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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 83483 (ALL)

IQLAKH KHAN v. STATE OF U.P.

BAIL/27789/2025 · 2025-09-23

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 27789 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक इकलाख खान की ओर से मु०अ०स० 683/2022, अन्तगर्त धारा 420/ 467/ 468/ 471 भा.दं.सं., थाना उत्तर, िजला िफरोजाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्रथम सूचना िरपोटर् िदनांक 24.08.2022 को सैन्ट्रल बैंक आफ इिण्डया के शाखा प्रबंधक द्वारा करवाई गई है, िजसमें आरोप लगाया गया है िक, ऋण 15 लाख रु० प्राप्त िकये हैं और ऋण गारण्टी में बतौर सम्पित्त मौजा सैलई खसरा सं० 248, िफरोजाबाद को बैंक के हक में मौटर्गेज िकया गया था, जो आवेदक ने बैंक को िदया था, जबिक सत्यता यह है िक सम्पित्त के दस्तावेजों की जांच उपरान्त ही बैंक लोन करती है। आवेदक ने कोई अपराध नहीं िकया है और न ही कू टरिचत बैनामा बैंक को मोटर्गेज िकया है। आवेदक को बैंक द्वारा जो ऋण स्वीकृ त िकया गया था वह मकान खरीदने के िलए िकया गया था। 15 लाख रुपये यूिनस खां के पक्ष में िदये गये थे। यूिनस खां उक्त मकान का िवक्रे ता था। तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने पूरी जांच की थी। अिभयुक्त को सम्पित्त के दस्तावेजों की कोई जानकारी नहीं थी। जो व्यिक्त यूिनस खां बनकर अिभयुक्त को सम्पित्त िवक्रय कर रहा था, उसकी पहचान स्वरूप आधार काडर् से ही कर सकता था। अिभयुक्त को उक्त मुकदमे में झूठा फं साया गया है। आवेदक को िकसी दस्तावेज के संबंध में असल नकल की पहचान नहीं थी। बैंक वालों ने ही िवक्रे ता के हाथ में बैंक में बुलाकर बैंक ड्राफ्ट िदया था। वादी ने बैंक कमर्चािरयों को बचाने के िलये लोन िरकवरी हेतु दबाव बनाने हेतु आवेदक पर झूठा मुकदमा दजर् करवा िदया था। अिभयुक्त ने कोई दस्तावेज बैंक कमर्चािरयों को अपने हाथों से नहीं िदये थे क्योिक वह क्रे ता था। आवेदक पर धारा 467 का आरोप नहीं बनता है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की Versus Counsel for Applicant(s) : Umesh Prasad Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Iqlakh Khan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 22.05.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 S.Mishra BAIL No. 27789 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad