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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 87996 (ALL)

SMT. BIRMATI ALIAS VEERMATI v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

NABAIL/6767/2025 · 2025-09-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 6767 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 115/2023 अन्तगर्त धारा 363, 376, 109 भारतीय दण्ड संिहता व धारा 3/4(2), 16/17 पाक्सो एक्ट, थाना परतापुर, िजला मेरठ में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेिदका को जमानत पर िरहा िकया जा सके । 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। यहां प्रासंिगक तथ्य यह है िक आवेिदका का इस मामलें में को इस मामलें में धारा 319 दं०प्र०सं० के अंतगर्त तलब िकया गया है। आवेिदका मिहला है तथा आवेिदका के िवरूद्ध किथत अपराध में पीिड़ता को के वल चाजर्र के बहाने बहला-फु सलाकर सड़क पर ले जाने की भूिमका बतायी गयी है, इसके अितिरक्त आवेिदका के िवरूद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। आगे यह भी कहा गया िक इस मालमें के सत्र परीक्षण में अिभयोजन साक्षी सं० 1 व 2 का ही परीक्षण हो चुका है। आवेिदका द्वारा सत्र परीक्षण को प्रभािवत िकये जाने की कोई संभावना नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेिदका िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देती है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगी एवं आवेिदका की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्ता द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है। प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक इस मामलें में अिभयुक्ता की भूिमका अिभयोजन साक्षी द्वारा अिभकिथत है तथा िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर अिभयुक्ता को तलब िकया गया है। उनका यह भी Versus Counsel for Applicant(s) : Nitin Sharma Counsel for Opposite Party(s) : Atul Kumar Tiwari, G.A. Smt. Birmati Alias Veermati .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) तकर् है िक नाबािलक पीिड़ता द्वारा अपने धारा 161 व धारा 164 के बयान में इस तथ्य की पिरपुिष्ट की गयी है। इस स्तर पर यिद अिभयुक्ता को अिग्रम जमानत प्रदान की जाती है तो पूणर् संभावना है िक उसके न्याियक प्रिक्रया में सहयोगी प्रदान नहीं िकया जायेगा। अिभयुक्ता को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं हो रहा है। अतः अिभयुक्ता का यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 7. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए िक,अिभयुक्ता की भूिमका अिभयोजन साक्षी द्वारा अिभकिथत है तथा िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर अिभयुक्ता को तलब िकया गया है। इसिलए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 8. तद्नुसार, इस अिग्रम जमानत आवेदन पत्र को िनरस्त िकया जाता है। 9. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 10. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। 11. आवेदक िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है। September 22, 2025 CP.sahani NABAIL No. 6767 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad