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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30667 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता चंदन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 35/2025, अन्तगर्त धारा 406, 419, 420, 467, 468, 471, 504, 506 भा०दं०िव०, थाना घोसी, िजला मऊ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
3. संक्षेप में अिभयोजन कथानक इस प्रकार है िक वादी द्वारा इस आशय की प्राथिमकी दजर् करायी गयी िक वादी से िविपन चौहान ने कहा मेरे बुआ का लड़का दीपक चौहान (वतर्मान आवेदक) का सम्पकर् ऋषभ जैन से है, िजसकी सिचवालय में अच्छी पकड़ है, उनसे वादी को लखनऊ में िमलवाया। वादी से अिभयुक्तों ने िसक्योिरटी के िलये रू0 50,000/- कै श िलया और वादी के चाचा जयचन्द चौहान के यूिनयन बैंक खाते से िदनांक 08.08.2018 को रू0 3,00,000/- (तीन लाख रु०) चेक सं० 21009669 व िदनांक 09.08.2018 को रु0 2,00,000/- (दो लाख रु०) चेक सं०. 21009670 के जिरये अिभयुक्त ऋषभ जैन के खाते में भेजवा िदया तथा ऋषभ जैन ने एल.डी.सी.
क्लकर् ग्रेड राज्य सम्पित्त िवभाग शासन का िनयुिक्त पत्र भी िदया। नौकरी संिवदा पर होने पर वादी पैसा मांगने लगा, तब ऋषभ जैन ने कहा िक में तुम्हें भारतीय खाद्य िनगम में लगवा दूंगा, लेिकन उसके िलये रु0 12,00,000/- (बारह लाख रु०) लगेंगे। तब वादी के िपता ने अपनी बेची गयी जमीन का पैसा रू0 4,30,000/- (चार लाख तीस हजार रु०) लखनऊ प्रीिमयर होटल में दीपक चौहान (आवेदक) व िविपन चौहान को अतुल िवश्वकमार् एवं अिभयुक्त िविपन चौहान के िपता चन्द्रभान चौहान की मौजूदगी में िदये। कु छ िदनों बाद भारतीय खाद्य िनगम का िनयुिक्त पत्र एवं पिरचय पत्र िदया। उसके बाद ऋषभ जैन द्वारा िविपन चौहान को रू0 60,000/- (साठ हजार रु०) नगद िदलाया गया और रू0 55,000/- ( पचपन हजार रु०) दीपक चौहान (आवेदक) को वादी के चाचा के खाते के माध्यम से िदनांक 05.12.2018 को िदलवाया एवं दस्तावेज सत्यापन के नाम पर रू0 10,000/- (दस हजार रु० ) स्वयं ( ऋषभ जैन) के खाते में डलवाया। नौकरी न लगने पर वादी ने जब अपना पैसा मांगा तब काफी समय बाद िदनांक 01.05.2022 को अिभयुक्त ऋषभ जैन ने वादी के िपता के नाम पर पांच-पांच लाख का कु ल 10,00,000/- (दस लाख रु०) का दो चेक िदया, जो िक अिभयुक्त ऋषभ जैन के खाते में पयार्प्त धनरािश न होने के कारण बांउस हो गया। पुनः वादी द्वारा अपना पैसा मांगने पर अगला चेक देने के नाम पर एक वषर् तक टालता रहा, िफर कु छ Versus Counsel for Applicant(s) : Girjesh Kumar Srivastava, Kumar Ashutosh Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Surendra Nath Chauhan Deepak Chauhan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
िदनों बाद पैसा मांगने पर गाली देते हुए कहा तुम्हें जो करना है कर लो, मैं तुम्हे पैसा नहीं दूंगा और लखनऊ पैसे के िलए आओगे तो जान से मरवा दूंगा।
4.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक द्वारा वादी अथवा िकसी अन्य व्यिक्त से नौकरी िदलवाने के नाम पर कोई भी किथत धनरािश नहीं ली गयी है, न ही वादी को नौकरी िदलाने का वादा िकया है। घटना वषर् 2018 की बतायी गयी है, जबिक प्राथिमकी लगभग सात वषर् के अित-िवलम्ब से दजर् करायी गयी है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक दुकानों पर जूते की आपूित का काम करता है तथा आवेदक के खाते में जो भी रुपए हस्तांितरत िकये गये हैं, वह व्यावसाियक उद्देश्य से िकये गये हैं। आवेदक को रंिजशन वतर्मान वाद में िमथ्यारोिपत कर िदया गया है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक एवं अन्य सह-अिभयुक्तों द्वारा िमलकर वादी को नौकरी िदलाने के नाम पर भ्रिमत िकया गया तथा कू टरिचत िनयुिक्त पत्र एवं पिरचय पत्र प्रदान िकये गये तथा िभन्न-िभन्न ितिथयों पर अवांिछत धनरािश बैंक खाते के माध्यम से प्राप्त की गयी। वादी को कोई नौकरी प्राप्त नहीं हुई एवं आवेदक एवं अन्य सह- अिभयुक्त द्वारा वादी का पैसा गबन कर िलया गया, जब वादी द्वारा अपने उपरोक्त पैसे की माँग की गयी, तो उसे जान से मारने की धमकी भी दी गयी। अिभलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं संलग्न बैंक िववरणों से भी अिभयोजन कथानक का समथर्न हो रहा है। आवेदक द्वारा अन्य सह-अिभयुक्तों के साथ िमलकर उक्त कृ त्य कािरत िकया गया एवं वतर्मान अपराध को कािरत करने में आवेदक की मुख्य भूिमका विणत की गयी है, जो िक गम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाए।
6. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर मुक्त िकए जाने का कोई औिचत्य नहीं है तथा यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकये जाने योग्य है।
7.
उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष को प्रभािवत िकये बगैर यह जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। September 9, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30667 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad