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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 30465 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 144/2024, अंतगर्त धारा 419, 420, 406, 467, 468, 471 भा.दं.सं., थाना रायपुर, िजला सोनभद्र में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक पर आक्षेप है िक आवेदक और अन्य व्यिक्तयों द्वारा धोखाधड़ी करके , सूचनाकतार् की खरीदी गई भूिम को हड़पने और िवत्तीय हािन पहुँचाने के इरादे से उक्त भूिम का दोबारा क्रय -िवक्रय कर िदया गया। िजसके संबंध में आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। यह प्रासंिगक तथ्य है िक आवेदक और उसके भाइयों ने आराजी संख्या 169, क्षेत्रफल 0.261 हेक्टेयर,126.48 वगर् मीटर में से िहस्सा हिरचरण पुत्र िवश्वनाथ से िदनांक 25.06.2024 को पंजीकृ त िवक्रय िवलेख के माध्यम से खरीदा था, िजसमें सीमा पूवर् में िमटू देवी की भूिम, पिश्चम में रामअवध व अन्य की भूिम, उत्तर में िविस्मल्ला अंसारी व अन्य की भूिम तथा दिक्षण में हिरचरण की भूिम दशार्ई गई थी।आवेदक और उसके भाई का नाम राजस्व अिभलेखों में तहसीलदार, न्याियक, रॉबट्र्सगंज, सोनभद्र द्वारा िदनांक 11.03.2025 के आदेश द्वारा पृष्ठांिकत िकया गया था। आवेदक की ज़मीन और मकान अलग-अलग हैं, जबिक सूचनाकतार् की ज़मीन और संपित्त अलग-अलग हैं और उनका एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है। प्रश्नगत मामला पूरी तरह से दीवानी प्रकृ ित का है और उक्त िवक्रय-िवलेख के िनरस्तीकरण के संबंध में िसिवल जज (जू.िड.) राबट्र्सगंज, सोनभद्र के न्यायालय में एक िसिवल वाद संख्या 622/2024 पक्षकारों के मध्य लंिबत है। सूचनाकतार् और उसके पिरवार के सदस्य आवेदक की खरीदी गई संपित्त हड़पना चाहते हैं और उन्होंने जानबूझकर दीवानी प्रकृ ित के मामले को आपरािधक मामले में बदल िदया। आवेदक ने न तो कोई जाली/फजीर् दस्तावेज तैयार िकया है और न ही इस्तेमाल िकया है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० Versus Counsel for Applicant(s) : Ajai Kumar, Chandrabhan Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Nazibuddin Ansari .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
03.08.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 4, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 30465 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad