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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 91305 (ALL)

PRAMILA DEVI v. STATE OF U.P.

BAIL/30524/2025 · 2025-09-14

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30524 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री एस.पी. उपाध्याय एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 152/2022, अंतगर्त धारा 420, 465, 467, 468, 471, 504, 506 भा.दं.सं., थाना रोहिनया, िजला वाराणसी में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 3.(क) प्रासंिगक तथ्य यह है िक स्वगीर्य चटनी उफर् चटनी, ग्राम ठठरा, परगना कसवार राजा, तहसील राजातालाब, िजला वाराणसी में िस्थत खसरा संख्या 8 (0.388 हेक्टेयर) और खसरा संख्या 623 (0.384 हेक्टेयर) के पंजीकृ त खातेदार थे। अपने जीवनकाल के दौरान, स्वगीर्य चटनी ने स्वेच्छा से और वैध रूप से आवेिदका, श्रीमती प्रिमला देवी के पक्ष में िदनांक 25.11.2019 को एक पंजीकृ त वसीयत िनष्पािदत की थी, िजन्होंने अपने पित के साथ िमलकर िदनांक 16.04.2020 को उनकी मृत्यु तक उनके बुढ़़़़ापे में उनकी देखभाल की और उनका अंितम संस्कार भी िकया। स्वगीर्य चटनी के िनधन के पश्चात्, आवेिदका ने 27 अगस्त को उक्त पंजीकृ त वसीयत के आधार पर अपने नाम के नामान्तरण हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व संिहता, 2006 की धारा 34/35 के अंतगर्त, वाद संख्या 1380/2022, कायर्वाही प्रारम्भ की। तहसीलदार (न्याियक), राजातालाब ने सम्यक सूचना एवं सुनवाई के पश्चात्, िदनांक 28.03.2022 को एक युिक्तसंगत आदेश पािरत िकया, िजसके द्वारा आवेिदका का नाम राजस्व अिभलेखों में नामान्तरण करने का िनदेर्श िदया गया। यह भी स्पष्ट है िक आवेिदका का नाम खतौनी में सिम्मिलत है। तत्पश्चात, सूचनाकतार् ने िदनांक 28.03.2022 के उपरोक्त आदेश के िवरुद्ध एक िरकॉल आवेदन दायर िकया था, िजस पर गहन िवचार िकया गया और िदनांक 24.02.2025 को उसे अस्वीकार कर िदया गया, िजससे दािखल-खािरज की कायर्वाही को Versus Counsel for Applicant(s) : Majahar Ali Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Naveen Kumar Gupta, Shree Prakash Upadhyay Pramila Devi .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) अंितम रूप िदया गया। िदनांक 28.03.2022 के आदेश के तुरंत बाद, और िरकॉल आवेदन के अस्वीकार होने से पहले ही िदनांक 24.04.2022 को वतर्मान एफआईआर दजर् कराना दशार्ता है िक सूचनाकतार् द्वारा िसिवल न्याय-िनणर्यन के प्रितवाद के रूप में, के वल आवेिदका पर दबाव डालने और उसे परेशान करने के उद्देश्य से, दुभार्वनापूवर्क आपरािधक कायर्वाही शुरू की है। अिभयोजन कथानक पूरी तरह से िनराधार है। सूचनाकतार् न तो स्वगीर्य चटनी उफर् चटनी से संबंिधत है और न ही उसके पास कभी भी संबंिधत भूिम का कब्जा या स्वािमत्व रहा है। आरोप के वल उस संपित्त को हड़पने के िलए लगाए गए हैं जो वास्तव में आवेदक की है। आवेिदका द्वारा िकसी प्रकार की जालसाजी, फजीर्वाड़ा अथवा कू टरचना कािरत नहीं की गयी है। जालसाजी और प्रितरूपण के आरोप अस्पष्ट, सामान्य हैं, और िकसी भी साक्ष्य द्वारा प्रथमदृष्टया समिथत नहीं हैं। पंजीकृ त वसीयत कानून के अनुसार िनष्पािदत और सत्यािपत की गई थी। प्राथिमकी स्पष्ट रूप से एक िवचारहीन कारर्वाई है, जो वसीयत के पंजीकरण के लगभग दो साल बाद और राजस्व अिभलेखों में आवेिदका के नाम के पिरवतर्न के बाद ही दजर् की गई है, इसिलए आवेदक के िवरुद्ध उपरोक्त अपराध बनता पिरलिक्षत नहीं हो रहा है। सूचनाकतार् द्वारा उक्त वसीयत को िकसी भी सक्षम न्यायालय के समक्ष चुनौती नहीं दी गयी है। (ख) अिग्रम आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक आवेिदका द्वारा ऐसा कोई भी अपराध कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में दिशत िकया गया है। िदनांक 25.11.2019 को पंजीकृ त वसीयत वास्तिवक, वैध है और स्वगीर्य चटनी उफर् चटनी द्वारा अपनी पूणर् मानिसक क्षमता के साथ, िबना िकसी दबाव, धोखाधड़ी या अनुिचत प्रभाव के , स्वेच्छा से िनष्पािदत की गई है। उक्त वसीयत भारतीय उत्तरािधकार अिधिनयम और पंजीकरण अिधिनयम के अंतगर्त सभी कानूनी औपचािरकताओं को पूरा करने के पश्चात, सक्षम प्रािधकारी , अथार्त् उप-पंजीयक, गपुर, िजला वाराणसी के समक्ष िविधवत पंजीकृ त की गई थी। वसीयत के िनष्पादन को दो स्वतंत्र सत्यापनकतार् गवाहों, अथार्त् रिवकांत और श्रीमती माधुरी देवी (सह- अिभयुक्तगण), ने भारतीय उत्तरािधकार अिधिनयम, 1925 की धारा 63 और भारतीय साक्ष्य अिधिनयम, 1872 की धारा 68 के तहत आवेिदका का सत्यापन िकया था, और इसके पंजीकरण के समय सूचनाकतार् या िकसी तीसरे पक्ष द्वारा कोई आपित्त नहीं उठाई गई थी। वसीयत में वसीयतकतार्, स्वगीर्य चटनी द्वारा एक स्पष्ट घोषणा शािमल है, िजसमें उन्होंने अपनी ज़मीन का िहस्सा श्रीमती प्रिमला देवी (आवेिदका) को देने की इच्छा व्यक्त की है, िजन्हें वे अपनी बेटी मानते थे और िजन्होंने अपने पित के साथ िमलकर उनकी अंितम सांस तक उनकी देखभाल की।प्राथिमकी काफी देरी से, यानी वसीयत के पंजीकरण के लगभग ढ़़़ाई साल बाद, और आवेिदका का नाम राजस्व अिभलेखों में दजर् होने के बाद ही दजर् की गई है तथा उक्त देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेिदका की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। BAIL No. 30524 of 2025 2 आवेिदका िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 24.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेिदका को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेिदका के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेिदका को जमानत पर न छोड़ा जाय। पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा न्यायालय को इस तथ्य से भी अवगत कराया गया िक सूचनाकतार् की मृत्यु हो चुकी है। 5. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेिदका को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेिदका को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेिदका िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी। ii. आवेिदका अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगी/धमकायेगी नहीं। iii. आवेिदका न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगी तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगी। iv. आवेिदका जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगी और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगी न कोई अपरािधक कृ त्य करेगी। v. आवेिदका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगी न ही उनसे कोई वायदा करेगी, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेिदका की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 15, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30524 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad