Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 84023 (ALL)
MAHAVEER SINGH v. State of U.P. AND ANOTHER
ABAIL/7732/2024 · 2025-06-30
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 84023 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 84023 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC:101524 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 7732 of 2024 Applicant :- Mahaveer Singh Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Pankaj Kumar Ojha,Shiv Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. वररममान दमाणणण्डिक प्रककीरर अगग्रिम जममानर प्रमाररनमा पत, आववेदक महमाववीर सससिंह ककी ओर सवे पररवमाद ससिं० 1297/2017, अन्रररर धमारमा 420, 467, 468 भमा.दसिं.ससिं., रमानमा बकवे वर, सजलमा इटमावमा मम अगग्रिम जममानर ककी ममॉर कररवे हहए इस प्रमाररनमा कवे समार ययोसजर गकयमा रयमा हहै गक गररफ्रमारवी ककी णसरगर मम आववेदक कयो जममानर पर ररहमा गकयमा जमा सकवे ।
2. आववेदक कवे गवदमान असधवकमा एवसिं गवदमान अपर शमासककीय असधवकमा कयो ससुनमा ररमा पतमावलवी कमा पररशवीलन गकयमा।
3. आववेदक कवे गवदमान असधवकमा नवे रकर प्रसरसुर गकयमा गक आववेदक गनदर्दोष हहै , उसवे उपरयोक धमारमाओसिं मम दवेषवश रसिंर व परवेशमान करनवे ककी गनयर सवे आसलप्त गकयमा रयमा हहै , उसवे आशसिंकमा हहै गक उसवे उपरयोक वगररर ममामलवे मम गररफ्रमार गकयमा जमा सकरमा हहै जबगक उसकवे गवरूद्ध कयोई गवश्वसनवीय समाक्ष्य नहहीं हहै और आववेदक कवे गवरूद्ध अभवी कयोई भवी बमाध्यकमारवी प्रगक्रियमा नहहीं अपनमाई रयवी हहै। आववेदक कवे गवदमान असधवकमा दमारमा अगग्रिम यह करन गकयमा रयमा गक आदवेश गदनमासिंक 18.10.2024 कवे दमारमा आववेदक कयो अगग्रिम गनयर गरसर रक अगग्रिम जममानर प्रदमान ककी रयवी रवी। उनकवे दमारमा यह भवी करन गकयमा रयमा गक वररममान वमाद जमवीन ककी बमाउन्ण्डिडवी सवे ससिंबसिंसधर हहै ररमा ससगवल प्रकक गर कमा वमाद हहै। उभयपक्ष कवे मध्य एक ससगवल ससूट भवी लणमबर हहै। पसुननः उनकमा करन हहै गक आववेदक गवचमारर और जमॉच कवे ददौरमान सहययोर करनवे कमा वचन दवेरमा हहै गक वह जमॉच एजमसवी यमा न्यमायमालय दमारमा अपवेगक्षर समय पर उपणसरर रहवेरमा एवसिं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वमासन गदयमा रयमा हहै गक वह कमानसून ककी प्रगक्रियमा मम सहययोर करनवे कवे सलए रहैयमार हहै और जब भवी आवश्यकरमा हयोरवी वह ईममानदमारवी सवे न्यमायमालय कवे समक्ष खसुद कयो उपलब्ध करमाएरमा और उन सभवी शरर्दोसिं कयो सववीकमार करनवे कवे सलए भवी रहैयमार हहै , जयो न्यमायमालय उस पर असधरयोगपर करवेरवी।
4. गवदमान अपर शमासककीय असधवकमा दमारमा अगभयसुक कवे अगग्रिम जममानर कवे गवरयोध मम यह रकर प्रसरसुर गकयमा रयमा गक इस ममामलवे मम अगभयसुक ककी भसूगमकमा पररलगक्षर हयो रहवी हहै ररमा इस घटनमा मम इनककी भसूगमकमा ससिंभमाव्य हहै। इससलए अगभयसुक कयो अगग्रिम जममानर पर मसुक न गकयमा जमाय।
5.
यह कहमा जमा सकरमा हहै गक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे ममामलवे मम ममाननवीय उच्चरम न्यमायमालय दमारमा यह अवधमाररर गकयमा रयमा हहै गक अगग्रिम जममानर यमागचकमा पर न्यमाय -गनररयन कररवे समय न्यमायमालय कयो आरयोपपों ककी प्रकक गर और रसिंभवीररमा, आरयोपवी ककी न्यमागयक प्रगक्रियमा सवे भमारनवे ककी ससिंभमावनमा पर गवचमार करनमा चमागहए और यह गक न्यमायमालय कयो आरयोपवी कवे गवरूद्ध उपलब्ध सभवी समामग्रिवी कमा समावधमानवी सवे मसूल्यमासिंकन करनमा चमागहए और आरयोपवी ककी वमासरगवक भसूगमकमा पर भवी गवचमार करनमा चमागहए।
6. उभय पक्ष कवे रकर्दो एवसिं वररममान ममामलवे मम अगग्रिम जममानर ससिंबसिंधवी गवसध कवे सरमागपर ससद्धमासिंरपों कयो ध्यमान मम रखरवे हहए और पक्षकमारपों कवे गवदमान असधवकमाओसिं कवे करनपों , आरयोपपों ककी प्रकक गर, आववेदक ककी भसूगमकमा और ममामलवे कवे सभवी रथ्यपों एवसिं गवचमारर न्यमायमालय दमारमा गनयर गरसरयपों पर आववेदक कवे गनयगमर रूप सवे उपणसरर हयोनवे , पररणसरगरयपों कयो ध्यमान मम रखरवे हहए, ममामलवे कवे रसुर-दयोष पर गबनमा कयोई गवचमार व्यक गकए अगग्रिम जममानर ककी प्रमाररनमा सववीकमार गकए जमानवे ययोग्य हहै।
7. रद्नसुसमार, यह अगग्रिम जममानर आववेदन पत सववीकमार गकयमा जमारमा हहै।
8. उपरयोक मसुकदममा अपरमाध ससिंख्यमा मम सणममसलर आववेदक ककी गररफ्रमारवी ककी दशमा मम , उसवे ससिंबसिंसधर गवचमारर न्यमायमालय ककी ससिंरसुगष्टि पर रू० 50,000/- कमा व्यगकरर बसिंध पत एवसिं उसवी धनरमागश कवे दयो प्रगरभसू प्रसरसुर करनवे पर , सत परवीक्षर कवे गनसरमारर हयोनवे रक गनमन शरर्दो कवे अधवीन अगग्रिम जममानर पर मसुक गकयमा जमाएरमा :- i) आववेदक अगभययोजन पक्ष कवे समाक्ष्यपों कवे समार छवेड़छमाड़ नहहीं करवेरमा। ii) आववेदक अगभययोजन पक्ष कवे रवमाहपों कयो धमकमाएरमा यमा परवेशमान नहहीं करवेरमा।
iii) आववेदक गवचमारर न्यमायमालय दमारमा गनधमारररर गरसर पर उपणसरर हयोरमा। iv) आववेदक उस अपरमाध कवे सममान कयोई अपरमाध नहहीं करवेरमा, सजसकमा आरयोप आववेदक पर लरमायमा रयमा हहै यमा सजसकवे गकए
जमानवे कमा ससिंदवेह
हहै। v) आववेदक ममामलवे कवे रथ्यपों सवे पररगचर गकसवी व्यगक कयो प्रत्यक्ष यमा अप्रत्यक्ष रूप सवे कयोई प्रलयोभन, धमककी यमा वमादमा नहहीं करवेरमा सजससवे वह व्यगक न्यमायमालय यमा गकसवी पसुसलस असधकमारवी कवे समक्ष रथ्यपों कमा खसुलमासमा करनवे सवे गवमसुख हयो जमाए यमा समाक्ष्यपों कवे समार छवेड़छमाड़ करवे।
9.
उपरयोक शरर्दोसिं कवे उलसिंघन ककी णसरगर मम अगभययोजन पक्ष कयो , आववेदक कयो प्रदत्त अगग्रिम जममानर कवे गनरसरवीकरर हवेरसु उपयसुक आववेदन प्रसरसुर करनवे ककी सवरसिंतरमा हयोरवी।
10. ससिंबसिंसधर गवचमारर न्यमायमालय कयो गनदरगशर गकयमा जमारमा हहै गक उभयपक्ष कयो ससुनकर इस वमाद कयो रसुर-दयोष पर शवीघमागरशवीघ गनसरमाररर करनमा ससुगनणश्चर करम। Order Date :- 1.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad