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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 91406 (ALL)

SHIVAM v. STATE OF U.P.

BAIL/30437/2025 · 2025-09-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30437 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 236/2025, अंतगर्त धारा 115(2), 352, 351(3), 281, 333, 324(4), 109 बी.एन.एस., थाना जेवर, िजला गौतम बुद्ध नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में दिशत िकया गया है। आवेदक के कब्जे या उसकी िनशानदेही से कोई भी आपित्तजनक वस्तु या हिथयार बरामद नहीं पाया गया है। प्रश्नगत घटना दुघर्टना का मामला है। उक्त प्रकरण में घटना से सम्बिन्धत िकसी भी व्यिक्त को कोई चोट नहीं आई है, िजससे घटना संिदग्ध प्रतीत होती हो, न ही प्राथिमकी में कहीं भी सूचनाकतार् द्वारा यह कहा गया है िक चुटैल पर जान से मारने की नीयत से हमला िकया गया है। आवेदक का वाहन दुघर्टनावश अिनयंित्रत होकर सूचनाकतार् की दुकान में जा घुसा, िजसके पिरणामस्वरूप सूचनाकतार् और अन्य व्यिक्त जयप्रकाश को चोटें आईं। उपयुर्क्त घटना पूणर्तः आकिस्मक थी और आवेदक द्वारा जानबूझकर या स्वेच्छा से नहीं की गई थी। आवेदक की सूचनाकतार्/चुटैलों से पहले की कोई दुश्मनी नहीं थी, न ही नुकसान Versus Counsel for Applicant(s) : Manoj Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : Ankush Sharma, G.A. Shivam .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। सूचनाकतार् एवं पुिलस द्वारा िमलीभगत से आवेदक के िवरुद्ध धारा 109, 333 बी.एन.एस. की धाराएं आरोिपत की गयी हैं। उक्त घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है।चुटैलों को शरीर के अन्य अंगों पर चोटें आई हैं तथा कोई भी चोट शरीर के ममर्स्थल पर नहीं हैं और वे जीवन के िलए खतरा नहीं हैं। चुटैलों की िचिकत्सीय परीक्षण आख्या/एक्स-रे िरपोटर् में भी चोटों की प्रकृ ित में NAD विणत है। (ख) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने न्यायालय का ध्यान Modi's Jurisprudence की ओर आकृ ष्ट िकया। िजसमे उन्होंने बताया िक िसफर् पसली के टूटने पर कोई प्राणघातक चोट नहीं आती, जब तक िक पसली से िकसी आंितरक अंग को चोट नहीं पहुंचती। Modi Jurisprudence में कु छ इस प्रकार दिशत है जो िक िनम्निलिखत हैः- 29.4.2 Chest wall:- Contusions and abrasions of the chest wall may be caused by a blunt weapon, kicks, fall from height or crush under a heavy weight as in vehicular accidents, Collapse of buildings and stampede could also be causes for crush injuries on chest. These may be accompanied by fractures of the ribs or sternum, or associated with grave visceral injury. Even when not accompanied by such injuries, severe blows on the chest wall may produce a concussion of the chest causing considerable shock followed by death. Simple contusions and abrasions of the chest wall may be followed by pleurisy or pneumonia. Wounds of the chest wall are not dangerous, unless the cavity is penetrated and a vital organ is injured. In non-penetrating wounds, there may be free haemorrhage from the divided mammary and thoracic arteries. In case of a penetrating injury of the chest by sharp penetrating weapons or gunshots, there may be little or no external bleeding. but profuse and fatal internal bleeding. BAIL No. 30437 of 2025 2 This is due to a valve like overlap of tissue at the wound after withdrawal of the weapon. Collected blood may be liquid, clotted or usually a mixture of both. (ग) पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 18.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही BAIL No. 30437 of 2025 3 करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। (Dr. Gautam Chowdhary,J.) September 4, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30437 of 2025 4 Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad