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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 93801 (ALL)

RAMDHANI SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/30927/2025 · 2025-09-09

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30927 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 01/2018 से उद्भूत वाद सं० 184473/2022, अंतगर्त धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी. भा.दं.सं., थाना ई.ओ.डब्ल्यू., िजला वाराणसी में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। घटना िक ितिथ 25.5.2009 बतायी गयी है तथा घटना की तारीख से नौ वषर् पश्चात् िदनांक 20.12.2018 को तीन व्यिक्तयों के िवरुद्ध प्राथिमकी दजर् की गई, परन्तु उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं है तथा उक्त प्राथिमकी में आवेदक नािमत अिभयुक्त नहीं था। िदनांक 11.8.2022 को दािखल प्रथम आरोप-पत्र में आवेदक के िवरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं पाया गया, तत्पश्चात िववेचक द्वारा िदनांक 17.2.2025 को आवेदक के िवरुद्ध पूरक/िद्वतीय आरोप-पत्र दािखल िकया गया, िजसमें कहा गया िक आवेदक उक्त कं पनी का एजेंट था, इसके अितिरक्त आवेदक के िवरुद्ध कोई आरोप नहीं पाया गया है। यह प्रासंिगक है िक, आवेदक का नाम प्राथिमकी दजर् होने के पाँच वषर् पश्चात् प्रकाश में आया। आवेदक के वल उक्त कं पनी का एजेंट था, तथा दैिनक आधार पर कायर् करता था, उसने कभी भी प्रबंधक/क्षेत्रीय प्रबंधक के रूप में कायर् नहीं िकया। उक्त के अितिरक्त आवेदक के िवरुद्ध कोई आरोप नहीं है। आवेदक द्वारा िकसी Versus Counsel for Applicant(s) : Narendra Nath Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ramdhani Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) के साथ धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है। वतर्मान वाद के मुख्य आरोपी संतोष िकशन सपकाले को अभी तक िगरफ्तार नहीं िकया गया है। संबंिधत पुिलस ने आवेदक के िवरुद्ध कोई साक्ष्य सत्यािपत नहीं िकया है तथा न ही एकत्र िकया है तथा आवेदक को िगरफ्तार करने के बाद घटना में संिलप्तता के िलए कभी भी पहचान के िलए प्रस्तुत नहीं िकया। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को आज दािखल पूरक शपथपत्र के प्रस्तर सं० 2 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 10.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। BAIL No. 30927 of 2025 2 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। 9. यह स्पष्ट िकया जाता है िक प्रश्नगत घटना के अन्य सह-अिभयुक्तगण वतर्मान जमानत आदेश की समानता का आधार नहीं ले सकें गे। September 10, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30927 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad