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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 87672 (ALL)

ASIF NASEEM v. STATE OF U.P.

BAIL/28910/2025 · 2025-08-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:144983 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 28910 of 2025 Applicant :- Asif Naseem Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- D.M.Tripathi Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Asif Naseem ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 104/2022, अवंतररत धिद्वारद्वा 409, 420, 120-बली. भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा कक ट, धजलद्वा वद्वारद्वारसली मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3.(क). आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक प्रश्नरत मद्वामलवे मम आववेदक सवहत तलीन अवभयसुकरर कको नद्वावमत वकयद्वा रयद्वा। यहद्वावं प्रद्वासवंवरक तथ्य यह भली हहै वक प्रश्नरत मद्वामलवे कवे अवतररक आववेदक कको अन्य मद्वामलवे मम आववेदक सवहत कई व्यवकययों कवे ववरूद्ध एक प्रथम ससूचनद्वा ररपकोटर कवे आधिद्वार पर पवंजलीकक त वकयद्वा रयद्वा हहै, धजसमम कहद्वा रयद्वा हहै वक ससूचनद्वाकतद्वार नवे आकररक ररटनर कवे प्रलकोभन मम शद्वाइन धसटली इवंफद्वास्टटक्चर प्रद्वाइववेट धलवमटवेण्डि कवं पनली मम प्ललॉट लवेनवे कवे नद्वाम पर कसु छ वनववेश वकए थवे, लवेवकन ससूचक कको ककोई ररटनर/प्ललॉट नहहीं वदयद्वा रयद्वा। यह भली कहद्वा रयद्वा हहै वक इसली तरह कवे वववद्वादयों सवे उत्पन्न रद्वाज्य भर मम सहैकडयों अन्य प्रद्वाथवमककी दजर ककी रई हक। आववेदक कद्वा नद्वाम कसु छ प्रद्वाथवमवकययों मम दजर हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक वदनद्वावंक 01.11.2021 सवे जवेल मम बवंद हहै , वकवं तसु अभली तक सत परलीक्षर कद्वा वनस्तद्वारर नहहीं हहआ हक। (ख). यहद्वावं प्रद्वासवंवरत तथ्य यह भली हहै वक वकसली ववचद्वारद्वाधिलीन व्यवक कको वहरद्वासत मम रखनवे कद्वा उदवेश्य मसुकदमवे कद्वा सद्वामनद्वा करनवे कवे धलए उसककी उपलब्धितद्वा ससुवनणश्चत करनद्वा हहै, जबवक आववेदक कको वहरद्वासत मम धलए जद्वानवे कवे सद्वाढवे तलीन सद्वाल सवे अधधिक समय बलीत जद्वानवे कवे बद्वावजसूद , आज तक सत परलीक्षर कद्वा वनस्तद्वारर नहहीं हको पद्वायद्वा हहै , धजससवे आववेदक कको वहरद्वासत मम रखनवे कद्वा उदवेश्य पसूरद्वा नहहीं हको रहद्वा हहै एववं इसली प्रकद्वार कवे मद्वामलयों मम कई अन्य सह -अवभयसुकयों कको पहलवे हली जमद्वानत दली जद्वा चसुककी हहै और आववेदक कको इसली तरह कवे कई मद्वामलयों मम पहलवे हली जमद्वानत वमल चसुककी हहै। पसुननः उनकद्वा कथन हहै वक आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानसून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह वद० 01.11.2021 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबसूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोर पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्टि पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभसू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 22.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad