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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 81212 (ALL)

SABHAJEET v. STATE OF U.P.

BAIL/26940/2025 · 2025-08-12

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:137988 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26940 of 2025 Applicant :- Sabhajeet Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Indra Bhan Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A.,Sanjai Kumar Pandey Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Sabhajeet कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 121/2024, अवंतररत धिद्वारिद्वा 420, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा लकोटन, धजलद्वा धसदद्वाथर नररि मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमकक मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रद्वाथवमकक बदीस वरर कवे अवत-ववलम्ब सवे दजर करिद्वायदी रयदी हहै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचित स्पषदीकरिर नहहीं नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा वतरमद्वान वद्वाद सवे सवंबवंधधित वकसदी भदी दस्तद्वाववेज कक कझू टरिचिनद्वा कद्वाररित नहहीं कक रयदी हहै। आववेदक एववं पडकोसदी कवे आपसदी वववद्वाद कवे कद्वारिर पडकोसदी कक तत्कद्वालदीन वशकद्वायत परि आववेदक कवे ववरुद प्रद्वाथवमकक दजर करिद्वायदी रयदी हहै। अवभयकोजन कथद्वानक एववं पतद्वावलदी परि उपलब्धि बयद्वाननों कवे आधिद्वारि परि भदी आववेदक कवे ववरुद उक आरिकोवपत धिद्वारिद्वाओवं कद्वा अपरिद्वाधि नहहीं बनतद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद ददीवद्वानदी प्रकक वत कद्वा हहै, वकन्तसु इसवे जद्वान- बझूझकरि आपरिद्वाधधिक प्रकद्वारि वदयद्वा रयद्वा हहै। उक वद्वाद कवे सवंबवंधि मम ददीवद्वानदी वद्वाद , मझूल वद्वाद सवं० 360/2024 एववं मझूल वद्वाद सवं० 408/2024 दद्वाधखिल वकयद्वा रयद्वा थद्वा, जको वक लवंवबत हहै तथद्वा स्थरन भदी वमल चिसुकद्वा हहै। अवभलवेखि परि ऐसद्वा ककोई भदी प्रत्यक्ष अथवद्वा अप्रत्यक्ष सद्वाक्ष्य सवंलग्न नहहीं हहै , धजससवे आववेदक कवे ववरुद आरिकोवपत धिद्वारिद्वाओवं कद्वा अपरिद्वाधि बनतद्वा पररिलवक्षत नहहीं हको रिहद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा अपनवे पझूवर कवे आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास कको आज दद्वाधखिल पझूरिक शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 2 कवे मद्वाध्यम सवे स्पष वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक्ष खिसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 11.06.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोडद्वा जद्वाय। 5. उभयपक्ष कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यनों एववं पररिणस्थवतयनों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतनों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेडछद्वाड कक सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोर परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष परि व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यनों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षयनों व पदीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशनों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीक्षर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यनों सवे पररिवचित वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियनों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यनों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 13.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad