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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 89181 (ALL)
NAVEEN VISHWAKARMA v. STATE OF U.P. THROUGH HOME SECRETARY, GOVERNMENT OF UTTAR PRADESH
BAIL/29006/2025 · 2025-08-22
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 89181 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:146279 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 29006 of 2025 Applicant :- Naveen Vishwakarma Opposite Party :- State Of U.P. Through Home Secretary, Government Of Uttar Pradesh Counsel for Applicant :- Mohammad Sadab Khan Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शदी अवतिधथि नद्वारिद्वायण शशुक्लद्वा एववं रिद्वाज्य ककी तिरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सशुनद्वा तिथिद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा।
2. वतिरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमद्वानति प्रद्वाथिरनद्वा पत आववेदक नवदीन ववश्वकमद्वार ककी ओरि सवे मशु०अ०सवं० 238/2024, अवंतिररति धिद्वारिद्वा 193, 195, 198, 205, 211, 468, 469, 471, 120- बदी.
भद्वा.दवं.सवं., थिद्वानद्वा ककोतिवद्वालदी कद्वालपदी, धजलद्वा जद्वाललौन मम जमद्वानति परि मशुक करिनवे हवेतिशु प्रस्तिशुति वकयद्वा रयद्वा हहै। 3.(क) आववेदक कवे ववदद्वान दद्वारिद्वा कथिन वकयद्वा रयद्वा वक आववेदक एववं अन्य अवभयशुकक्तों कवे ववरुद्ध इस आशय ककी वतिरमद्वान प्रद्वाथिवमककी दजर करिद्वायदी रयदी थिदी वक xxx नद्वामक मवहलद्वा नवे ओम प्रकद्वाश कशु शवद्वाहद्वा उफर सतिदीश, धजतिमद्र शमद्वार, उमद्वा शवंकरि यद्वादव, रिद्वाजद्वा सद्वाहब भदलौररियद्वा, रिवव प्रकद्वाश झद्वा औरि अन्य कवे धखिलद्वाफ सवंबवंधधिति अदद्वालति मम आईपदीसदी ककी धिद्वारिद्वा 376 ण्डिदी/506 औरि पकोक्सको अधधिवनयम ककी धिद्वारिद्वा 5 जदी/6 कवे तिहति पररिवद्वाद सवंख्यद्वा 37/24 दजर करिद्वाई थिदी, धजसमम आरिकोप लरद्वायद्वा रयद्वा थिद्वा वक रिवेलववे ववभद्वार मम नलौकरिदी वदलद्वानवे कवे बहद्वानवे पररिवद्वाद मम नद्वावमति अवभयशुकक्तों नवे कई बद्वारि उसकवे सद्वाथि बलद्वात्कद्वारि वकयद्वा थिद्वा। जद्वावंच कवे दलौरिद्वान पद्वायद्वा रयद्वा वक xxx कद्वा हद्वाई स्कक ल प्रमद्वाण पत फजर थिद्वा, तित्पश्चद्वाति आववेदक एववं अन्य अवभयशुकक्तों तिथिद्वा xxx कवे ववरुद्ध वतिरमद्वान प्रद्वाथिवमककी दजर करिद्वायदी रयदी। (खि) आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तिकर प्रस्तिशुति वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिण मम रलति एववं फजर ढवंर सवे झकठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथिति अपरिद्वाधि कद्वाररिति नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा अवग्रिम कथिन वकयद्वा रयद्वा वक आववेदक प्रद्वाथिवमककी मम नद्वावमति नहहीं हहै, दलौरिद्वान ववववेचनद्वा सह-अवभयशुक कवे बयद्वान मम आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा। वतिरमद्वान घटनद्वा कको कद्वाररिति करिनवे मम आववेदक ककी ककोई वववशष्ट भकवमकद्वा दवशरति नहहीं ककी रयदी हहै। आववेदक वतिरमद्वान वद्वाद मम न तिको रवद्वाह हहै, न हदी वशकद्वायतिकतिद्वार हहै, न हदी वतिरमद्वान घटनद्वा सवे ककोई वद्वास्तिद्वा-सरिकोकद्वारि हहै। चकवंवक सह-अवभयशुक कवे बयद्वान कवे आधिद्वारि परि आववेदक कको अवभयशुक बनद्वायद्वा रयद्वा हहै, जको अवभयकोजन कद्वा आधिद्वारि नहहीं बन सकतिद्वा हहै तिथिद्वा सह -अवभयशुक कवे बयद्वान कवे अवतिररिक आववेदक कवे ववरुद्ध अवभलवेखि परि ककोई भदी सद्वाक्ष्य आववेदक कवे ववरुद्ध नहहीं हहै। वतिरमद्वान वद्वाद मम समद्वान भकवमकद्वा वद्वालवे सह-अवभयशुक ववशद्वाल ववश्वकमद्वार ककी जमद्वानति, जमद्वानति प्रद्वाथिरनद्वापत सवं० 8592/2025, मम इसदी न्यद्वायपदीठ दद्वारिद्वा वभन्न वतिधथि कको स्वदीकक ति ककी जद्वा चशुककी हहै। अतितः समद्वानतिद्वा कवे आधिद्वारि परि आववेदक भदी जमद्वानति कद्वा अधधिकद्वारिदी हहै। आववेदक दद्वारिद्वा अपनवे पकवर कवे एकमद्वात आपरिद्वाधधिक इवतिहद्वास कको शपथिपत कवे प्रस्तिरि सवं० 12 मम स्पष्ट वकयद्वा रयद्वा हहै। पशुनतः उनकद्वा यह भदी कथिन हहै वक आववेदक ककी तिरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानकन ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तिहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतिद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालति कवे समक्ष खिशुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतिरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तिहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपति करिवेरदी।
आववेदक वनदरष हहै तिथिद्वा वह इस प्रकरिण मम वद० 03.02.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानति परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानति कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितिवे हहए तिकर प्रस्तिशुति वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररिति अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वति कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानति परि न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. उभयपक्ष कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तिकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तिथ्यक्तों एववं पररिणस्थिवतियक्तों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबकतिक्तों ककी प्रकक वति औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिदी ककी अनशुपणस्थिवति एववं उपलब्धि सद्वामग्रिदी सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तिथ्य कको दवेखितिवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानति परि मशुक करिनवे कद्वा उपयशुक आधिद्वारि हहै।
6. अतितः वद्वाद कवे रशुण -दकोष परि वबनद्वा ककोई वटप्पणदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववणरति अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधिति न्यद्वायद्वालय ककी सवंतिशुवष्ट परि व्यवकरति बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतिभक प्रस्तिशुति करिनवे परि वनम्नधलधखिति शतिरवं कवे सद्वाथि जमद्वानति परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीक्षण कवे दलौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यक्तों कवे सद्वाथि छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षयक्तों व पदीवड़तिद्वा/ वशकद्वायतिकतिद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशक्तों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीक्षण कवे दलौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थिरन धलए वनयति वतिधथि परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थिति हकोरद्वा तिथिद्वा परिदीक्षण मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा।
iv. आववेदक जमद्वानति परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानति ककी स्वतिवंततिद्वा कद्वा दशुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतिववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तिथ्यक्तों सवे पररिवचति वकसदी भदी व्यवक यद्वा पशुधलस अधधिकद्वाररियक्तों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा , धजसकवे कद्वारिण उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तिथ्यक्तों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरिति रिहनद्वा पण्डिवेडे़।
7.
उपरिकोक शतिरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षण न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानति वनयमद्वानशुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतिवंत हहै। Order Date :- 23.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad