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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 83304 (ALL)

RAMAN SINGH v. STATE OF U.P.

NABAIL/6390/2025 · 2025-08-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:144891 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 6390 of 2025 Applicant :- Raman Singh Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Aditi Srivastava,Kandarp Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पतद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय। 3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत, आववेदक रमन धसवंह ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 172/2025, अन्तगरत धिद्वारद्वा 190, 191(2), 103, 109, 115(2), 352, 351(2), 3(5), 351(3) बली.एन.एस., थद्वानद्वा गजररौलद्वा, धजलद्वा अमरकोहद्वा मम अवग्रिम जमद्वानत ककी ममॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ यकोधजत वकयद्वा गयद्वा हहै वक वगरफ्तद्वारली ककी णसथवत मम आववेदक कको जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे । 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रसतसुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओवं मम दवेषवश तवंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हहै, उसवे आशवंकद्वा हहै वक उसवे उपरकोक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली ककोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै। आववेदक कको आपसली रवंधजश ककी वजह सवे वतरमद्वान वद्वाद मम वमथ्यद्वारकोवपत वकयद्वा गयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररत करनवे मम वकसली भली अवभयसुक ककी वववशष भपूवमकद्वा दवशरत नहहीं ककी गयली हहै , वरनन् सभली ककी समद्वान भपूवमकद्वा दशद्वारयली गयली हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम ववववेचनद्वा प्रचधलत हहै तथद्वा अभली तक आरकोपपत सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय मम प्रवेवषत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा कथन हहै वक आववेदक ववचद्वारर और जमॉच कवे दरौरद्वान सहयकोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हहै वक वह जमॉच एजमसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणसथत रहवेगद्वा एववं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोवं कको सवलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै, जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयसुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरकोधि मम यह तकर प्रसतसुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभयसुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हको रहली हहै तथद्वा इस घटनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा सवंभद्वाव्य हहै। इसधलए अवभयसुक कको अवग्रिम जमद्वानत पर मसुक न वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनररयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोपपों ककी प्रकक वत और गवंभलीरतद्वा, आरकोपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी सवंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कको आरकोपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वावंकन करनद्वा चद्वावहए और आरकोपली ककी वद्वासतववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए। 7. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकर्दोवं एववं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत सवंबवंधिली ववधधि कवे सथद्वावपत धसद्धद्वावंतपों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पक्षिकद्वारपों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओवं कवे कथनपों, आरकोपपों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यपों एववं पररणसथवतयपों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए , मद्वामलवे कवे गसुर- दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा सवलीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य हहै। 8. तद्नसुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत सवलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै। 9. उपरकोक मसुकदमद्वा अपरद्वाधि सवंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मम, उसवे सवंबवंधधित थद्वानवे कवे भद्वारसद्वाधिक अधधिकद्वारली ककी सवंतसुवष पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बवंधि पत एववं उसली धिनरद्वावश कवे दको प्रवतभपू प्रसतसुत करनवे पर, पसुधलस आख्यद्वा दद्वाधखिल वकए जद्वानवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर मसुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभयकोजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभयकोजन पक्षि कवे गवद्वाहपों कको धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक, यवद आवश्यक हकोगद्वा तको पसुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि जमॉच हवेतसु अपवेवक्षित प्रत्यवेक वतधथ एववं वनयत समय पर उपणसथत रहवेगद्वा तथद्वा अनद्वावश्यक सथगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान ककोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरकोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हहै यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा सवंदवेह हहै। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यपों सवे पररवचत वकसली व्यवक कको प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे ककोई प्रलकोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पसुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि तथ्यपों कद्वा खिसुलद्वासद्वा करनवे सवे ववमसुखि हको जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ करवे। 10. उपरकोक शतर्दो कवे उलवंघन ककी णसथवत मम अवभयकोजन पक्षि कको , आववेदक कको प्रदत्त अवग्रिम जमद्वानत कवे वनरसतलीकरर हवेतसु उपयसुक आववेदन प्रसतसुत करनवे ककी सवतवंततद्वा हकोगली। Order Date :- 22.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad