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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30448 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 312/2025, अंतगर्त धारा 333, 115(2), 352, 351(2), 109(1), 117(2) बी.एन.एस., थाना मूंढ़़़़ापाण्डे, िजला मुरादाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री रफत रजा खान एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। वास्तिवक तथ्य यह है िक आवेदक और सूचनाकतार् एक ही पिरवार के हैं और दोनों पिरवारों के बीच पैतृक संपित्त का भूिम िववाद है और इस िववाद के कारण दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ और आवेदक भी उसी घटना में घायल हो गया और उसको सीएचसी मूढ़़़ापांडे, िजला-मुरादाबाद से िजला अस्पताल, मुरादाबाद रेफर िकया गया। वतर्मान घटना को कािरत िकये जाने में िकसी भी अिभयुक्त की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की गयी है, वरन् सभी अिभयुक्तों की सामान्य भूिमका दशार्यी गयी है। संबंिधत पुिलस ने आवेदक द्वारा सूचनाकतार् और अन्य व्यिक्तयों के िवरुद्ध मामला दजर् करने के िलए दी गई प्रथम सूचना िरपोटर् को अपने पास रख िलया और आवेदक की प्राथिमकी दजर् नहीं की। आवेदक का क्रॉस के स दजर् नहीं िकया जा रहा है क्योंिक आवेदक और उसके बेटे को भी िगरफ्तार कर िलया गया है। वास्तव में वतर्मान मामला एक क्रॉस-वज़र्न के स है और दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं। सूचनाकतार् एवं अन्य किथत घायलों की संबंिधत िचिकत्सा अिधकारी के समक्ष िचिकत्सकीय जांच की गई, िजसमें डॉक्टर ने लगभग सभी चोटों को साधारण प्रकृ ित का और ददर् की िशकायत वाला बताया और एक्स-रे कराने की सलाह दी और घायल सुनील की एक्स-रे िरपोटर् में रेिडयोलॉिजस्ट ने एन.ए.डी. की आख्या दी, जबिक घायल अवनेश देवी की एक्स-रे िरपोटर् में रेिडयोलॉिजस्ट ने चोट सं०1. एन. ए.डी. और चोट सं० 2.
के संबंध में फ्रै क्चर की आख्या दी। तत्पश्चात् एक्स-रे िरपोटर् के आधार पर जांच करने वाले डॉक्टर द्वारा पूरक जांच िरपोटर् तैयार की गई और सुनील, परेश और राजेश की चोटों की प्रकृ ित को साधारण और अवनेश देवी की चोटों की प्रकृ ित को गंभीर बताया गया, िकन्तु उक्त चुटैल की चोट शरीर के िकसी ममर्स्थल पर नहीं पायी गयी है। आवेदक के िवरुद्ध प्राथिमकी में लगाए गए किथत आरोप से कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। वास्तव में, िकसी भी व्यिक्त को िकसी भी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है तथा जो भी साक्षीगण हैं, वे सभी िहतबद्ध साक्षी हैं। चुटैलों के बयानों एवं अिभयोजन कथानक Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Kumar Bind, S. Kamal Akhtar Khan Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Rafat Raza Khan Surajpal Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
में परस्पर िवरोधाभास है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 17.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6.
अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 12, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30448 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad