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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 80726 (ALL)

SHRI KRISHNA ALIAS VINTU v. STATE OF U.P.

BAIL/26320/2025 · 2025-07-30

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:128086 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26320 of 2025 Applicant :- Shri Krishna Alias Vintu Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Anand Kumar Mishra,Dhananjay Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा शदी रिवाजकेश कक मवारि धससिंह ककी तरिफ सके आज वकवालतनवामवा दवाधखिल वकयवा गयवा, धजसके पतवावलदी परि रिखिवा जवाय। 2. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा, पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एवसिं रिवाज्य ककी तरिफ सके ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा कको सकनवा तथवा पतवावलदी कवा पररिशदीलन वकयवा। 3. वतरमवान दवाणणण्डिक प्रककीरर जमवानत प्रवाथरनवा पत आवकेदक Shri Krishna Alias Vintu ककी ओरि सके मक०अ०ससिं० 75/2023, असिंतगरत धिवारिवा 420, 467, 468, 471 भवा.दसिं.ससिं., थवानवा ण्डिडौककी, धजलवा आगरिवा मम जमवानत परि मकक करिनके हकेतक प्रस्तकत वकयवा गयवा हहै। 4. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा नके तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदक कको इस प्रकरिर मम गलत एवसिं फजर्जी ढसिंग सके झझूठवा फसिं सवायवा गयवा हहै , उसनके कधथत अपरिवाधि कवाररित नहहीं वकयवा हहै। आवकेदक दवारिवा ऐसवा ककोई भदी कक त्य कवाररित नहहीं वकयवा गयवा हहै, जहैसवावक प्रवाथवमककी मम दवशरत वकयवा गयवा हहै। प्रथम सझूचनवा ररिपकोरर अवत - ववलम्ब सके दजर करिवायदी गयदी हहै तथवा उक ववलम्ब कवा ककोई समकवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयवा गयवा हहै। आवकेदक दवारिवा सझूचनवाकतवार कको कभदी भदी जमदीन बकेचदी नहहीं गयदी, वरिनन् सझूचनवाकतवार दवारिवा फजर्जी तरिदीकके सके ववक्रय पत तहैयवारि करिकके जमदीन खिरिदीदनके कवा दवाववा करितवा रिहवा हहै। आवकेदक दवारिवा वकसदी प्रकवारि ककी कझू ररिचनवा नहहीं ककी गयदी हहै, उसनके फजर्जी दस्तवावकेजजों कके आधिवारि परि ऋर नहहीं धलयवा हहै , वरिनन् वह उक भझूवम कवा मवाधलक हहै, धजसकके आधिवारि परि उसनके ऋर धलयवा हहै। उसकके दवारिवा वकसदी प्रकवारि ककी धिकोखिवाधिडदी नहहीं ककी गयदी हहै। ववाददी दवारिवा आवकेदक ककी जमदीन फजर्जी तरिदीकके सके हडपनके ककी नदीयत सके उसपरि वतरमवान प्रवाथवमककी दजर करिवायदी गयदी हहै। आवकेदक प्रश्नगत भझूवम कवा मवाधलक हहै तथवा उसकवा नवाम रिवाजस्व अवभलकेखि (खितडौनदी) मम उत्तरिवाधधिकवारि कके तडौरि परि दजर हहै। वतरमवान ववाद ददीववानदी प्रकक वत कवा हहै तथवा जवान -बझूझकरि इसके आपरिवाधधिक रूप वदयवा गयवा हहै। आवकेदक एवसिं सझूचनवाकतवार कके मध्य वरर 1998 सके वनरिसिंतरि ददीववानदी मककदमम चल रिहके हह। आवकेदक कवा ककोई पझूवर आपरिवाधधिक इवतहवास नहहीं हहै। पकननः उनकवा यह भदी कथन हहै वक आवकेदक ककी तरिफ सके यह आश्ववासन वदयवा गयवा हहै वक वह कवानझून ककी प्रवक्रयवा मम सहयकोग करिनके कके धलए तहैयवारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतवा हकोगदी वह ईमवानदवारिदी सके अदवालत कके समक्ष खिकद कको उपलब्धि करिवाएगवा औरि उन सभदी शतरसिं कको स्वदीकवारि करिनके कके धलए भदी तहैयवारि हहै जको न्यवायवालय उस परि अधधिरिकोवपत करिकेगदी। आवकेदक वनदरर हहै तथवा वह इस प्रकरिर मम वद० 10.04.2025 सके कवारिवागवारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि छकोड वदयवा जवाय। 5. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एवसिं ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा नके आवकेदक कके जमवानत कवा प्रबल ववरिकोधि करितके हहए तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदक दवारिवा कवाररित अपरिवाधि ससिंसिंजकेय एवसिं गसिंभदीरि प्रकक वत कवा हहै , इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि न छकोडवा जवाय। 6. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा कके तकरसिं कके पररिप्रकेक्ष्य मम पतवावलदी परि उपलब्धि सवारिववान तथ्यजों एवसिं पररिणस्थवतयजों कवा समग्र रूप सके अवलकोकन करिनके कके बवाद , सबझूतजों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिवात्मक सवामग्रदी ककी अनकपणस्थवत एवसिं उपलब्धि सवामग्रदी सके छकेडछवाड ककी ससिंभवावनवा न हकोनके कके तथ्य कको दकेखितके हहए मकेरिदी रिवाय मम आवकेदक कको जमवानत परि मकक करिनके कवा उपयकक आधिवारि हहै। 7. अतनः ववाद कके गकर-दकोर परि वबनवा ककोई वरप्परदी वकए हहए आवकेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिवाधि मम ससिंबसिंधधित न्यवायवालय ककी ससिंतकवष परि व्यवकगत बसिंधि -पत एवसिं अधधिक धिनरिवावश कके ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तकत करिनके परि वनम्नधलधखित शतरसिं कके सवाथ जमवानत परि छकोड वदयवा जवाय। i. आवकेदक वववकेचनवा यवा परिदीक्षर कके दडौरिवान अवभयकोजन सवाक्ष्यजों कके सवाथ छकेडछवाड नहहीं करिकेगवा। ii. आवकेदक अवभयकोजन सवावक्षयजों व पदीवडतवा / वशकवायतकतवार कको ण्डिरिवायकेगवा/धिमकवायकेगवा नहहीं। iii. आवकेदक न्यवायवालय कके आदकेशजों कवा पवालन करिकेगवा , वह परिदीक्षर कके दडौरिवान वबनवा ककोई अनवावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यवायवालय मम उपणस्थत हकोगवा तथवा परिदीक्षर मम ईमवानदवारिदी सके सहयकोग करिकेगवा। iv. आवकेदक जमवानत परि ररिहवा हकोनके कके बवाद जमवानत ककी स्वतसिंततवा कवा दकरूपयकोग नहदी करिकेगवा औरि वकसदी भदी अपरिवाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगवा न ककोई अपरिवाधधिक कक त्य करिकेगवा। v. आवकेदक प्रत्यक्ष यवा अप्रत्यक्ष रूप सके मवामलके कके तथ्यजों सके पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यवा पकधलस अधधिकवाररियजों कको ककोई प्रलकोभन यवा धिमककी नहहीं दकेगवा न हदी उनसके ककोई ववायदवा करिकेगवा, धजसकके कवारिर उन्हम न्यवायवालय मम तथ्यजों कको उजवागरि करिनके सके ववरित रिहनवा पण्डिकेडे़। 8. उपरिकोक शतरसिं मम सके वकसदी कके उलसिंघन कके मवामलके मम , परिदीक्षर न्यवायवालय आवकेदक ककी जमवानत वनयमवानकसवारि रिद्द करिनके कको स्वतसिंत हहै। Order Date :- 31.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad