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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 88430 (ALL)

SMT MANJU AND 2 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NABAIL/6798/2025 · 2025-09-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 6798 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदकगण श्रीमती मंजू, अरूण कु मार उफर् िपटू एवं सुरदीप िसह उफर् सुदीप बच्चू की ओर से मु०अ०सं० 1042/2021 से उद्भूत वाद सं० 326/2023, अन्तगर्त धारा 306 भा.दं.सं., थाना मसूरी, िजला गािजयाबाद में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री भगवती प्रसाद िद्ववेदी को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदकगण िनदोर्ष हैं, उन्हें उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उन्हें आशंका है िक उन्हें उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उनके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदकगण द्वारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेदकगण मृतक के भाई एवं बहन हैं तथा उनके द्वारा मृतक को कभी भी शारीिरक अथवा मानिसक रूप से परेशान व प्रतािड़त नहीं िकया गया है, न ही कभी आत्महत्या कािरत करने हेतु उत्प्रेिरत िकया है। आवेदकगण का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। आवेदकगण की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वे कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार हैं और जब भी आवश्यकता होगी वे ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार हैं जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेदकगण द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। आवेदकगण द्वारा मृतक को मानिसक तथा शारीिरक रूप से इतना परेशान व प्रतािड़त िकया गया, िजससे व्यिथत होकर मृतक ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कािरत कर ली। मृतक द्वारा मृत्युपूवर् हस्तिलिखत सुसाइड नोट भी प्राप्त हुआ, िजसमें मृतक द्वारा स्पष्ट कथन िकया गया है िक "मोिनका (मृतक की पत्नी) जब से मेरे साथ मेरे घर वालों ने िवश्वासघात िकया है, तब से आज तक ना तो मैं कभी खुलकर हंसा हूं और न अपनी िजदगी सही तरीके से िजया हूं। उन लोगों ने मेरी चीज, पैसा जमीन घर सब कु छ हड़प िलया और मुझे छोड़ िदया दर-दर की ठोकर खाने को, कानून उन्हें माफ भी कर दे, लेिकन मेरी आत्मा कभी उन्हें माफ नहीं करेगी। उम्मीद करता हूं िक कानून भी उन्हें सख्त से सख्त सजा दे क्योंिक आज जो भी कदम मुझे उठाना पड़ रहा है, उसके िजम्मेदार वही लोग हैं और उन लोगों Versus Counsel for Applicant(s) : Suresh Kumar Gupta Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Smt Manju And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) में शािमल हैं परम िसह, सरोज बाला, मनोज कु मार, िवनोद कु मार, मंजू, िपटू और बच्चू िसह।" मृतक द्वारा िलिखत सुसाइड नोट में अिभयुक्तगण का नाम स्पष्ट रूप से लेते हुए अपनी आत्महत्या के िलए िजम्मदार बताया है। िविध िवज्ञान प्रयोगशाला की आख्या के अनुसार िववािदत लेख व नमूना लेख में समानता पायी गयी है, िजससे यह भी स्पष्ट है िक उक्त हस्तिलिखत सुसाइड नोट भी मृतक द्वारा ही िलखा गया है। आवेदकगण के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर पुिलस द्वारा आवेदकगण के िवरुद्ध संबंिधत िवचारण न्यायालय में आरोपपत्र प्रेिषत िकया गया है। इसिलए आवेदकगण को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः आवेदकगण का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदकगण की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए प्रथमदृष्टया आवेदकगण को अिग्रम जमानत पर अवमुक्त िकये जाने का कोई उिचत आधार पिरलिक्षत नहीं हो रहा है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 11, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 6798 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad