Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 29096 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 279/2025, अन्तगर्त धारा 8/21/60 एन०डी०पी०एस० एक्ट, थाना िझझाना, िजला शामली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण झूठा फॅ साया गया है। उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है और न ही आवेदक के पास से कोई बरामदगी की गयी है, पुिलस द्वारा दिशत बरामदगी पुिलस द्वारा सुस्थािपत की गयी है। प्रश्नगत प्रकरण में आवेदक से 22 ग्राम स्मैक की बरामदगी दशार्यी गयी है, जो एन०डी०पी०एस० एक्ट में धारा 37 में प्रािवधािनत वािणिज्यक मात्रा से कम है। उनका यह भी कथन है िक पुिलस द्वारा धारा 47, 51, 52, 50-ए एन०डी०पी०एस० एक्ट का अनुपालन नहीं िकया गया है, किथत घटना में की गयी बरामदगी का कोई प्रत्यक्षदशीर् स्वतंत्र साक्षी नहीं है और पुिलस द्वारा की गयी बरामदगी का कोई जनसाक्षी नहीं है। उनका यह भी तकर् है िक आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 14.06.2025 से कारागार में िनरूद्ध है, इसिलए आवेदक, जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है।
4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध गंभीर एवं सामािजक िस्थित को दुष्प्रभािवत करने वाली है एवं वतर्मान समाज में मादक पदाथर् की लत एक गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। नशे का व्यसनीकरण वाला व्यिक्त, पिरवार व समाज पर एक परजीवी के रूप में जीने के िववश हो जाता है। यह समाज में एक अिभशाष बन चुकी है, जो लोक स्वास्थ्य एवं मानवीय व्यिक्तत्व के पतन का कारण भी बन रहा है। Versus Counsel for Applicant(s) : Avinash Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Salman .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
5.
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा Union of India vs. Shiv Shankar Keshri, (2007) 7 SCC 798 में प्रितपािदत िकया गया है िक अिधिनयम की धारा 37 के संदभर् में जमानत के िलए आवेदन पर िवचार करते समय अदालत को अिभयुक्त के दोषी होने अथवा उसके गुनाहगार होने के तथ्य पर िवचार नहीं िकया जाता है। यह सीिमत उद्देश्य के िलए अिनवायर् रूप से अिभयुक्त को जमानत पर िरहा करने के सवाल पर सीिमत है िजसमें अदालत को यह देखना होता है िक क्या यह मानने के िलए उिचत आधार हैं िक अिभयुक्त दोषी नहीं है और ऐसे आधार के अिस्तत्व के बारे में अदालत अपनी संतुिष्ट दजर् करती है। लेिकन अदालत को इस मामले पर िवचार नहीं करना है जैसे िक वह दोषमुक्त होने का फै सला सुना रही हो और दोषी नहीं होने का पता लगा रही हो। मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए Union of India vs. Shiv Shankar Keshri, (2007) 7 SCC 798 के प्रकरण में माननीय उच्चतम न्यायालय के िनणर्य के दृिष्टगत, भारत के संिवधान के अनुच्छेद 21 का बड़ा जनादेश, आरोपों की प्रकृ ित, समथर्न में सबूतों की प्रकृ ित, सजा की गंभीरता, आरोपी-आवेदक का चिरत्र, पिरिस्थितयॉ, मुकदमें में अिभयुक्त की उपिस्थित को सुरिक्षत करने की उिचत संभावना, गवाहों से छेड़छाड़ की उिचत आशंका, जनता/राज्य और अन्य पिरिस्थितयों का बड़ा िहत, लेिकन गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, मेरा मानना है िक यह जमानत देने के िलए एक उपयुक्त मामला है।
6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii.
आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण BAIL No. 29096 of 2025 2
उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 16, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 29096 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad