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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 90403 (ALL)

KRIPA JAISWAL ALIAS KRIPA SHANKAR JAISWAL v. STATE OF U.P.

BAIL/30413/2025 · 2025-09-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30413 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0105/2025, अंतगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471, 504, 506 भा.दं.सं., थाना िसन्धौरा, िजला वाराणसी में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री सी.पी. िसह की तरफ से आज वकालतनामा दािखल िकया गया तथा आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजन्हें पत्रावली पर रखा जाय। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार की कू टरचना/धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है। सूचनाकतार् द्वारा कु लदीप जायसवाल और यशदीप जायसवाल, अथार्त् आवेदक के भाई के पुत्रों से भूिम खरीदी है और उसे भूिम पर िविधवत कब्ज़ा प्राप्त हो गया है और उसने खरीदी गई भूिम पर चारदीवारी भी बना ली है। प्राथिमकी से भी यह स्पष्ट है िक आवेदक द्वारा सूचनाकतार् को कोई भूिम नहीं बेची गई है। आवेदक ने कभी भी खरीदी गई भूिम पर सूचनाकतार् के शांितपूणर् कब्जे में कोई बाधा डालने का प्रयास नहीं िकया है। सूचनाकतार् ने संबंिधत पुिलस को अपने प्रभाव में लेकर यह एफ.आई.आर. दजर् कराई है क्योंिक यह आरोप लगाया गया है िक आवेदक ने सह-अिभयुक्त अशोक कु मार को चौथा िवक्रय िवलेख िनष्पािदत करने से पहले तीन अन्य िवक्रय िवलेख िनष्पािदत िकए हैं, लेिकन पहले िकसी भी खरीदार/िवक्रे ता ने आवेदक के िखलाफ कभी कोई िशकायत दजर् नहीं कराई है क्योंिक यह स्वीकार िकया गया है िक आवेदक के पास आराजी Versus Counsel for Applicant(s) : Pawan Giri, Rupesh Kumar Singh, Syed Irfan Ali Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kripa Jaiswal Alias Kripa Shankar Jaiswal .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) संख्या 838 वाली भूिम का आधा िहस्सा है और आवेदक द्वारा कोई धोखाधड़ी या छल नहीं िकया गया है और न ही आवेदक द्वारा कोई फजीर् दस्तावेज तैयार िकया गया है। वास्तव में सूचनाकतार् ने आराजी संख्या 838 में खरीदी गई भूिम पर अपना कब्जा लेने के बाद भी, आराजी संख्या 838 में आवेदक की भूिम के पूरे िहस्से को हड़पने का प्रयास िकया और जब आवेदक और उसके पुत्रों ने सूचनाकतार् के िवरुद्ध आपित्त की, तो आवेदक और अन्य सह- अिभयुक्तों के िवरुद्ध यह प्राथिमकी दजर् की गई। आराजी संख्या 838 वाली भूिम संयुक्त संपित्त है तथा आवेदक और उसके भाई के नाम दजर् है और उक्त आराजी का कोई सटीक िवभाजन नहीं हुआ है। आवेदक ने सूचनाकतार् से कभी मुलाकात नहीं की है और न ही आवेदक और सूचनाकतार् के बीच कभी कोई िववाद हुआ है और न ही आवेदक ने सूचनाकतार् को िववािदत संपित्त से बेदखल करने का प्रयास िकया है। वतर्मान वाद दीवानी प्रकृ ित का है, िकन्तु जान- बूझकर इसे आपरािधक रूप देने का प्रयास िकया गया है। आवेदक की आयु लगभग 80 वषर् है और वह हृदय संबंधी समस्याओं सिहत कई वृद्धावस्था संबंधी बीमािरयों से ग्रस्त है। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 38 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 22.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग BAIL No. 30413 of 2025 2 करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 4, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30413 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad