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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 29911 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक आिसफ नसीम की ओर से मु०अ०सं० 584/2020, अन्तगर्त धारा 409, 420, 120बी भा०दं०िव०, थाना कैं ट, िजला वाराणसी में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक प्रश्नगत मालले में सात अिभयुक्तगण को नािमत िकया गया, िजसमें तीन सअिभयुक्तगण की जमानत न्यायालय द्वारा स्वीकार की जा चुकी है। यहां प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक प्रश्नगत मामले के अितिरक्त आवेदक को अन्य मामले में आवेदक सिहत कई व्यिक्तयों के िवरूद्ध एक प्रथम सूचना िरपोटर् के आधार पर पंजीकृ त िकया गया है, िजसमें कहा गया है िक सूचनाकतार् ने आकषर्क िरटनर् के प्रलोभन में शाइन िसटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट िलिमटेड कं पनी में कु छ िनवेश िकए थे, लेिकन सूचक को कोई िरटनर् नहीं िदया गया। आवेदक को कं पनी का िनदेशक बताया गया है। यह भी कहा गया है िक इसी तरह के िववादों से उत्पन्न राज्य भर में सैकड़ों अन्य प्राथिमकी दजर् की गई हैं। आवेदक का नाम कु छ प्राथिमिकयों में दजर् है। यहां प्रासंिगत तथ्य यह भी है िक िकसी िवचाराधीन व्यिक्त को िहरासत में रखने का उद्देश्य मुकदमे का सामना करने के िलए उसकी उपलब्धता सुिनिश्चत करना है, जबिक आवेदक को िहरासत में िलए जाने के साढ़े तीन साल से अिधक समय बीत जाने के बावजूद, आज तक सत्र परीक्षण का िनस्तारण नहीं हो पाया है, िजससे आवेदक को िहरासत में रखने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है एवं इसी प्रकार के मामलों में कई अन्य सह- अिभयुक्तों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है और आवेदक को इसी तरह के कई मामलों में पहले ही जमानत िमल चुकी है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी Versus Counsel for Applicant(s) : Manjeet Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Asif Naseem .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 01.11.2021 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय।
1. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
2. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
3. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
4. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
5. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 1, 2025 S.Mishra BAIL No. 29911 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad