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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 81020 (ALL)
SMT. SHITLA DEVI v. STATE OF U.P.
NABAIL/6121/2025 · 2025-07-31
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 81020 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:129173 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 6121 of 2025 Applicant :- Smt. Shitla Devi Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Sikandar B. Kochar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा शदी आकवाश वमिशवा ककी तरिफ सके आज वकवालतनवामिवा दवाधखिल वकयवा गयवा, धजसके पतवावलदी परि रिखिवा जवाय।
2. वतरमिवान दवाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिमि जमिवानत प्रवाररनवा पत , आवकेवदकवा शदीमितदी शदीतलवा दकेवदी ककी ओरि सके मिमु०अ०ससं० 34/2025, अन्तगरत धिवारिवा 85, 80(2) बदी.एन.एस. एवसं धिवारिवा 3/4 दहकेज प्रवतषकेधि अधधिवनयमि, रवानवा ऊसरिवाहवारि, धजलवा इटवाववा मिम अवग्रिमि जमिवानत ककी मिमॉग करितके हहए इस प्रवाररनवा कके सवार दवायरि वकयवा गयवा हहै वक वगरिफ्तवारिदी ककी णसरवत मिम आवकेवदकवा कको जमिवानत परि ररिहवा वकयवा जवा सकके ।
3. आवकेवदकवा कके ववदवान अधधिवकवा, पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एवसं ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा कको समुनवा तरवा पतवावलदी कवा पररिशदीलन वकयवा।
4.
आवकेवदकवा कके ववदवान अधधिवकवा नके तकर प्रसतमुत वकयवा वक आवकेदक वनदर्दोष हहै, उसके उपरिकोक धिवारिवाओसं मिम दकेषवश तसंग व परिकेशवान करिनके ककी वनयत सके आधलप वकयवा गयवा हहै, उसके आशसंकवा हहै वक उसके उपरिकोक ववररत मिवामिलके मिम वगरिफ्तवारि वकयवा जवा सकतवा हहै , जबवक उसकके ववरूद्ध ककोई ववश्वसनदीय सवाक्ष्य नहहीं हहै औरि आवकेवदकवा कके ववरूद्ध अभदी तक ककोई भदी बवाध्यकवारिदी प्रवक्रियवा नहहीं अपनवाई गयदी हहै। आवकेवदकवा मिमृतकवा ककी सवास हहै तरवा उसकके दवारिवा ऐसवा ककोई भदी कमृ त्य कवाररित
नहहीं वकयवा गयवा हहै, जहैसवावक प्रवारवमिककी मिम दवशरत वकयवा गयवा हहै। आवकेवदकवा दवारिवा मिमृतकवा कको दहकेज हकेतमु कभदी मिवारिवा -पदीटवा नहहीं गयवा , न हदी उसके कभदी शवारिदीररिक अरववा मिवानधसक रूप सके प्रतवावड़ित वकयवा गयवा हहै। आवकेदक कको मिवात मिमृतकवा ककी सवास हकोनके ककी वजह सके वतरमिवान ववाद मिम वमिथ्यवारिकोवपत करि वदयवा गयवा हहै। आवकेवदकवा एवसं उसकके पवत (मिमृतकवा कके ससमुरि) मिमृतकवा सके पमृरक घरि मिम ववास करितके रके। वतरमिवान घटनवा कवा ककोई सवतसंत सवाकदी नहहीं हहै , धजसनके घटनवा कवाररित करितके हहए दकेखिवा हको। आवकेवदकवा 70 वषर्षीय वमृद्ध मिवहलवा हहै। वतरमिवान ववाद मिम वववकेचनवा प्रचधलत हहै तरवा आवकेवदकवा कके ववरुद्ध आरिकोपपत ससंबसंधधित न्यवायवालय मिम दवाधखिल नहहीं वकयवा गयवा हहै। पमुननः उनकवा करन हहै वक आवकेवदकवा ववचवारिर औरि जमॉच कके ददौरिवान सहयकोग करिनके कवा वचन दकेतदी हहै वक वह जमॉच एजमसदी यवा न्यवायवालय दवारिवा अपकेवकत समिय परि उपणसरत रिहकेगदी एवसं आवकेवदकवा ककी ओरि सके यह आश्ववासन वदयवा गयवा हहै वक वह कवाननून ककी प्रवक्रियवा मिम सहयकोग करिनके कके धलए तहैयवारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतवा हकोगदी वह ईमिवानदवारिदी सके न्यवायवालय कके समिक खिमुद कको उपलब्धि करिवाएगदी औरि उन सभदी शतर्दोसं कको सवदीकवारि करिनके कके धलए भदी तहैयवारि हहै , जको न्यवायवालय उस परि अधधिरिकोवपत करिकेगदी।
5. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एवसं ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा दवारिवा अवभयमुकवा कके अवग्रिमि जमिवानत कके ववरिकोधि मिम यह तकर प्रसतमुत वकयवा गयवा वक इस मिवामिलके मिम अवभयमुकवा ककी भनूवमिकवा प्ररमि दृष्टयवा पररिलवकत हको रिहदी हहै तरवा इस घटनवा मिम इनककी भनूवमिकवा ससंभवाव्य हहै, इसधलए अवभयमुकवा कको अवग्रिमि जमिवानत परि मिमुक न वकयवा जवाय।
6.
यह कहवा जवा सकतवा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कके मिवामिलके मिम मिवाननदीय उच्चतमि न्यवायवालय दवारिवा यह अवधिवाररित वकयवा गयवा हहै वक अवग्रिमि जमिवानत
यवावचकवा परि न्यवाय-वनररयन करितके समिय न्यवायवालय कको आरिकोपपों ककी प्रकमृ वत औरि गसंभदीरितवा, आरिकोपदी ककी न्यवावयक प्रवक्रियवा सके भवागनके ककी ससंभवावनवा परि ववचवारि करिनवा चवावहए औरि यह वक न्यवायवालय कको आरिकोपदी कके ववरूद्ध उपलब्धि सभदी सवामिग्रिदी कवा सवावधिवानदी सके मिनूल्यवासंकन करिनवा चवावहए औरि आरिकोपदी ककी ववासतववक भनूवमिकवा परि भदी ववचवारि करिनवा चवावहए।
7. उभय पक कके तकर्दो एवसं वतरमिवान मिवामिलके मिम अवग्रिमि जमिवानत ससंबसंधिदी ववधधि कके सरवावपत धसद्धवासंतपों कको ध्यवान मिम रिखितके हहए औरि पककवारिपों कके ववदवान अधधिवकवाओसं कके करनपों, आरिकोपपों ककी प्रकमृ वत, आवकेदक ककी भनूवमिकवा औरि मिवामिलके कके सभदी तथ्यपों एवसं पररिणसरवतयपों कको ध्यवान मिम रिखितके हहए, चनूसंवक अभदी तक आवकेवदकवा कके ववरुद्ध वववकेचनवा प्रचधलत हहै तरवा आरिकोपपत ससंबसंधधित न्यवायवालय मिम दवाधखिल नहहीं वकयवा गयवा हहै, अतनः मिवामिलके कके गमुर -दकोष परि वबनवा ककोई ववचवारि व्यक वकए अवग्रिमि जमिवानत ककी प्रवाररनवा सवदीकवारि वकए जवानके यकोग्य हहै।
8. तद्नमुसवारि, यह अवग्रिमि जमिवानत आवकेदन पत सवदीकवारि वकयवा जवातवा हहै।
9.
उपरिकोक मिमुकदमिवा अपरिवाधि ससंख्यवा मिम सणममिधलत आवकेवदकवा ककी वगरिफ्तवारिदी ककी दशवा मिम, उसके ससंबसंधधित रवानके कके भवारिसवाधिक अधधिकवारिदी ककी ससंतमुवष्ट परि रू० 50,000/- कवा व्यवकगत बसंधि पत एवसं उसदी धिनरिवावश कके दको प्रवतभनू प्रसतमुत करिनके परि, पमुधलस आख्यवा दवाधखिल वकए जवानके तक वनमन शतर्दो कके अधिदीन अवग्रिमि जमिवानत परि मिमुक वकयवा जवाएगवा :- i) आवकेवदकवा अवभयकोजन पक कके सवाक्ष्यपों कके सवार छकेड़िछवाड़ि नहहीं करिकेगदी। ii) आवकेवदकवा अवभयकोजन पक कके गववाहपों कको धिमिकवाएगवा यवा परिकेशवान नहहीं करिकेगदी। iii) आवकेदक, यवद आवश्यक हकोगवा तको पमुधलस अधधिकवारिदी कके समिक जमॉच हकेतमु
अपकेवकत प्रत्यकेक वतधर एवसं वनयत समिय परि उपणसरत रिहकेगदी तरवा अनवावश्यक सरगन नहहीं लकेगदी। iv) आवकेवदकवा उस अपरिवाधि कके समिवान ककोई अपरिवाधि नहहीं करिकेगदी, धजसकवा आरिकोप आवकेवदकवा परि लगवायवा गयवा हहै यवा धजसकके वकए जवानके कवा ससंदकेह हहै। v) आवकेवदकवा मिवामिलके कके तथ्यपों सके पररिवचत वकसदी व्यवक कको प्रत्यक यवा अप्रत्यक रूप सके ककोई प्रलकोभन, धिमिककी यवा ववादवा नहहीं करिकेगदी धजससके वह व्यवक न्यवायवालय यवा वकसदी पमुधलस अधधिकवारिदी कके समिक तथ्यपों कवा खिमुलवासवा करिनके सके ववमिमुखि हको जवाए यवा सवाक्ष्यपों कके सवार छकेड़िछवाड़ि करिके।
10. उपरिकोक शतर्दो कके उलसंघन ककी णसरवत मिम अवभयकोजन पक कको, आवकेवदकवा कको प्रदत्त अवग्रिमि जमिवानत कके वनरिसतदीकरिर हकेतमु उपयमुक आवकेदन प्रसतमुत करिनके ककी सवतसंततवा हकोगदी। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad