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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 77417 (ALL)

TARKESHWAR NATH YADAV AND ANOTHER v. STATE OF U.P.

BAIL/26498/2025 · 2025-07-31

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:128805 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26498 of 2025 Applicant :- Tarkeshwar Nath Yadav And Another Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Bishram Tiwari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा शदी रिवाहहल कक मवारि पवाण्डकेय ककी तरिफ सके आज वकवालतनवामवा दवाधखिल वकयवा गयवा, धजसके पतवावलदी परि रिखिवा जवाय। 2. आवकेदकगण कके ववदवान अधधिवकवा, पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं रिवाज्य ककी तरिफ सके ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा कको सकनवा तथवा पतवावलदी कवा पररिशदीलन वकयवा। 3. वतरमवान दवाणण्डक प्रककीणर जमवानत प्रवाथरनवा पत आवकेदकगण तवारिकके श्वरि नवाथ यवादव एववं गवंगकेश्वरि यवादव ककी ओरि सके मक०अ०सवं० 239/2025, अवंतगरत धिवारिवा 191(2), 115(2), 352, 351(2), 333, 109 बदी.एन.एस., थवानवा गगौरिदी बवाजवारि, धजलवा दकेवररियवा मम जमवानत परि मकक करिनके हकेतक प्रस्तकत वकयवा गयवा हहै। 4. आवकेदकगण कके ववदवान अधधिवकवा नके तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदकगण कको इस प्रकरिण मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सके झझूठवा फवं सवायवा गयवा हहै , उन्हहोंनके कधथत अपरिवाधि कवाररित नहहीं वकयवा हहै। प्रथम सझूचनवा ररिपकोरर ववलणमबत हहै तथवा उक ववलमब कवा ककोई समकवचत स्पषदीकरिण नहहीं वदयवा गयवा हहै। वतरमवान ववाद मम उभयपकहों कके मध्य आपस मम झगडवा हहआ थवा, धजसकके सवंबवंधि मम आवकेदकगण ककी तरिफ सके सवंबवंधधित थवानके दवारिवा प्रवाथवमककी दजर न करिनके कके बवाद प्रवाथवमककी दजर करिनके हकेतक मधजस्रटकेर कके समक प्रवाथरनवापत वदयवा गयवा। उक सके स्पष हहै वक प्रश्नगत घरनवा मम उभयपक सके एक-दझूसरिके परि आरिकोप लगवातके हहए प्रवाथवमककी दजर करिवायदी गयदी हहै, जको कवास कके स पररिलवकत हको रिहवा हहै। आवकेदकगण ककी तरिफ सके भदी कवामकेश्वरि यवादव, अवनदीश यवादव एववं अवभषकेक यवादव कको भदी गमभदीरि चकोरम कवाररित हहईवं, वकन्तक अवभयकोजन पक ककी तरिफ सके इसकके सवंबवंधि मम ककोई स्पषदीकरिण नहहीं वदयवा गयवा हहै तथवा आवकेदकगण एववं अन्य सह -अवभयककहों कको आयदी चकोरहों कके सवंबवंधि मम दस्तवावकेजदी सवाक्ष्य जमवानत प्रवाथरनवापत परि अनकलग्नक तदीन कके रूप मम सवंलग्न वकयवा गयवा हहै। वतरमवान घरनवा मम उभयपक कको चकोरम आयदी हह, लकेवकन उपरिकोक घरनवा कवा हमलवावरि कगौन हहै , यह इस स्तरि परि स्पष नहहीं वकयवा जवा सकतवा हहै। आवकेदकगण कवा ककोई पझूवर आपरिवाधधिक इवतहवास नहहीं हहै। पकननः उनकवा यह भदी कथन हहै वक आवकेदकगण ककी तरिफ सके यह आश्ववासन वदयवा गयवा हहै वक वह कवानझून ककी प्रवकयवा मम सहयकोग करिनके कके धलए तहैयवारि हह औरि जब भदी आवश्यकतवा हकोगदी वके ईमवानदवारिदी सके अदवालत कके समक खिकद कको उपलब्धि करिवाएवंगके औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकवारि करिनके कके धलए भदी तहैयवारि हह जको न्यवायवालय उन परि अधधिरिकोवपत करिकेगदी। आवकेदकगण वनदरष हह तथवा वके इस प्रकरिण मम वद० 07.06.2025 सके कवारिवागवारि मम वनरुद्ध हह। इसधलए आवकेदकगण कको जमवानत परि छकोड वदयवा जवाय। 5. पररिववाददी कके ववदवान अधधिवकवा एववं ववदवान अपरि शवासककीय अधधिवकवा नके आवकेदकगण कके जमवानत कवा प्रबल ववरिकोधि करितके हहए तकर प्रस्तकत वकयवा वक आवकेदकगण दवारिवा जवान-बझूझकरि सकवनयकोधजत तरिदीकके सके पररिववाददी एववं उसकके घरि ववालहों कके सवाथ मवारिपदीर ककी गयदी, धजससके उन लकोगहों कको गमभदीरि चकोरम कवाररित हहईवं। आवकेदकगण दवारिवा कवाररित अपरिवाधि सवंवंजकेय एववं गवंभदीरि प्रकक वत कवा हहै , इसधलए आवकेदक कको जमवानत परि न छकोडवा जवाय। 6. आवकेदक कके ववदवान अधधिवकवा कके तकरवं कके पररिप्रकेक्ष्य मम पतवावलदी परि उपलब्धि सवारिववान तथ्यहों एववं पररिणस्थवतयहों कवा समग्र रूप सके अवलकोकन करिनके कके बवाद प्रथमदृषयवा यह पररिलवकत हको रिहवा हहै वक उभयपक दवारिवा एक -दझूसरिके कके सवाथ मवारिपदीर ककी गयदी हहै तथवा दकोनहों तरिफ सके लकोगहों कको चकोरम कवाररित हहई हह , अतनः सबझूतहों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिवात्मक सवामग्रदी ककी अनकपणस्थवत एववं उपलब्धि सवामग्रदी सके छकेडछवाड ककी सवंभवावनवा न हकोनके कके तथ्य कको दकेखितके हहए मकेरिदी रिवाय मम आवकेदक कको जमवानत परि मकक करिनके कवा उपयकक आधिवारि हहै। 7. अतनः ववाद कके गकण-दकोष परि वबनवा ककोई वरप्पणदी वकए हहए आवकेदक कको उपरिकोक ववणरत अपरिवाधि मम सवंबवंधधित न्यवायवालय ककी सवंतकवष परि व्यवकगत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिवावश कके ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तकत करिनके परि वनमनधलधखित शतरवं कके सवाथ जमवानत परि छकोड वदयवा जवाय। i. आवकेदक वववकेचनवा यवा परिदीकण कके दगौरिवान अवभयकोजन सवाक्ष्यहों कके सवाथ छकेडछवाड नहहीं करिकेगवा। ii. आवकेदक अवभयकोजन सवावकयहों व पदीवडतवा / वशकवायतकतवार कको डरिवायकेगवा/धिमकवायकेगवा नहहीं। iii. आवकेदक न्यवायवालय कके आदकेशहों कवा पवालन करिकेगवा , वह परिदीकण कके दगौरिवान वबनवा ककोई अनवावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यवायवालय मम उपणस्थत हकोगवा तथवा परिदीकण मम ईमवानदवारिदी सके सहयकोग करिकेगवा। iv. आवकेदक जमवानत परि ररिहवा हकोनके कके बवाद जमवानत ककी स्वतवंततवा कवा दकरूपयकोग नहदी करिकेगवा औरि वकसदी भदी अपरिवाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगवा न ककोई अपरिवाधधिक कक त्य करिकेगवा। v. आवकेदक प्रत्यक यवा अप्रत्यक रूप सके मवामलके कके तथ्यहों सके पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यवा पकधलस अधधिकवाररियहों कको ककोई प्रलकोभन यवा धिमककी नहहीं दकेगवा न हदी उनसके ककोई ववायदवा करिकेगवा, धजसकके कवारिण उन्हम न्यवायवालय मम तथ्यहों कको उजवागरि करिनके सके ववरित रिहनवा पडकेडे़। 8. उपरिकोक शतरवं मम सके वकसदी कके उलवंघन कके मवामलके मम , परिदीकण न्यवायवालय आवकेदक ककी जमवानत वनयमवानकसवारि रिद्द करिनके कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad