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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 87895 (ALL)

NAWAL @ SUKKHI v. STATE OF U.P.

BAIL/28940/2025 · 2025-08-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:144955 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 28940 of 2025 Applicant :- Nawal @ Sukkhi Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Abhishek Kumar Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Nawal @ Sukkhi ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 105/2025, अवंतररत धिद्वारद्वा 309(4), 317(2), 61(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा ककै लद्वादवेवली, धजलद्वा सम्भल मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हकै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हकै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हकै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हकै, जकैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हकै। प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर ववलणम्बत हकै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हकै। आववेदक प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर मम नद्वावमत नहहीं हकै , ददौरद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हकै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घरनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली भली सवंवदग्धि वस्तसु ककी बरद्वामदरली दवशरत नहहीं ककी रयली , आववेदक कवे पद्वास सवे एक मकोररसद्वाइवकल एववं 750/- रू० ककी बरद्वामदरली दवशरत ककी रयली हकै , वह पझूररतत बनद्वावरली एववं फजर्जी हकै तथद्वा उक बरद्वामदरली कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहहीं हकै। आववेदक घरनद्वास्थल पर मदौकवे सवे वररफ्तद्वार नहहीं वकयद्वा रयद्वा हकै। अवभलवेख पर आववेदक कवे ववरुद्ध ककोई प्रत्यक सद्वाक्ष्य उपलब्धि नहहीं हकै , धजससवे आववेदक कवे ववरुद्ध आकवेवपत अपरद्वाधि बनतद्वा प्रतलीत हको रहद्वा हको। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हकै। पसुनत उनकद्वा यह भली कथन हकै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हकै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तकैयद्वार हकै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तकैयद्वार हकै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हकै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 17.07.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हकै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हकै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हकै। 6. अतत वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हकै। Order Date :- 22.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad