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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 79887 (ALL)
BUNTY v. STATE OF U.P.
BAIL/26094/2025 · 2025-08-12
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 79887 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:138073 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26094 of 2025 Applicant :- Bunty Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Mahendra Bahadur Singh,Shashank Singh,Shivanshu Singh Counsel for Opposite Party :- Bharat Garg,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक बवंटदी कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 1012/2024, अवंतररत धिद्वारिद्वा 324(4), 326(g) बदी.एन.एस., थद्वानद्वा हद्वाईववे, धजलद्वा मथसुरिद्वा मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , आववेदक दद्वारिद्वा कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक प्रद्वाथवमकक मम नद्वावमत नहहीं हहै , ददौरिद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा उपरिकोक कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररिपकोटर ववलम्ब सवे दजर करिद्वायदी रयदी हहै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। सदी .सदी.टदी.वदी. फसु टवेज मम भदी आववेदक कक ककोई भझूवमकद्वा पररिलवक्षित नहहीं हको पद्वायदी हहै। यहद्वावं प्रद्वासवंवरक तथ्य हहै वक वतरमद्वान वद्वाद मम अन्य सह-अवभयसुक सवंतकोष कक जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 22957/2025 मम वभन्न न्यद्वायपदीठ दद्वारिद्वा वभन्न वतधथ कको स्वदीकक त कक जद्वा चसुकक हहै। अततः जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयसुक सवे समद्वान भझूवमकद्वा कवे आधिद्वारि
परि आववेदक भदी जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारिदी हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक्षि खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 14.06.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
उभयपक्षि कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्ययों एववं पररिणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ कक सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै।
6. अततः वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष परि व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीक्षिर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षिययों व पदीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं।
iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीक्षिर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररिययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 13.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad