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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 78962 (ALL)

AMAAN v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

NABAIL/5932/2025 · 2025-09-07

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 5932 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. कायार्लय की आख्या िदनांिकत 19.08.2025 के अनुसार िवपक्षी सं० 4 पर नोिटस का तामीला पयार्प्त है, िकन्तु उनकी तरफ से कोई उपिस्थत नहीं है। 2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 198/2025, अन्तगर्त धारा 65(1), 62, 137(2), 115(2), 351(3) बी.एन.एस. एवं धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट, थाना बहजोई, िजला सम्भल में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदक को जमानत पर िरहा िकया जा सके । 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और आवेदक के िवरूद्ध अभी कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। पीिड़ता ने अपने बयान अंतगर्त धारा 183 बी.एन.एस.एस. में आवेदक के िवरुद्ध कोई िविशष्ट भूिमका दिशत नहीं की है, वरन् सह-अिभयुक्त यश के िवरुद्ध गदर्न पर काटने की भूिमका विणत की है। पीिड़ता के िचिकत्सीय परीक्षण आख्या में उसके शरीर के आंतिरक भाग पर कोई भी चोट नहीं पायी गयी है। पीिड़ता के बयानों एवं िचिकत्सीय परीक्षण आख्या से अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। वतर्मान वाद में िववेचना प्रचिलत है तथा अभी तक संबंिधत िवचारण न्यायालय में आरोपपत्र दािखल नहीं िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देता है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगा एवं आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। Versus Counsel for Applicant(s) : Anurag Pandey, Sudarshan Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Amaan .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्त के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्त की भूिमका पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना में इनकी भूिमका संभाव्य है। इसिलए अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए। 7. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है। 8. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है। 9. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदक की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, पुिलस आख्या दािखल िकए जाने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगा। iii) आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी के समक्ष जॉच हेतु अपेिक्षत प्रत्येक ितिथ एवं िनयत समय पर उपिस्थत रहेगा तथा अनावश्यक स्थगन नहीं लेगा। iv) आवेदक उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगा, िजसका आरोप आवेदक पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष तथ्यों का खुलासा करने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करे। 10. उपरोक्त शतोर् के उल्लंघन की िस्थित में अिभयोजन पक्ष को, आवेदक को प्रदत्त अिग्रम जमानत के िनरस्तीकरण हेतु उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी। September 8, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 5932 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad