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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 78092 (ALL)
RAJESH BIND ALIAS BADAK v. STATE OF U.P.
BAIL/26390/2025 · 2025-07-31
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 78092 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:129104 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26390 of 2025 Applicant :- Rajesh Bind Alias Badak Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Prateek Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा शदी अलदी जमवाल खवान ककी तरिफ सके आज वकवालतनवामवा दवाधखल वकयवा गयवा, धजसके पतवावलदी परि रिखवा जवाय।
2. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा, पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं रिवाज्य ककी तरिफ सके ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा कको ससुनवा तथवा पतवावलदी कवा पररिशदीलन वकयवा।
3. वतरमवान दवाणणण्डिक प्रककीरर जमवानत प्रवाथरनवा पत आवकेदक Rajesh Bind Alias Badak ककी ओरि सके मसु०अ०सवं० 05/2025, अवंतगरत धिवारिवा 61(2), 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 352, 351(2) बदी.एन.एस., थवानवा ककोतववालदी शहरि, धजलवा वमजवारपसुरि मम जमवानत परि मसुक करिनके हकेतसु प्रस्तसुत वकयवा गयवा हहै।
4.
आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा नके तकर प्रस्तसुत वकयवा वक आवकेदक कको इस प्रकरिर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सके झझूठवा फवं सवायवा गयवा हहै , उसनके कधथत अपरिवाधि कवाररित नहहीं वकयवा हहै। आवकेदक कके ववरुद्ध आककेवपत आरिकोप हहै वक उक फजर्जी वबककी ववलकेख मम वह गववाह हहै तथवा उसनके सझूचनवाकतवार ककी जमदीन कको बकेचके जवातके समय वकसदी अन्य मवहलवा कको सझूचनवाकतवार कके स्थवान परि सत्यवावपत करिनके ककी गववाहदी ददी थदी। आवकेदक दवारिवा ऐसवा ककोई भदी कक त्य कवाररित नहहीं वकयवा गयवा हहै , जहैसवावक प्रवाथवमककी मम दवशरत वकयवा गयवा हहै। प्रवाथवमककी अवत -ववलणमबत हहै तथवा उक ववलमब कवा ककोई समसुवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयवा गयवा हहै। ववास्तववकतवा यह
हहै वक आवकेदक वतरमवान ववाद मम कके वल गववाह हहै तथवा उसनके ववास्तववक सझूचनवाकतवार कको हदी सत्यवावपत वकयवा थवा , वकसदी अन्य व्यवक कको नहहीं , उक कके अवतररिक आवकेदक वतरमवान ववाद मम वकसदी प्रकवारि सके लवाभवाथर्जी नहहीं हहै , न हदी कके तवा-ववकके तवा हहै। वदनवावंक 27.03.2024 कको सझूचनवाकतवार दवारिवा स्वयवं सह-अवभयसुक रिवाजनवाथ धसवंह एववं ससुशदील वमशवा कके पक मम वबककी ववलकेख वनष्पवावदत वकयवा गयवा हहै, उक वबककी ववलकेख ककी प्रवत अनसुलग्नक सवं० 4 कके रूप मम पतवावलदी कके सवाथ सवंलग्न वकयवा गयवा हहै। तत्पश्चवात सह -अवभयसुकगर (कके तवागर) कवा नवाम रिवाजस्व खततौनदी मम दजर वकयवा जवा चसुकवा हहै , धजसमम नवामवावंतरिर ककी कवायरववाहदी कके समय सझूचनवाकतवार दवारिवा ककोई कवायरववाहदी नहहीं ककी गयदी। आवकेदक कको वतरमवान ववाद मम रिवंधजशन वमथ्यवा रूप सके आरिकोवपत वकयवा गयवा हहै। पसुननः उनकवा यह भदी कथन हहै वक आवकेदक ककी तरिफ सके यह आश्ववासन वदयवा गयवा हहै वक वह कवानझून ककी प्रवकयवा मम सहयकोग करिनके कके धलए तहैयवारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतवा हकोगदी वह ईमवानदवारिदी सके अदवालत कके समक खसुद कको उपलब्धि करिवाएगवा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकवारि करिनके कके धलए भदी तहैयवारि हहै जको न्यवायवालय उस परि अधधिरिकोवपत करिकेगदी। आवकेदक वनदरष हहै तथवा वह इस प्रकरिर मम वद० 07.06.2025 सके कवारिवागवारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि छकोड़ वदयवा जवाय।
5.
पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा नके आवकेदक कके जमवानत कवा प्रबल ववरिकोधि करितके हहए तकर प्रस्तसुत वकयवा वक आवकेदक दवारिवा कवाररित अपरिवाधि सवंवंजकेय एववं गवंभदीरि प्रकक वत कवा हहै , इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि न छकोड़वा जवाय।
6. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा कके तकरवं कके पररिप्रकेक्ष्य मम पतवावलदी परि उपलब्धि सवारिववान तथ्ययों एववं पररिणस्थवतययों कवा समग्र रूप सके अवलकोकन करिनके कके बवाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिवात्मक सवामग्रदी ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सवामग्रदी सके छकेड़छवाड़ ककी सवंभवावनवा न हकोनके कके तथ्य कको दकेखतके हहए मकेरिदी रिवाय मम आवकेदक कको जमवानत परि मसुक करिनके कवा उपयसुक आधिवारि हहै।
7. अतनः ववाद कके गसुर-दकोष परि वबनवा ककोई वटिप्परदी वकए हहए आवकेदक कको उपरिकोक
ववररत अपरिवाधि मम सवंबवंधधित न्यवायवालय ककी सवंतसुवष परि व्यवकगत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिवावश कके ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनके परि वनमनधलधखत शतरवं कके सवाथ जमवानत परि छकोड़ वदयवा जवाय। i. आवकेदक वववकेचनवा यवा परिदीकर कके दतौरिवान अवभयकोजन सवाक्ष्ययों कके सवाथ छकेड़छवाड़ नहहीं करिकेगवा। ii. आवकेदक अवभयकोजन सवावकययों व पदीवड़तवा / वशकवायतकतवार कको ण्डिरिवायकेगवा/धिमकवायकेगवा नहहीं। iii. आवकेदक न्यवायवालय कके आदकेशयों कवा पवालन करिकेगवा , वह परिदीकर कके दतौरिवान वबनवा ककोई अनवावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यवायवालय मम उपणस्थत हकोगवा तथवा परिदीकर मम ईमवानदवारिदी सके सहयकोग करिकेगवा। iv. आवकेदक जमवानत परि ररिहवा हकोनके कके बवाद जमवानत ककी स्वतवंततवा कवा दसुरूपयकोग नहदी करिकेगवा औरि वकसदी भदी अपरिवाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगवा न ककोई अपरिवाधधिक कक त्य करिकेगवा। v. आवकेदक प्रत्यक यवा अप्रत्यक रूप सके मवामलके कके तथ्ययों सके पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यवा पसुधलस अधधिकवाररिययों कको ककोई प्रलकोभन यवा धिमककी नहहीं दकेगवा न हदी उनसके ककोई ववायदवा करिकेगवा, धजसकके कवारिर उन्हम न्यवायवालय मम तथ्ययों कको उजवागरि करिनके सके ववरित रिहनवा पण्डिकेडे़।
8. उपरिकोक शतरवं मम सके वकसदी कके उलवंघन कके मवामलके मम , परिदीकर न्यवायवालय आवकेदक ककी जमवानत वनयमवानसुसवारि रिद्द करिनके कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad