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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 78745 (ALL)

SATINDER SINGH v. State of U.P.

ABAIL/7310/2024 · 2025-07-16

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:115883 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 7310 of 2024 Applicant :- Satinder Singh Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Katyayini,Swetashwa Agarwal Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज प्रत्ययत्तर शपथपत्र कवे मद्वाध्यम सवे ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक ककी प्रमद्वावणत प्रवतधलवप दद्वाधखिल ककी गययी हह , धजसवे पत्रद्वावलयी पर रखिद्वा जद्वाए। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक Satinder Singh ककी ओर सवे मय०अ०स० 0012/2023, अन्तगरत धिद्वारद्वा 406, 420, 467, 468, 471, 352, 504, 506 भद्वा०दसं०ससं०, थद्वानद्वा सवेक्टर 142, धजलद्वा कवमश्नरवेट गगौतम बयद्ध नगर मम अवग्रिम जमद्वानत पर मयक करनवे हवेतय प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा हह। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा शयी चसंदन धससंह कक सयनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलयी कद्वा पररशयीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तयत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हह , उसवे उपरकक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हह , उसवे आशसंकद्वा हह वक उसवे उपरकक ववणरत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हह , जबवक उसकवे ववरूद्ध ककई ववश्वसनयीय सद्वाक्ष्य नहहीं हह। आववेदक दद्वारद्वा प्रद्वाथवमककी मम दवशरत उपरकक धिद्वारद्वाओसं कद्वा अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हह। आवदवेक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद कक कद्वाररत करनवे कद्वा न तक ककई हवेतयक हह, न हयी ककई सरककद्वार हह। ववववेचक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद मम आरकपपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा जद्वा चयकद्वा हह। आववेदक कक पपूवर मम आदवेश वदनद्वासंक 05.08.2024 कक असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गययी हह, धजसमम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अधधिरकवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा अनयपद्वालन वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह। आववेदक ककी ओर सवे यह भयी आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हह वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकग करनवे कवे धलए तहयद्वार हह और जब भयी आवश्यकतद्वा हकगयी वह ईमद्वानदद्वारयी सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्ष खियद कक उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभयी शतर्दोसं कक स्वयीकद्वार करनवे कवे धलए भयी तहयद्वार हह जक न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकवपत करवेगयी। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा वक अवभययक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गसंभयीर प्रकक वत कद्वा हह तथद्वा पपूवर मम प्रद्वाप्त अवग्रिम जमद्वानत मम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अधधिरकवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा पद्वालन नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा अनद्वावश्यक रूप सवे जद्वानबपूझकर अनद्वावश्यक स्थगन धलयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकग नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह, इसधलए आववेदक कक अवग्रिम जमद्वानत पर मयक वकयवे जद्वानवे कद्वा ककई औवचत्य प्रतयीत नहहीं हकतद्वा हह। अततः अवभययक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हह वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कवे मद्वामलवे मम मद्वाननयीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नवे मद्वानद्वा हह वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनणरय करतवे समय न्यद्वायद्वालय कक आरकप ककी प्रकक वत और गसंभयीरतद्वा, अवभययक कद्वा पपूवरवकत्त, अवभययक कवे न्यद्वाय सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए तथद्वा न्यद्वायद्वालय कक अवभययक कवे ववरुद्ध उपलब्धि ससंपपूणर सद्वामग्रियी कद्वा सद्वावधिद्वानयीपपूवरक मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए तथद्वा अवभययक ककी सटयीक भपूवमकद्वा कक भयी ध्यद्वान मम रखिनद्वा चद्वावहए। 7. वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधियी ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासंततों कक ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पक्षकद्वारतों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनतों , आरकपतों ककी प्रकक वत , आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभयी तथ्यतों एवसं पररणस्थवतयतों कक ध्यद्वान मम रखितवे हहए , आववेदक कक पपूवर मम सशतर असंतररम जमद्वानत न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा प्रदद्वान ककी गययी थयी , वकन्तय प्रपत्रतों कवे अवलककन सवे वववदत हकतद्वा हह वक आववेदक दद्वारद्वा उक शतर्दोसं कद्वा अनयपद्वालन नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा अनद्वावश्यक स्थगन लवेकर न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकग प्रदद्वान न करकवे पपूवर मम प्रद्वाप्त असंतररम जमद्वानत कद्वा दयरुपयकग कर रहद्वा हह, अततः मद्वामलवे कवे गयण-दकष पर वबनद्वा ककई ववचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वयीकद्वार वकए जद्वानवे यकग्य नहहीं हह , तद्नयसद्वार आववेदक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र अस्वयीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 8. उपरककद्वानयसद्वार वद्वाद कवे गयण-दकष पर वटप्पणयी वकयवे बगहर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 9. इस वद्वाद मम यवद ककई असंतररम आदवेश हक, तक वह स्वततः समद्वाप्त समझद्वा जद्वाए। 10. कद्वायद्वारलय कक वनदरवशत वकयद्वा जद्वातद्वा हह वक इस आदवेश ककी एक प्रवतधलवप अववलम्ब ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे भवेजनद्वा सयवनणश्चत करम। Order Date :- 17.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad