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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 6206 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0014/2025, अन्तगर्त धारा 137(2), 87, 70(1), 351(3) बी.एन.एस. एवं धारा 5/6 पॉक्सो अिधिनयम, थाना बक्सा, िजला जौनपुर में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदक को जमानत पर िरहा िकया जा सके ।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. कायार्लय आख्या के अनुसार िवपक्षी पर नोिटस का तामीला पयार्प्त है, िकन्तु उनकी तरफ से कोई उपिस्थत नहीं है।
4.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और आवेदक के िवरूद्ध अभी कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है। आवेदक प्राथिमकी में नािमत अिभयुक्त नहीं है, प्राथिमकी के पाँच माह बाद पीिड़ता द्वारा िमथ्या रूप से आवेदक को वतर्मान घटना में अिभयुक्त बना िदया गया है। पीिड़ता प्राथिमकी में नािमत अिभयुक्त से प्रेम करती थी एवं उससे शादी करना चाहती थी, िजसके िलए उसके घर वाले तैयार नहीं थे। पीिड़ता घर से िबना बताये सह-अिभयुक्त से साथ चली गयी। तत्पश्चात वहाँ से वापस आने के बाद उसके घर वालों ने उसे भगा िदया, तत्पश्चात पीिड़ता ने आवेदक को भी अिभयुक्त बना िदया। पीिड़ता के बयानों एवं अिभयोजन कथानक में परस्पर िवरोधाभास है तथा पीिड़ता के बयानों से स्पष्ट है िक पीिड़ता सहमत पक्षकार है। पीिड़ता ने Versus Counsel for Applicant(s) : Kamal Kumar Singh, Ajay Kumar Maurya, Jeet Bahadur Gautam Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pankaj Yadav .....Applicant(s) State Of U.P. And 5 Others .....Opposite Party(s)
अपने बयान में अपनी आयु 17 वषर् बतायी है, जबिक पीिड़ता की आयु परीक्षण आख्या में 19 वषर् पायी गयी है, िजससे यह स्पष्ट है िक पीिड़ता वयस्क है। वतर्मान घटना से आवेदक का कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है तथा आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देता है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगा एवं आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
5.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्त के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्त की भूिमका पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना में इनकी भूिमका संभाव्य है। इसिलए अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय।
6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए।
7. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं िवचारण न्यायालय द्वारा िनयत ितिथयों पर आवेदक के िनयिमत रूप से उपिस्थत होने, पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण- दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है।
8. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है।
9. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदक की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत िवचारण न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगा। NABAIL No. 6206 of 2025 2
iii) आवेदक िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ एवं समय पर उपिस्थत होगा तथा अनावश्यक स्थगन नहीं लेगा। iv) आवेदक उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगा, िजसका आरोप आवेदक पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष तथ्यों का खुलासा करने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करे।
10.
उपरोक्त उल्लेिखत शतोर्ं में से िकसी भी शतर् के उल्लघंन की िस्थित में संबिधत िवचारण न्यायालय आवेदक को प्रदत्त जमानत िनरस्त करने हेतु स्वतंत्र है। September 16, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 6206 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad