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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30478 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 635/2025, अंतगर्त धारा 318(2), 127(2), 351(2) बी.एन.एस. एवं धारा 3, 5(1) उ०प्र० िविध िवरुद्ध धमर् संपिरवतर्न प्रितषेध अिधिनयम (2021), थाना कोतवाली शहर, िजला िबजनौर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक के िवरुद्ध प्राथिमकी में आरोिपत िकये गये आरोप सही नहीं हैं तथा िबना िकसी वजह के आवेदक को वतर्मान मामले में अिभयुक्त बना िदया गया है। आवेदक द्वारा वािदनी की सहमित के बगैर उसका धमर्-पिरवतर्न नहीं कराया गया है। वास्तिवक तथ्य यह है िक वािदनी का पित उसे जानता था और वािदनी के पित और आवेदक के बीच कु छ संबंध थे। आवेदक के पित को इस तथ्य की पूरी जानकारी थी िक आवेदक मुिस्लम समुदाय से है। वािदनी अपने पित की मृत्यु के पश्चात् अपना तथा अपने छह बच्चों, जो उसके पहले पित के साथ सहवास से उत्पन्न हुए थे, का भरण-पोषण करने में असमथर् हो गई। आवेदक वािदनी के पित को जानता था तथा वह उनकी मदद करना चाहता था, िजसके फलस्वरूप वािदनी एवं आवेदक ने िववाह करने का िनणर्य िलया तथा आवेदक और वािदनी के बीच यह भी सहमित हुई है िक आवेदक वािदनी के पूवर् पित की मृत्यु के पश्चात् उसके द्वारा छोड़े गए छह बच्चों को भी स्वीकार करेगा तथा उनका भरण-पोषण करेगा। तथ्यों और पिरिस्थितयों के आधार पर, आवेदक और वािदनी ने इस्लाम धमर् स्वीकार करके आपस में िववाह करने पर सहमित व्यक्त की। उन्होंने िदनांक 03.06.2011 Versus Counsel for Applicant(s) : M J Akhtar, Shahzad Alam, Sr.
Advocate Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Naseemuddin .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
को िववाह का एक दस्तावेज भी प्रस्तुत करके अपने िववाह की घोषणा की। िकन्तु जब वािदनी के पूवर् पित के पिरवार के सदस्यों को उक्त िववाह के बारे में पता चला, तो उन्होंने वािदनी को परेशान करना शुरू कर िदया, िजसके पिरणामस्वरूप वािदनी ने आवेदक के िवरुद्ध वतर्मान प्राथिमकी पंजीकृ त करायी। तत्पश्चात वािदनी ने उपरोक्त िशकायत मामले की कायर्वाही में धारा 200 सी.आर.पी.सी. के तहत अपने बयान में उसने स्वयं अपने धमर् पिरवतर्न और आवेदक के साथ अपने िववाह के बारे में स्वीकार िकया है। (ख) अिग्रम उनके द्वारा यह कथन िकया गया िक प्रथम सूचना िरपोटर् में यह स्पष्ट है िक उसके पित की मृत्यु के समय उसके छः बच्चे थे, अथार्त् 3 पुित्रयाँ और 3 पुत्र। वे भी वािदनी के साथ आये हैं और वषर् 2011 से आवेदक के घर में उसके साथ रहते हैं तथा उनके मध्य कोई िववाद नहीं था एवं आवेदक वािदनी और उसके छः बच्चों को जीवन की सभी सुिवधाएँ आिद प्रदान करके उनका भरण-पोषण भी कर रहा है। वािदनी एवं आवेदक के संसगर् से दो बच्चों का भी जन्म हुआ है। आवेदक ने अपनी बड़ी बेटी का िववाह एक िहदू लड़के से िकया है। वािदनी एवं आवेदक िवगत 13 वषोर्ं से साथ रह रहे थे। उक्त अविध में कोई िववाद नहीं हुआ, परन्तु वािदनी ने कु छ व्यिक्तयों के उकसावे में आकर आवेदक पर अपनी आधी भूिम अपने नाम करने का दबाव बनाना शुरू कर िदया। जब आवेदक इसके िलए सहमत नहीं हुआ, तो वािदनी ने आवेदक का घर छोड़ िदया तथा उसके िवरुद्ध उपरोक्त प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् करा दी। आवेदक द्वारा वािदनी के आभूषण और 8 लाख रुपये की रािश छीनने के बारे में अिभलेख पर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। (ग) प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक आवेदक का िववाह वािदनी के साथ वषर् 2011 में हुआ था, जबिक यू.पी. िविध िवरुद्ध धमर् संपिरवतर्न प्रितषेध अिधिनयम, 2021 की धारा का प्रावधान वषर् 2021 में लागू हुआ, इसिलए यह नहीं कहा जा सकता है िक आवेदक ने यू.पी.
िविध िवरुद्ध धमर् संपिरवतर्न प्रितषेध अिधिनयम, 2021 की धारा 3, 5(1) के प्रावधान का उल्लंघन िकया है और उक्त आरोिपत धाराओं का अपराध प्रथमदृष्टया आवेदक के िवरुद्ध बनता पिरलिक्षत नहीं हो रहा है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 26/27.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। BAIL No. 30478 of 2025 2
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv.
आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 12, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30478 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad