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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 7007 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 99/2024 से उद्भूत सत्र परीक्षण सं० 378/2025 (State Vs. Mukesh Kumar Bind), अन्तगर्त धारा 493, 504, 506, 376, 323 भा.दं.सं. एवं धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट, थाना करीमुद्दीनपुर, िजला गाजीपुर में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री जय िकशन चौरिसया को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदक द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। पीिड़ता पूणर् रूप से वयस्क है तथा आपसी सहमित से दोनों के मध्य शारीिरक संबंध स्थािपत हुए हैं। आवेदक पर पीिड़ता से जबरन शादी करने का दबाव बनाने के िलए वतर्मान मुकदमा पंजीकृ त करा िदया गया है। पीिड़ता के बयानों एवं अिभयोजन कथानक में परस्पर िवरोधाभास है। आवेदक द्वारा पीिड़ता के साथ मारपीट नहीं की गयी है, न ही उसे जान से मारने की धमकी दी गयी है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदक को पूवर् में दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र सं० 1608/2025, में आरोपपत्र दािखल िकये जाने तक अिग्रम जमानत प्रदान की गयी थी। आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा शादी का झांसा देकर पीिड़ता के साथ शारीिरक संबंध बनाया तथा बाद में रेलवे ग्रुप-डी में नौकरी लगने के पश्चात आवेदक ने पीिड़ता से शादी करने से मना कर िदया। पीिड़ता ने अपने बयान अंतगर्त धारा 180 एवं 183 बी.एन.एस.एस.
में भी कथन िकया है िक "वषर् 2018 में आवेदक ने उससे बोला िक वह उससे प्यार करता है तथा बािलग होने पर शादी करने की बात करके सन् 2018 में वह उसके साथ सम्बंध बनाया। उसका िबल्कु ल भी मन नहीं था। नवम्बर 2018 में एक लोग देख िलये, तब आवेदक को उसके घरवाले Versus Counsel for Applicant(s) : Santosh Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Shivam Singh Mukesh Bind .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
बात करने से मना कर िदये। िफर कु छ िदन बाद बात करना शुरू कर िदया और शादी का झांसा देने लगा। िदनांक 13.04.2023 को मंिदर में ले जाकर िसन्दूर लगा िदया। शादी का कोई िविध िवधान नहीं िकया। िसन्दूर भरने के बाद होटल में ले गया। माचर् में अप्रैल में आकर झगड़ा करने लगा और बोला िक वह शादी करेगा। मई 2024 में जॉब में आया, िफर झगड़ा सुलझाने के िलए घर बुलाया, िफर शारीिरक सम्बंध बनाया।" पीिड़ता के उक्त बयानों से स्पष्ट है िक आवेदक द्वारा उसके साथ शादी का झांसा देकर गलत कृ त्य कािरत िकया गया है। िववेचना के बाद पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर िववेचक द्वारा संबंिधत िवचारण न्यायालय के समक्ष आरोपपत्र दािखल िकया जा चुका है, इसिलए आवेदक को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः अिभयुक्त का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय।
5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
6.
वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक संबंिधत िवचारण न्यायालय में आवेदक के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य पाये जाने के उपरान्त आरोपपत्र प्रेिषत िकया जा चुका है तथा प्रथमदृष्टया आवेदक के िवरुद्ध आरोिपत धाराओं का अपराध बनता पिरलिक्षत हो रहा है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है।
7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है।
8. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 4, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 7007 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad