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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 84603 (ALL)

SATISH YADAV v. STATE OF U.P.

BAIL/34851/2025 · 2025-10-09

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 34851 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 18/2025, अन्तगर्त धारा 87, 64(1), 115(2), 351(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना िचल्ह, िजला िमजार्पुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। अिभयोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, पीिड़ता कोमल यादव की आयु लगभग 20 वषर् है और वह कक्षा 12वीं में पढ़ती थी। कक्षा 10वीं की अंकतािलका में उसकी जन्मितिथ 01.07.2006 अंिकत है। किथत घटना के एक माह उपरांत िदनांक 15.3.2025 को पीिड़ता अपनी माँ के साथ संबंिधत पुिलस स्टेशन गई और जाँच अिधकारी ने धारा 180 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के तहत उसका बयान दजर् िकया, िजसमें उसने कहा िक वह मुंबई गई थी और लगभग एक महीने से पित-पत्नी के रूप में रह रही थी, इसके उपरांत धारा 180 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के तहत बयान दजर् करने के उपरांत पीिड़ता का िदनांक 17.2.2025 को ई.एम.ओ. में िचिकत्सकीय परीक्षण िकया गया, िचिकत्सक ने पाया िक शरीर पर बाहरी चोट के िनशान थे और उक्त चोट की अविध भी लगभग 3 से 4 िदन पुरानी थी। वास्तव में, िदनांक 15.3.2025 को पीिड़ता के ठीक होने के बाद, उसके माता-िपता द्वारा पीिड़ता के साथ उसके घर में मारपीट की गई। आवेदक ने पीिड़ता के साथ मारपीट नहीं की। िचिकत्सा साक्ष्य अिभयोजन पक्ष की कहानी से मेल नहीं खाते। िचिकत्सक द्वारा चोट की अविध 3 से 4 िदन पुरानी बताई गई, अथार्त उक्त चोट ठीक होने के बाद लगी। िचिकत्सा परीक्षण के बाद, िदनांक 18.3.2025 को िनचली अदालत में धारा 183 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के तहत बयान दजर् िकया गया, िजसमें उसने माता-िपता के दबाव में आकर और कानूनी सलाह के बाद आवेदक के िखलाफ Versus Counsel for Applicant(s) : Dinesh Kumar, Janardan Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Satish Yadav .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) झूठा और मनगढ़ंत आरोप लगाया। प्रासंिगक तथ्य यह है िक किथत पीिड़ता अपनी इच्छा और सहमित से आवेदक के साथ िमजार्पुर से मुंबई गई और लगभग एक महीने तक पित-पत्नी के रूप में रही, लेिकन उसने यात्रा के दौरान और मुंबई में कोई शोर नहीं मचाया, इसका अथर् है िक वह सहमित देने वाली पक्षकार थी। आवेदक स्वयं पीिड़ता के साथ 15.3.2025 को मुंबई से लौटा था। बरामदगी के बाद, पीिड़ता ने अपने माता-िपता की उपिस्थित में आवेदक के िवरुद्ध झूठा आरोप लगाया। उसने आवेदक के साथ िबना िकसी शोर-शराबे के एक महीना और सात िदन िबताए। आवेदक और पीिड़ता दोनों बािलग हैं और सहमित देने वाली पक्षकार हैं। आवेदक पूवर् में दोषी नहीं है और उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 14.03.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. BAIL No. 34851 of 2025 2 आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 10, 2025 CP.sahani BAIL No. 34851 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad