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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 93631 (ALL)

JAMSAIDI v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NABAIL/7345/2025 · 2025-09-08

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7345 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 310/2025, अन्तगर्त धारा 124(1), 191(2), 85, 352, 115(2), 3(5) बी.एन.एस., थाना िवजयनगर, िजला गािजयाबाद में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री चंदन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेिदका पीिड़ता की सास है तथा उसके द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेिदका घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी, िकन्तु सास होने की वजह से उसे अिभयुक्ता बना िदया गया है। पीिड़ता का िचिकत्सीय परीक्षण हुआ, िजसमें उसकी चोट सं० 2 एवं 6 साधारण प्रकृ ित की पायी गयी हैं। उक्त घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। पीिड़ता की एक्स-रे आख्या एवं पूरक िचिकत्सीय आख्या के अनुसार उसके शरीर पर कोई भी नवीन चोट नहीं पायी गयी है। पीिड़ता के बयानों एवं अिभयोजन कथानक में परस्पर िवरोधाभास है। आवेिदका द्वारा पीिड़ता के साथ किथक घटना कािरत करने का कोई हेतुक नहीं है। वतर्मान वाद में िववेचना प्रचिलत है तथा आरोपपत्र संबंिधत िवचारण न्यायालय में अभी तक दािखल नहीं िकया गया है। पुनः आवेिदका की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेिदका द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेिदका द्वारा अन्य सह-अिभयुक्तगण के साथ िमलकर पीिड़ता को जान से मारने की नीयत से बेरहमी से मारपीट की गयी तथा लोहे की सिरया व चाकू से हमला कर गम्भीर चोटें कािरत की गयी हैं। पीिड़ता की िचिकत्सीय आख्या के अनुसार उसके शरीर पर कु ल नौ चोटें आना विणत हैं, जो शरीर के िभन्न-िभन्न िहस्सों पर पायी गयी हैं तथा उक्त चोटें गम्भीर प्रकृ ित की हैं। पीिड़ता ने अपने बयान अंतगर्त धारा 180 एवं 183 बी.एन .एस.एस. में भी अिभयोजन कथानक का समथर्न िकया है तथा पीिड़ता के िचिकत्सीय परीक्षण Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Kumar Pal Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Jamsaidi .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) आख्या से भी अिभयोजन कथानक का सम्पूणर् समथर्न हो रहा है। आवेिदका द्वारा कािरत अपराध गम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेिदका को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए प्रथमदृष्टया आवेिदका को अिग्रम जमानत पर अवमुक्त िकये जाने का कोई उिचत आधार पिरलिक्षत नहीं हो रहा है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। 9. आवेदक सक्षम न्यायालय के समक्ष िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है। September 9, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 7345 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad