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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 79179 (ALL)

RAMA SHANKAR YADAV v. STATE OF U.P.

BAIL/26497/2025 · 2025-07-31

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:128882 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26497 of 2025 Applicant :- Rama Shankar Yadav Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Sunil Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक रिमद्वाशवंकरि यद्वादव कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 1871/2016, अवंतररत धिद्वारिद्वा 419, 420, 467, 468, 471, 406, 504 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा ककोतवद्वालदी, धजलद्वा मऊ मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमकक मम दशद्वारयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा सझूचनद्वाकतद्वार कवे वतरमद्वान वद्वाद कवे सवंबवंधि मम ककोई धिनरिद्वावश प्रद्वाप्त नहहीं कक रयदी हहै , न हदी वकसदी प्रकद्वारि सवे लद्वाभद्वाथर्जी हहै, न हदी वतरमद्वान घटनद्वा सवे सवंबवंधधित ककोई अवद्वावंवछित धिनरिद्वावश आववेदक कवे खद्वातवे मम आयदी हहै। आववेदक कको मद्वात सह -अवभयसुक कद्वा वपतद्वा हकोनवे कक वजह सवे वतरमद्वान वद्वाद मम वमथ्यद्वारिकोवपत करि वदयद्वा रयद्वा हहै। उपरिकोक वद्वाद मम घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हहै। आववेदक दद्वारिद्वा वकसदी प्रकद्वारि कक कझू टरिचनद्वा नहहीं कक रयदी हहै तथद्वा ऐसद्वा ककोई भदी दस्तद्वाववेज तहैयद्वारि नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , धजससवे उसकवे ववरुद्ध उपरिकोक आरिकोवपत धिद्वारिद्वाओवं कद्वा अपरिद्वाधि बनतद्वा प्रतदीत हकोतद्वा हको। आववेदक दद्वारिद्वा वद्वाददी कको वकसदी प्रकद्वारि कवे भझूखणण्डि कवे हस्तद्वावंतरिर हवेतसु ककोई पहैसद्वा नहहीं धलयद्वा रयद्वा हहै, न हदी हस्तद्वावंतरिर करिनवे कद्वा वद्वादद्वा आववेदक दद्वारिद्वा वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान घटनद्वा कको कद्वाररित करिनवे मम आववेदक कक ककोई वववशष्ट भझूवमकद्वा दवशरत नहहीं कक रयदी हहै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 10.07.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छिकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छिकोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्ययों एववं पररिणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छिवेड़छिद्वाड़ कक सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष्ट परि व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छिकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीकर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छिवेड़छिद्वाड़ नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पदीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीकर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीकर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररिययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad