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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 90207 (ALL)

MANISHA SINGH ALIAS PALAK v. STATE OF U.P.

BAIL/30451/2025 · 2025-09-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30451 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेिदका मनीषा िसह की ओर से मु०अ०स० 566/2025, अन्तगर्त धारा 318(2)/ 308(3), 308(5), 351(4), 61(2) बी.एन.एस एवं 66डी आई.टी. एक्ट, थाना क्वासीर्, िजला अलीगढ़ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता हेमेन्द्र प्रताप िसह ने वकालतनामा दािखल िकया उसे पत्रावली पर रखा जाए। 4. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। तथाकिथत घटना का कोई समय,िदनांक दिशत नहीं है अज्ञात है। जबिक थाना हाजा पर उक्त अपराध की प्राथिमकी िदनांक 04-07-2025 को समय 23.10 बजे पंजीकृ त होना दशार्या गया है। आवेिदका पर लगाये गये आरोप एकदम िनराधार है। वादी के घर में आवेिदका व वादी के अनैितक सम्बन्धों की जानकारी हो जाने पर आवेिदका को अलग करने के उद्देश्य से एक षडयन्त्र के तहत वादी द्वारा ही वीिडयो इत्यािद बनायी गयी है। आवेिदका को इस घटना में गलत तथ्यों पर झूठा फं साया गया है। प्र०सू०िर० के तथ्यों से यह स्पष्ट है िक वादी व आवेिदका पहले से ही एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते पहचानते थे। पुनः उनका कथन है िक आवेिदका की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस Versus Counsel for Applicant(s) : Shiv Sharan Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Manisha Singh Alias Palak .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) पर अिधरोिपत करेगी। आवेिदका िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 24.07.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेिदका को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेिदका को जमानत पर न छोड़ा जाये। 6. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेिदका को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेिदका को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेिदका िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी। 1. आवेिदका अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगी/धमकायेगी नहीं। 2. आवेिदका न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगी तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगी। 3. आवेिदका जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगी और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगी न कोई अपरािधक कृ त्य करेगी। 4. आवेिदका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगी न ही उनसे कोई वायदा करेगी , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेिदका की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 4, 2025 S.Mishra BAIL No. 30451 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad