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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 90288 (ALL)

SMT. RAJNI DEVI AND 2 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NABAIL/7215/2025 · 2025-09-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7215 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदकागण श्रीमती रजनी देवी, श्रीमती नीलम एवं श्रीमती कु न्ती की ओर से मु०अ०सं० 890/2017 अन्तगर्त धारा 147, 323, 304 भा०दं०िव०, थाना नारखी, िजला िफरोजाबाद में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेिदकागण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री चन्दन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेिदकागण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदकागण िनदोर्ष है, उन्हें उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। यहां प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक संबंिधत िवचारण न्यायालय में इस आशय का शपथ-पत्र प्रस्तुत िकया गया िक उसकी माता/ मृतका भैंस द्वारा मारे गये चोंट के कारण मृत्यु हुई थी तथा आवेिदकागण द्वारा कोई चोट कािरत नहीं की गयी। पुनः उनका कथन है िक आवेिदकागण की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्तागण द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। इस मामलें में अिभयुक्तागण के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है, अिभयुक्तागण की भूिमका Versus Counsel for Applicant(s) : Mohd. Ayub Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Smt. Rajni Devi And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) अिभयोजन द्वारा अिभकिथत है। उनका यह भी तकर् है िक अिभयुक्तागण द्वारा िवचारण न्यायालय में सहयोग प्रदान नहीं िकया जा रहा है। इस स्तर पर यिद अिभयुक्तागण को अिग्रम जमानत प्रदान की जाती है तो पूणर् संभावना है िक उसके न्याियक प्रिक्रया में सहयोगी प्रदान नहीं िकया जायेगा। इसिलए, अिभयुक्तागण को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं हो रहा है। अतः अिभयुक्तागण का यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और उभय पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, अिभयुक्तागण/अिभयुक्तगण की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक, इस मामलें में आवेिदकागण/अिभयुक्तागण के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है। तद्नुसार, आवेिदकागण/अिभयुक्तागण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, इस अिग्रम जमानत आवेदन पत्र को िनरस्त िकया जाता है। 8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 9. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 4, 2025 CP.sahani NABAIL No. 7215 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad