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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 81390 (ALL)

PAWAN KUMAR v. STATE OF U.P.

BAIL/26628/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130721 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26628 of 2025 Applicant :- Pawan Kumar Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Aryan Srivastava,Prakash Chandra Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री आररन शश्रीवद्वास्तव एववं रद्वाज्र ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीर अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररशश्रीलन वकरद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक पवन कसु मद्वार ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 06/2025, अवंतररत धिद्वारद्वा 336(3), 61(2) बश्री.एन.एस., थद्वानद्वा लवंकद्वा, धजलद्वा वद्वारद्वारसश्री मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकरद्वा ररद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकरद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वारद्वा ररद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकरद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भश्री कक त्र कद्वाररत नहहीं वकरद्वा ररद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकरद्वा ररद्वा हहै। आववेदक प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर मम नद्वावमत नहहीं हहै, ददौरद्वान ववववेचनद्वा सह-अवभरसुक कवे बरद्वान कवे आधिद्वार पर आववेदक कको वतरमद्वान वद्वाद मम अवभरसुक बनद्वा वदरद्वा ररद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा वकसश्री कको भश्री नदौकरश्री वदलद्वानवे कद्वा कक त्र कद्वाररत नहहीं वकरद्वा ररद्वा हहै। वतरमद्वान जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सपवठत धिद्वारद्वा मम दद्वाधखिल वकरद्वा ररद्वा हहै। पझूवर मम आववेदक कको जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 21600/2025, आदवेश वदनद्वावंवकत 27.06.2025 कको अवंतररत धिद्वारद्वा 318(4), 319(2), 336(2), 338, 340(2) बश्री.एन.एस. मम स्वश्रीकक त हको चसुककी हहै। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पसुननः उनकद्वा रह भश्री कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे रह आश्वद्वासन वदरद्वा ररद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रिरद्वा मम सहरकोर करनवे कवे धलए तहैरद्वार हहै और जब भश्री आवश्रकतद्वा हकोरश्री वह ईमद्वानदद्वारश्री सवे अदद्वालत कवे समक्ष खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभश्री शतरवं कको स्वश्रीकद्वार करनवे कवे धलए भश्री तहैरद्वार हहै जको न्रद्वारद्वालर उस पर अधधिरकोवपत करवेरश्री। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 06.01.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदरद्वा जद्वार। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीर अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकरद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेर एववं रवंभश्रीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वार। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्र मम पतद्वावलश्री पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्रयों एववं पररणस्थवतरयों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसश्री भश्री ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रश्री ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्र कको दवेखितवे हहए मवेरश्री रद्वार मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपरसुक आधिद्वार हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परश्री वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्रद्वारद्वालर ककी सवंतसुवष्टि पर व्रवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भश्री दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदरद्वा जद्वार। i. आववेदक ववववेचनद्वा रद्वा परश्रीक्षर कवे ददौरद्वान अवभरकोजन सद्वाक्ष्रयों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभरकोजन सद्वावक्षरयों व पश्रीवड़तद्वा / वशकद्वारतकतद्वार कको ण्डिरद्वारवेरद्वा/धिमकद्वारवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्रद्वारद्वालर कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परश्रीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्रक स्थरन धलए वनरत वतधथ पर न्रद्वारद्वालर मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परश्रीक्षर मम ईमद्वानदद्वारश्री सवे सहरकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपरकोर नहश्री करवेरद्वा और वकसश्री भश्री अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्र करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्रक्ष रद्वा अप्रत्रक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्रयों सवे पररवचत वकसश्री भश्री व्रवक रद्वा पसुधलस अधधिकद्वारररयों कको ककोई प्रलकोभन रद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हश्री उनसवे ककोई वद्वारदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्रद्वारद्वालर मम तथ्रयों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसश्री कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परश्रीक्षर न्रद्वारद्वालर आववेदक ककी जमद्वानत वनरमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad