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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 5896 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीिक्षत।
2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेिदका की ओर से मु०अ०सं० 131/2024, अन्तगर्त धारा 376(3), 506, 120-बी. भा.दं.सं. एवं धारा 67 आई.टी. एक्ट तथा धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट, थाना िबल्सी, िजला बदायूं में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ दायर िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेिदका को जमानत पर िरहा िकया जा सके ।
3. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
4. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय।
5. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और आवेिदका के िवरूद्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है। आवेिदका द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा प्राथिमकी में घटना की ितिथ एवं समय विणत नहीं िकया गया है एवं उक्त िवलम्ब का कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेिदका पीिड़ता को जानती व पहचानती नहीं है। आवेिदका द्वारा पीिड़ता का िकसी भी प्रकार की आपित्तजनक तस्वीर अथवा वीिडयो नहीं बनाया गया है। आवेिदका का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। वतर्मान वाद में िववेचना प्रचिलत है तथा आवेिदका के िवरुद्ध अभी Versus Counsel for Applicant(s) : Adnan Aamir, Awaish Khan, Sr.
Advocate Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Sudhanshu Kumar Gour Hari Hina .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)
तक आरोपपत्र दािखल नहीं िकया गया है, िजसका उल्लेख आवेिदका द्वारा शपथपत्र के प्रस्तर सं० 18 में िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेिदका िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देती है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगी एवं आवेिदका की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगी और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्ता के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्ता की भूिमका प्रथम दृष्टया पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना में इनकी भूिमका संभाव्य है, इसिलए अिभयुक्ता को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय।
7. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए।
8. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है।
9. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है।
10.
उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेिदका की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, पुिलस आख्या दािखल िकए जाने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेिदका अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी। ii) आवेिदका अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगी। iii) आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी के समक्ष जॉच हेतु अपेिक्षत प्रत्येक NABAIL No. 5896 of 2025 2
ितिथ एवं िनयत समय पर उपिस्थत रहेगी तथा अनावश्यक स्थगन नहीं लेगी। iv) आवेिदका उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगी, िजसका आरोप आवेिदका पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेिदका मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगी िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष तथ्यों का खुलासा करने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करे।
11. उपरोक्त शतोर् के उल्लंघन की िस्थित में अिभयोजन पक्ष को, आवेिदका को प्रदत्त अिग्रम जमानत के िनरस्तीकरण हेतु उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी। September 17, 2025 Pawan Kumar NABAIL No. 5896 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad