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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30750 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 240/2025, अंतगर्त धारा 109, 115(2), 190, 191(2), 191(3), 333, 324(2), 351(3), 352 बी.एन.एस., थाना हापुड़ देहात, िजला हापुड़ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक पर आक्षेप है िक िदनांक 19.07.2025 को सूचनाकतार् कांवड़ यात्रा के प्रबंधन और शांित व्यवस्था बनाए रखने में व्यस्त था, तभी सूचनाकतार् को सूचना िमली िक दो पक्ष आपस में झगड़ा कर रहे हैं। इस सूचना पर सूचनाकतार् और अन्य पुिलसकमीर् मौके पर पहुंचे और देखा िक आवेदक और अन्य सह-अिभयुक्त लाठी डंडा, बेसबॉल, बैट, लोहे की रोड से एक -दूसरे को मारने के िलए झगड़ रहे थे। पुिलसकिमयों को देखकर सभी व्यिक्त मौके से भाग गए। (ख) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में दिशत िकया गया है। आवेदक द्वारा वतर्मान वाद को कािरत करने का कोई हेतुक व सरोकार नहीं है। िदनांक 23.07.2025 को किथत घायल व्यिक्तयों की िचिकत्सकीय जाँच की गई, िजसमें डॉक्टर ने बताया िक कु छ घायल व्यिक्तयों की चोटें 4 से 5 िदन पहले की हैं और कु छ घायल व्यिक्तयों की चोटें 3 िदन पहले की हैं। तत्पश्चात िदनांक 25.07.2025 को किथत घायलों शमीम और कौशरब की िचिकत्सकीय जाँच की गई, िजसमें डॉक्टर ने बताया िक घायल व्यिक्तयों की चोटें 1 से 2 िदन पहले की हैं। प्राथिमकी के अनुसार िबलाल कु रैशी घायल व्यिक्त है और घायल िबलाल की मेिडकल िरपोटर् अिभसाक्षी के पास उपलब्ध नहीं है। यह प्रासंिगक तथ्य है िक किथत घटना Versus Counsel for Applicant(s) : Kushagra Srivastava, Shahrukh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sartaj .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) िदनांक 20.07.2025 की दशार्ई गई है और िचिकत्सक ने बताया है िक चोटें 4-5 िदन पहले की हैं। वतर्मान किथत घटना से संबंिधत िकसी भी संिदग्ध वस्तु की बरामदगी आवेदक के पास से नहीं पायी गयी है तथा जो भी बरामदगी दिशत की गयी है, उसका कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। प्रथम सूचना िरपोटर् के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक िकसी भी घायल को कोई गंभीर चोट नहीं आई है तथा सभी चोटें साधारण प्रकृ ित की हैं। िचिकत्सीय साक्ष्यों से भी उक्त तथ्य की पिरपुिष्ट होती है िक िकसी भी चुटैल को कोई भी चोट शरीर के ममर्स्थल पर नहीं हैं तथा कोई भी चोट प्राणघातक नहीं हैं। चुटैलों के बयानों, िचिकत्सीय आख्या से
अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है एवं किथत घटना को कािरत िकये जाने में आवेदक की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की गई है। आवेदक लगभग 57 वषर् का वृद्ध व्यिक्त है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 20.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv.
आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस BAIL No. 30750 of 2025 2
अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 9, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30750 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad