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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 91636 (ALL)

VIVEK YADAV AND ANOTHER v. STATE OF U.P.

NABAIL/7202/2025 · 2025-09-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7202 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदकगण िववेक यादव, िवशाल यादव की ओर से मु०अ०सं० 113/2024 अन्तगर्त धारा 323, 504, 506, 307, 325 भा०दं०िव०, थाना भदोही, िजला भदोही में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदकगण की ओर से िवद्वान अिधवक्ता श्री वी०पी० श्रीवास्तव, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री अमरेन्द्र कु मार िमश्रा एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री जयिकशन चौरिसया को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. (क) आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया प्रथम सूचना िरपोटर् धारा 307, 323, 504, 506 भा०दं०िव० के अंतगर्त पंजीकृ त करायी गयी थी, जबिक चुटैल को आयी चोटें साधारण प्रकृ ित की थीं और इसिलए धारा 307 भा०दं०िव० और 325 भा०दं०िव० के तहत अपराध का गठन करने वाले तत्व स्पष्ट रूप से अनुपिस्थत थे, लेिकन जांच अिधकारी ने आवेदकों के िखलाफ धारा 307 भा०दं०िव० और 325 भा०दं०िव० के तहत आरोप-पत्र प्रस्तुत िकया। धारा 307 भा०दं०िव० और 325 भा०दं०िव० के तहत अपराध बनाने वाले आरोपों के संबंध में अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी िकसी भी गंभीर या जानलेवा चोट के संबंध में साक्ष्य के अभाव के कारण ध्वस्त हो जाती है, क्योंिक डॉक्टर ने यह नहीं कहा है िक कोई भी चोट जीवन के िलए खतरनाक थी। आगे यह कहा गया िक चुटैल के शरीर पर कु ल 12 चोटें हैं और चोट संख्या 2, 4, 6 और 7 को छोड़कर सभी चोटें प्रथम दृष्टया साधारण प्रकृ ित की बताई गई हैं। संबंिधत िचिकत्सक ने चोट संख्या 2, 4, 6 और 7 का एक्स-रे कराने का िनदेर्श िदया और एक्स-रे िरपोटर् प्राप्त होने पर िचिकत्सक ने एक पूरक िरपोटर् में राय दी िक चोट संख्या 2, 4 और 7 भी साधारण प्रकृ ित की हैं, यद्यिप चोट संख्या 6, जो स्पष्ट रूप से Versus Counsel for Applicant(s) : Nikhil Kumar, Vagish Yadav Counsel for Opposite Party(s) : Amrendra Kumar Mishra, G.A. Vivek Yadav And Another .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) बाएं घुटने के जोड़ पर है, जो िक महत्वपूणर् अंग नहीं है, गंभीर प्रकृ ित की बताई गई है। (ख) उनके द्वारा यह तकर् िदया गया िक आवेदकगण ने प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् होने और जांच के उपरांत अिग्रम जमानत के िलए अिग्रम जमानत आवेदन संख्या 7018/2024 योिजत िकया, िजसमें माननीय न्यायालय द्वारा पािरत आदेश 26.07.2024 के द्वारा आवेदक को अंतिरम जमानत पर मुक्त िकया गया, इस आदेश की प्रमािणत प्रित मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, भदोही के समक्ष िदनांक 06.08.2024 को दािखल की गई थी तथा िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, भदोही द्वारा पािरत आदेश िदनांक 06.08.2024 द्वारा आवेदन को स्वीकार कर िलया गया तथा आवेदकगण द्वारा िदनांक 26.07.2024 के आदेश द्वारा इस माननीय न्यायालय द्वारा लगाए गए िनयमों एवं शतोर्ं के संबंध में मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, भदोही के न्यायालय में एक वचनबद्धता भी दािखल की गई। अिग्रम जमानत स्वीकृ त होने के पश्चात्, आवेदकों ने जांच में भाग िलया और अपनी िनदोर्षता िसद्ध करने के िलए जांच अिधकारी को अनेक दस्तावेज उपलब्ध कराए, तथािप जांच अिधकारी द्वारा उक्त दस्तावेजों को जानबूझकर नजरअंदाज कर िदया गया और उन्होंने के स डायरी में इन दस्तावेजों को शािमल नहीं िकया। आवेदकगण, जांच अिधकारी के साथ सहयोग कर रहे थे तथा यह सुिनिश्चत कर रहे थे िक सुचारू, िनष्पक्ष एवं कु शल जांच के िलए सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जाए और इसी भावना से, आवेदकों के बयान भी जांच अिधकारी द्वारा िदनांक 14.08.2024 को के स डायरी में दजर् िकए गए। यद्यिप, आवेदकों ने अिभयोजन पक्ष के आरोपों का खंडन िकया, परन्तु जांच अिधकारी ने आवेदकों के संपूणर् बयान दजर् नहीं िकए तथा उस िदन आवेदकगण के िवरूद्ध धारा 325 भा०दं०िव० के बढ़़़़ोत्तरी करते हुए आरोप पत्र दािखल कर िदया गया, जबिक अिभयोजन पक्ष की पूरी कहानी िकसी भी गंभीर या जानलेवा चोट के संबंध में साक्ष्य के अभाव के कारण बलहीन हो जाती है। पुनः आवेदकगण की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्तगण द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। इस मामलें में अिभयुक्तगण को मा० न्यायालय द्वारा अिग्रम जमानत आवेदन संख्या 7018/2024 में पािरत आदेश 26.07.2024 के द्वारा अंतिरम जमानत पर मुक्त िकया गया था, िकतु इनके द्वारा अंतिरम जमानत आवेदन पत्र विणत शतोर्ं का अनुपालन नहीं िकया जा रहा था , िजसके उपरांत मा० न्यायालय आदेश िदनांक 14.07.2025 के द्वारा अिभयुक्तगण को प्रदत्त अिग्रम अंतिरम जमानत िनरस्त कर िदया गया तथा आवेदकगण को िनयिमत जमानत आवेदन प्रस्तुत करने हेतु िनदेर्िशत िकया गया, िकतु आवेदक की ओर से पुनः NABAIL No. 7202 of 2025 2 वतर्मान अिग्रम जमानत प्रस्तुत िकया गया गया है, जबिक िवचारण न्यायालय के अवलोकन से दिशत है िक अिभयुक्तगण के िवरूद्ध गैर-जमानतीय अिधपत्र िनगर्त हो चुका है। इस स्तर पर यिद अिभयुक्तगण को अिग्रम जमानत प्रदान की जाती है तो पूणर् संभावना है िक उसके न्याियक प्रिक्रया में सहयोगी प्रदान नहीं िकया जायेगा। इसिलए, अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं हो रहा है। अतः अिभयुक्तगण का यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदकगण की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक, आवेदकगण/अिभयुक्तगण के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है तथा अिभयुक्तगण के िवरूद्ध गैर-जमानतीय अिधपत्र िनगर्त हो चुका है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है। तद्नुसार, आवेदकगण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, इस अिग्रम जमानत आवेदन पत्र को िनरस्त िकया जाता है। 8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 9. आवेदक िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है। 10. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 22, 2025 CP.sahani NABAIL No. 7202 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad