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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 31408 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 711/2024 अन्तगर्त धारा 420, 467, 468, 471 भारतीय दण्ड संिहता, थाना िशकोहाबाद, िजला िफरोजाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। प्रश्नगत प्रकरण में प्रासंिगक तथ्य यह है िक किथत घटना वषर् 2012 की बतायी गयी है, िकतु प्रथम सूचना िरपोटर् वषर् 2024 में पंजीकृ त कराया गया है। आवेदक उक्त बैंक का कमर्चारी नहीं था। उसने वषर् 2014 में कु छ समय तक दैिनक वेतन पर तृतीय पक्ष के रूप में चपरासी के पद पर कायर् िकया था। वह बैंक का िनयिमत कमर्चारी नहीं था और आवेदक को अवधेश कु मार के नाम स्वीकृ त 6 लाख और 3 लाख रुपये के ऋण के िवरुद्ध कोई धनरािश प्राप्त नहीं हुई है। किथत ऋण वषर् 2013 में पाँच वषोर्ं के िलए स्वीकृ त िकया गया था। यह बहुत ही िविचत्र है िक अिभयोिगनी वषर् 2024 में यह आरोप लेकर आयी िक बैंक कमर्चारी उसे परेशान कर रहे हैं, जबिक ऋण रािश िपछले 10 वषोर्ं से बकाया थी। यह संभव नहीं है िक िपछले 10 वषोर्ं में अवधेश कु मार के िवरुद्ध कोई नोिटस या कोई वसूली जारी नहीं की गई हो और अिभयोजन पक्ष यह स्पष्ट करने में िवफल रहा है िक अवधेश कु मार की मृत्यु के बाद वषर् 2024 में यह वसूली क्यों की गई। अिभयोजन पक्ष के कथन का समथर्न करने के िलए कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। अिभयोजन पक्ष के कथन में भौितक असंगित है। यिद िशकायतकतार् के साथ कोई धोखाधड़ी या छल िकया गया है, तो इसके िलए बैंक अिधकारी ही िजम्मेदार हैं। आवेदक को िकसी भी कीमत पर वतर्मान मामले से नहीं जोड़ा जा सकता। यहाँ यह उल्लेख करना उिचत है िक अिभयोजन पक्ष ने आवेदक द्वारा बनाए गए िकसी भी जाली Versus Counsel for Applicant(s) : Alok Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Lokendra Pratap .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) दस्तावेज़ को एकत्र नहीं िकया है और यहाँ यह भी कहा गया है िक एचडीएफसी बैंक ने कोई भी ऐसा दस्तावेज़ नहीं िदया है, िजससे यह पता चले िक किथत धनरािश आवेदक द्वारा उसके खाते या नकदी के माध्यम से ली गई थी या उसका उपयोग िकया गया था। आगे यह भी प्रस्तुत िकया गया िक जाँच अिधकारी ने जाँच के दौरान अवधेश कु मार के नाम पर कृ िष ऋण की स्वीकृ ित से संबंिधत दस्तावेज़ एकत्र िकए थे, ऋण के िलए दस्तावेजों के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक क्षेत्रीय अिधकारी/क्षेत्रीय प्रबंधक ने सभी दस्तावेजों और
स्थल िनरीक्षण का सत्यापन िकया है तथा बैंक अिधवक्ता ने राजस्व अिभलेखों का िनरीक्षण करने के पश्चात् बैंक को प्रमाण-पत्र भी िदया था और उसके बाद ऋण स्वीकृ त/पािरत िकया गया था। इस प्रकार वतर्मान मामले में आवेदक की कोई भूिमका नहीं है, के वल एचडीएफसी बैंक के वतर्मान कमर्चारी के बयान और पूवर् में हुई झूठी आपरािधक घटनाओं के आधार पर आवेदक को वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। गवाहों और प्रथम सूचक के बयानों के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है िक आवेदक की कोई सिक्रय भूिमका नहीं पाई गई है। के वल पूवर् आपरािधक इितहास के आधार पर आवेदक को वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। आवेदक के आपरािधक इितहास का वणर्न आवेदन पत्र के प्रस्तर- 42 से 50 तक में िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 27.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा अन्य सहअिभयुक्त के साथ िमलकर अिभयोिगनी के मृत पित के नाम पर फजीर् व कू टरिचत दस्तावेज तैयार करके तत्समय वषर् 2012-2013 में ऋण स्वीकृ त कराकर गबन कर िलया गया, जबिक अिभयोगी के मृत पित के नाम कोई भूिम नहीं थी। अिभयुक्त का इस तरह के अपराध में अभ्यस्त है तथा अिभयुक्त का लंबा आपरािधक इितहास है। अिभयुक्त कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। इसिलए, अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5.
उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत BAIL No. 31408 of 2025 2
करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 15, 2025 CP.sahani BAIL No. 31408 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad