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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 8273 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 76/2024 अन्तगर्त धारा 406, 420, 506 भा०दं०िव०., थाना स्वरूप नगर, िजला सेन्ट्रल किमश्नरेट, कानपुर नगर में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री चन्दन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। यहां प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक आवेदक को इस मामलें में अंतिरम आदेश प्राप्त है। पुनः आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा इस मामलें में अिभयुक्त के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है। इसिलए, अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं हो रहा है। अतः अिभयुक्त का यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय।
5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, Versus Counsel for Applicant(s) : Dharmendra Kumar Shukla, Shad Khan, Shishir Prakash Counsel for Opposite Party(s) : Aditya Gupta, G.A. Shashin Vishnubhai Patel .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।
6.
वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक, आवेदक/अिभयुक्त के िवरूद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है।
7. तद्नुसार, इस अिग्रम जमानत आवेदन पत्र को िनरस्त िकया जाता है।
8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
9. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 24, 2025 CP.sahani ABAIL No. 8273 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad