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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 77812 (ALL)
DAYA SHANKAR v. STATE OF U.P.
BAIL/26328/2025 · 2025-07-30
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 77812 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC:127956 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26328 of 2025 Applicant :- Daya Shankar Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Dewendra Singh,Vivek Upadhyay Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा शदी मनदीष कक मवारि कश्यप एववं शदी वदी .पदी. धसवंह कश्यप कक तरिफ सके आज वकवालतनवामवा दवाधखिल वकयवा गयवा, धजसके पतवावलदी परि रिखिवा जवाय।
2. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा, पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं रिवाज्य कक तरिफ सके ववदवान अपरि शवासककय अधधिवकवा कको सकनवा तथवा पतवावलदी कवा पररिशदीलन वकयवा।
3. वतरमवान दवाणणण्डिक प्रककरर जमवानत प्रवाथरनवा पत आवकेदक दयवा शवंकरि कक ओरि सके मक०अ०सवं० 274/2024 सके उददत ववाद सवं० 150/2025, अवंतगरत धिवारिवा 74, 109(1), 115(2), 117(2), 118(2), 333 बदी.एन.एस., थवानवा लवाईनपवारि, धजलवा वफरिकोजवाबवाद मम जमवानत परि मकक करिनके हकेतक प्रस्तकत वकयवा गयवा हहै।
4.
आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा नके तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदक कको इस प्रकरिर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सके झदठवा फवं सवायवा गयवा हहै, उसनके कधथत अपरिवाधि कवाररित नहहीं वकयवा हहै। आवकेदक दवारिवा ऐसवा ककोई भदी कक त्य कवाररित नहहीं वकयवा गयवा, जहैसवावक प्रवाथवमकक मम दवशरत वकयवा गयवा हहै। आवकेदक ववावदनदी कक बहन कवा पवत हहै। आवकेदक दवारिवा वतरमवान ववाद कके सवंबवंधि मम वकसदी कके सवाथ मवारिपदीट एववं गवालदी-गललौज नहहीं कक गयदी हहै। ववावदनदी एववं उसकक बहन कको वकसदी औरि प्रकवारि सके चकोट लग गयदी, वकन्तक वहैववावहक रिवंधजश कक वजह सके आवकेदक कको वतरमवान ववाद मम वमथ्यवारिकोवपत करि वदयवा गयवा, धजसकवा ककोई स्वतवंत सवाकदी नहहीं हहै। ववावदनदी मककदमवा एववं उसकक बहन कके बयवाननों एववं अवभयकोजन कथवानक मम परिस्परि ववरिकोधिवाभवास हहै। ववावदनदी एववं उसकक बहन कको जको भदी चकोटम पवायदी गयदी हह , वह सवाधिवारिर प्रवकक त कक हह तथवा ककोई गम्भदीरि चकोट नहहीं पवायदी गयदी हहै। आवकेदक कवा ककोई पदवर आपरिवाधधिक इवतहवास नहहीं हहै। उक ववाद मम सह-अवभयकक ठवाकक रि एववं लखिन कक जमवानत, जमवानत प्रवाथरनवापत सवं० 6092/2025 एववं 17020/2025 मम वववभन्न वतधथयनों परि वववभन्न न्यवायपदीठनों दवारिवा स्वदीकक त कक जवा चककक हहै। पकननः उनकवा यह भदी कथन हहै वक आवकेदक कक तरिफ सके यह आश्ववासन वदयवा गयवा हहै वक वह कवानदन कक प्रवक्रियवा मम सहयकोग करिनके कके धलए तहैयवारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतवा हकोगदी वह ईमवानदवारिदी सके अदवालत कके समक खिकद कको उपलब्धि करिवाएगवा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकवारि करिनके कके धलए भदी तहैयवारि हहै
जको न्यवायवालय उस परि अधधिरिकोवपत करिकेगदी। आवकेदक वनदरष हहै तथवा वह इस प्रकरिर मम वद० 04.04.2025 सके कवारिवागवारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि छकोड़ वदयवा जवाय।
5. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं ववदवान अपरि शवासककय अधधिवकवा नके आवकेदक कके जमवानत कवा प्रबल ववरिकोधि करितके हहए तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदक दवारिवा कवाररित अपरिवाधि सवंवंजकेय एववं गवंभदीरि प्रकक वत कवा हहै, इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि न छकोड़वा जवाय।
6.
आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा कके तकरवं कके पररिप्रकेक्ष्य मम पतवावलदी परि उपलब्धि सवारिववान तथ्यनों एववं पररिणस्थवतयनों कवा समग्र रूप सके अवलकोकन करिनके कके बवाद , सबदतनों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिवात्मक सवामग्रदी कक अनकपणस्थवत एववं उपलब्धि सवामग्रदी सके छकेड़छवाड़ कक सवंभवावनवा न हकोनके कके तथ्य कको दकेखितके हहए मकेरिदी रिवाय मम आवकेदक कको जमवानत परि मकक करिनके कवा उपयकक आधिवारि हहै।
7. अतनः ववाद कके गकर -दकोष परि वबनवा ककोई वटप्परदी वकए हहए आवकेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिवाधि मम सवंबवंधधित न्यवायवालय कक सवंतकवष्टि परि व्यवकगत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरिवावश कके ककोई भदी दको प्रवतभद प्रस्तकत करिनके परि वनम्नधलधखित शतरवं कके सवाथ जमवानत परि छकोड़ वदयवा जवाय। i. आवकेदक वववकेचनवा यवा परिदीकर कके दलौरिवान अवभयकोजन सवाक्ष्यनों कके सवाथ छकेड़छवाड़ नहहीं करिकेगवा। ii. आवकेदक अवभयकोजन सवावकयनों व पदीवड़तवा/ वशकवायतकतवार कको ण्डिरिवायकेगवा/धिमकवायकेगवा नहहीं। iii. आवकेदक न्यवायवालय कके आदकेशनों कवा पवालन करिकेगवा , वह परिदीकर कके दलौरिवान वबनवा ककोई अनवावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यवायवालय मम उपणस्थत हकोगवा तथवा परिदीकर मम ईमवानदवारिदी सके सहयकोग करिकेगवा। iv. आवकेदक जमवानत परि ररिहवा हकोनके कके बवाद जमवानत कक स्वतवंततवा कवा दकरूपयकोग नहदी करिकेगवा औरि वकसदी भदी अपरिवाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगवा न ककोई अपरिवाधधिक कक त्य करिकेगवा। v. आवकेदक प्रत्यक यवा अप्रत्यक रूप सके मवामलके कके तथ्यनों सके पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यवा पकधलस अधधिकवाररियनों कको ककोई प्रलकोभन यवा धिमकक नहहीं दकेगवा न हदी उनसके ककोई ववायदवा करिकेगवा , धजसकके कवारिर उन्हम न्यवायवालय मम तथ्यनों कको उजवागरि करिनके सके ववरित रिहनवा पण्डिकेडे़।
8. उपरिकोक शतरवं मम सके वकसदी कके उलवंघन कके मवामलके मम , परिदीकर न्यवायवालय आवकेदक कक जमवानत वनयमवानकसवारि रिद्द करिनके कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 31.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad