SHIVAM ALIAS BHURE ALIAS SHUBHAM ALIAS BURE v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS
BAIL/30982/2025 · 2025-10-07
Gautam Chowdhary
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 89659 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30982 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 150/2024 , अन्तगर्त धारा 376डी, 506 भा०दं०िव० एवं धारा 5जी/6 पाक्सो एक्ट, थाना जानी, िजला मेरठ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक प्रथम सूचना िरपोटर् िवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। प्रथम सूचना िरपोटर् में के वल छेड़छाड़ करने का आरोप आवेदक के िवरूद्ध आक्षेिपत िकया गया है और िचिकत्सीय परीक्षण के समय डाक्टर के समक्ष िदये गये बयान में के वल छेड़छाड़ करने का अिभकथन िकया गया है, िकतु इसके उपरांत किथत पीिड़ता द्वारा अपने धारा 161 व 164 दं०प्र०स० के बयान में इसके िवपरीत अिभकथन िकया गया है। इससे पिरलिक्षत हो रहा है िक किथत पीिड़ता द्वारा मामलें को रंग देने के आशय से आवेदक के िवरूद्ध किथत आरोप बाद में आक्षेिपत िकया गया है। आगे यह भी कहा गया िक किथत पीिड़ता के िचिकत्सीय परीक्षण आख्या के अनुसार उसके शरीर पर कोई बाहरी चोट आना अंिकत नहीं है तथा अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है। इससे स्पष्ट है िक प्रथम सूचना िरपोटर्, किथत पीिड़ता द्वारा अपने धारा 161 व 164 दं०प्र०स० के बयान के परस्पर िवरोधाभाष है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी Versus Counsel for Applicant(s) : Chandra Jeet Yeadav, Rajkumari Yadav Counsel for Opposite Party(s) : Akhilesh Kumar Mishra, G.A., Lavkush Yadav Shivam Alias Bhure Alias Shubham Alias Bure .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 30.10.2024 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा किथत घटना के संबंध में प्रसािरत वीिडयो के अऩुसार अिभयुक्त की भूिमका पिरलिक्षत है। आगे यह भी कहा गया िक पीिड़ता द्वारा अपने धारा अपने धारा 161 व 164 दं०प्र०स० के बयान में अिभयुक्त की िविशष्ट भूिमका विणत की गयी है। इससे पिरलिक्षत है िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 8, 2025 CP.sahani BAIL No. 30982 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad