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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 80720 (ALL)

SANJAY @ SANDEEP @ TINKU JATAV AND 2 OTHERS v. STATE OF U.P.

BAIL/26344/2025 · 2025-07-30

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:127882 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26344 of 2025 Applicant :- Sanjay @ Sandeep @ Tinku Jatav And 2 Others Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Vijay Singh Sengar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदकगण सवंजय उफर सवंदलीप उफर वटवंकक जद्वाटव, रद्वाजक बवेलदद्वार एववं करन जद्वाटव ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 53/2025, अवंतगरत धिद्वारद्वा 309(4), 317(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा कसु ठठौंद, धजलद्वा जद्वाललौन मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा गयद्वा हहै। 3. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदकगण कको इस प्रकरण मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झकठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उन्हहोंनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। इसली वद्वाद कको आववेदकगण कवे ववरुद्ध पवंजलीकक त करद्वानवे कवे पश्चद्वात अन्य पद्वापाँच वद्वादहों मम नद्वावमत कर वदयद्वा गयद्वा हहै। आववेदकगण प्रद्वाथवमककी मम नद्वावमत नहहीं हह , दलौरद्वान ववववेचनद्वा आववेदकगण कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हहै। आववेदकगण कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घटनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली सवंवदग्धि वस्तसु ककी बरद्वामदगली दवशरत नहहीं ककी गयली हहै , जको भली बरद्वामदगली दवशरत ककी गयली हहै, वह पकणरततः फजर्जी एववं बनद्वावटली हहै तथद्वा उक बरद्वामदगली ककी ककोई वशनद्वाख्त नहहीं करद्वायली गयली हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा वद्वादली मसुकदमद्वा कवे भद्वाई दद्वारद्वा वकसली भली प्रकद्वार ककी मद्वारपलीट नहहीं ककी गयली हहै, वद्वादली कवे भद्वाई कको जको भली चकोट आयली हहै , वह सद्वाधिद्वारण प्रकक वत ककी हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा अपनवे पकवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 13 मम स्पष्ट वकयद्वा गयद्वा हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदकगण ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक ववे कद्वानकन ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली ववे ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएवंगवे और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली। आववेदकगण वनदरष हह तथद्वा ववे इस प्रकरण मम वद० 16.04.2025 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदकगण कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदकगण दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यहों एववं पररणस्थवतयहों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबकतहों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदकगण कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 6. अततः वद्वाद कवे गसुण-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्पणली वकए हहए आववेदकगण कको उपरकोक ववणरत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकगत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको-दको प्रवतभक प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदकगण ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षण कवे दलौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करमगवे। ii. आववेदकगण अवभयकोजन सद्वावक्षयहों व पलीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायमगवे/धिमकद्वायमगवे नहहीं। iii. आववेदकगण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करमगवे , ववे परलीक्षण कवे दलौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हहोंगवे तथद्वा परलीक्षण मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोग करमगवे। iv. आववेदकगण जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहली करमगवे और वकसली भली अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हहोंगवे न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करमगवे। v. आववेदकगण प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दमगवे न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करमगवे , धजसकवे कद्वारण उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यहों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षण न्यद्वायद्वालय आववेदकगण ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 31.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad