजला िचिकत्सालय, महाराजगंज में िचिकत्सीय परीक्षण िकया गया तथा कोई चोट नहीं पाई गई तथा पीिड़ता की आयु लगभग 35 वषर् दजर् की गई। पीिड़ता का बयान जाँच अिधकारी द्वारा धारा 161 के अंतगर्त दजर् िकया गया था, िजसमें उसने प्रथम सूचना िरपोटर् के कथन को दोहराया है। पीिड़ता के बयान अंतगर्त धारा 200 दं.प्र.सं.
एवं गवाहों के बयान अंतगर्त धारा 202 दं०प्र०सं० में काफी िभन्नता है। प्रासंिगक तथ्य यह है िक ग्राम गंगौली, थाना कोठीभार, िजला महाराजगंज में िस्थत गाटा संख्या 291 क्षेत्रफल 0.158 हेक्टेयर सावर्जिनक उपयोिगता भूिम (चारागाह) के रूप में दजर् है, िजस पर िवपक्षी संख्या 2 के पित ने अितक्रमण करके पक्का िनमार्ण कर िलया था। इस संबंध में उनके िवरुद्ध कु छ िशकायतें दजर् की गईं और तहसील अिधकािरयों ने इस पर कारर्वाई की, िजसके कारण आवेदकों के िवरुद्ध झूठा मुकदमा दजर् कराया गया है। आवेदकगण Versus Counsel for Applicant(s) : Ram Prasad Dubey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Surendra Sharma And Another .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदकगण की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वे कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार हैं और जब भी आवश्यकता होगी वे ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार हैं जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेदकगण द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेदकगण द्वारा वािदनी/पीिड़ता के घर में घुसकर उसको चाकू िदखाकर उसके साथ जबरन बलात्कार िकया। पीिड़ता ने अपने बयान अंतगर्त धारा 161 दं.प्र.सं. में आवेदकगण द्वारा उसके साथ जबरन बलात्कार कािरत करने का स्पष्ट कथन िकया है तथा उक्त कथन की पिरपुिष्ट अपने बयान अंतगर्त धारा 164 दं.प्र.सं. में भी की है तथा आवेदकगण की िशनाख्त की है। वािदनी ने अपने बयान अंतगर्त धारा 200 दं.प्र.सं.
के अंतगर्त अंिकत बयान में भी स्पष्ट रूप से कथन िकया है िक आवेदकगण द्वारा उसके साथ बुरा काम िकया गया है। स्वतंत्र साक्षीगण ने भी अपने बयानों में आवेदकगण के िवरुद्ध स्पष्ट कथन िकया है। पयार्प्त साक्ष्यों के आधार पर आवेदकगण को उपरोक्त धाराओं में तलब िकया गया है, इसिलए आवेदकगण को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः आवेदकगण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5.(क) पत्रावली पर संलग्न प्रपत्रों के अवलोकन से िविदत होता है िक पीिड़ता द्वारा प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा 156(3) पर आदेश पािरत होने के पश्चात प्राथिमकी दजर् की गयी तत्पश्चात िववेचक ने िववेचना और गवाहों के बयान दजर् करने के बाद, उपरोक्त मामले में अंितम िरपोटर् िदनांक 12.11.2015 को प्रस्तुत की। िववेचनािधकारी द्वारा िदनांक 12.11.2015 को प्रस्तुत अंितम िरपोटर् के पश्चात िवपक्षी संख्या 2 द्वारा जे.एम. महाराजगंज के समक्ष िवरोध यािचका दायर की गई, िजसमें जे.एम. महाराजगंज ने अपने आदेश िदनांक 09.09.2016 द्वारा िववेचनािधकारी को मामले की पुनः जांच करने का िनदेर्श िदया। आदेश िदनांक 09.09.2016 के अनुपालन में पुनः जांच की गई तथा जब िववेचक को कोई तथ्य नहीं िमला तो पुनः अंितम िरपोटर् प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात िववेचक द्वारा प्रस्तुत अंितम िरपोटर् के िवरुद्ध िवपक्षी संख्या 2 ने पुनः िवरोध यािचका दािखल की, िजस पर िवद्वान मिजस्ट्रेट ने मामले को िशकायत वाद संख्या 186/2018, धारा 506, 376 भारतीय दंड संिहता के अंतगर्त थाना कोठीभार, िजला महाराजगंज में पंजीकृ त करने का िनदेर्श िदया है। (ख) अिग्रम पिरवाद पंजीकृ त होने पर पीिड़ता का बयान न्याियक मिजस्ट्रेट, महाराजगंज के समक्ष िदनांक 01.06.2018 को धारा 200 सीआरपीसी के अंतगर्त दजर् िकया गया। पीिड़ता और सभी गवाहों के बयान लेने के बाद, जे.एम. महाराजगंज ने अपने आदेश िदनांक 31.01.2019 द्वारा आवेदकों को धारा 376, 506 आईपीसी के तहत तलब िकया। जे.एम.
महाराजगंज द्वारा पािरत आदेश िदनांक 31.01.2019 के िवरुद्ध आवेदकगण ने सत्र न्यायाधीश , महाराजगंज के समक्ष आपरािधक पुनरीक्षण संख्या 19/2019 दायर िकया और आवेदकगण NABAIL No. 7536 of 2025 2
द्वारा दायर पुनरीक्षण को िदनांक 01.10.2019 के आदेश द्वारा स्वीकार कर िलया गया और मामले को पुनिवचार हेतु वापस भेज िदया गया। िवद्वान सत्र न्यायाधीश द्वारा पािरत आदेश िदनांक 01.10.2019 के अनुपालन में न्याियक मिजस्ट्रेट, महाराजगंज ने अपने आदेश िदनांक 10.12.2021 द्वारा धारा 203 सीआरपीसी के तहत पीिड़ता के िशकायत वाद को खािरज कर िदया। न्याियक मिजस्ट्रेट महाराजगंज द्वारा धारा 203 सीआरपीसी के तहत पािरत आदेश िदनांक 10.12.2021 के िवरुद्ध िवपक्षी संख्या 2 ने सत्र न्यायाधीश, महाराजगंज के समक्ष आपरािधक पुनरीक्षण संख्या 67/2021 दायर िकया और िवद्वान सत्र न्यायाधीश, महाराजगंज के आदेश िदनांक 30.06.2022 से िवपक्षी संख्या 2 द्वारा दायर िशकायत को खािरज कर िदया और न्याियक मिजस्ट्रेट द्वारा अंतगर्त धारा 203 सीआरपीसी द्वारा पािरत आदेश की पुिष्ट की। तदोपरान्त वािदनी द्वारा सत्र न्यायाधीश द्वारा पािरत उपरोक्त विणत आदेश को उच्च न्यायालय में अंतगर्त धारा 227 सं० 7646/2024, चुनौती दी गयी तथा उच्च न्यायालय के आदेश िदनांक 02.07.2024 द्वारा िनगरानी न्यायालय द्वारा पािरत उपरोक्त विणत आदेश को िनरस्त कर िदया गया एवं संबंिधत न्यायालय को पुनः धारा 200 व 202 दं०प्र०सं० के अंतगर्त परीिक्षत साक्षीगण एवं अन्य मौिखक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का सम्यक अवलोकन कर नवीन आदेश पािरत करने हेतु आदेिशत िकया गया। तत्पश्चात उच्च न्यायालय द्वारा पािरत उक्त आदेश के अनुपालन में िसिवल जज (अवर खण्ड)/ न्याियक मिजस्ट्रेट, महराजगंज द्वारा मामले में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर िदनांक 05.11.2024 को आवेदकगण को उपरोक्त धाराओं में िवचारण हेतु आहूत िकया। पुनः उक्त तलबी आदेश के िवरुद्ध आवेदकगण द्वारा िनगरानी सं० 02/2025 दािखल की गयी, िकन्तु उक्त िनगरानी भी िदनांक 19.06.2025 को िनरस्त कर दी गयी।
6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
7.
वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदकगण की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए प्रथमदृष्टया आवेदकगण को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई उिचत आधार बनता पिरलिक्षत नहीं हो रहा है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदकगण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है।
8. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र NABAIL No. 7536 of 2025 3
िनरस्त िकया जाता है।
9. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 15, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 7536 of 2025 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad