Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 77111 (ALL)

ARIF v. STATE OF U.P.

BAIL/26032/2025 · 2025-08-12

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:138198 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26032 of 2025 Applicant :- Arif Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Kalim Uddin Counsel for Opposite Party :- G.A.,Mrityunjay Dwivedi Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक आररिफ कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 783/2024, अवंतररत धिद्वारिद्वा 191(2), 191(3), 333, 115(2), 351(2), 76, 352, 324(4), 110, 117(2), 118(2) बदी.एन.एस., थद्वानद्वा सद्वासनदी रवेट, धजलद्वा अलदीरढ़ मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक परि आकवेप हहै वक उसकवे दद्वारिद्वा अन्य अवभियसुकक्तों कवे सद्वाथ वमलकरि पदीवड़ितद्वा एववं उसकवे बवेटवे फद्वाधजल कवे सद्वाथ मद्वारिपदीट कक रयदी , धजससवे पदीवड़ितद्वा कवे बवेटवे कक आवंख कक रिकोशनदी चलदी रयदी। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भिदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमकक मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रद्वाथवमकक अवत -ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हहै। पदीवड़ितद्वा कवे बयद्वान एववं अवभियकोजन कथद्वानक मम परिस्परि ववरिकोधिद्वाभिद्वास हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम उभियपक कक तरिफ सवे एक-दझूसरिवे कवे ववरुद्ध प्रद्वाथवमकक पवंजदीकक त करिद्वायदी रयदी हहै तथद्वा आववेदक पक कवे तदीन लकोरक्तों कको चकोटम आनवे कद्वा कथन वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम आववेदक दद्वारिद्वा चसुटहैल कको मद्वात पकड़िनवे कक भिझूवमकद्वा दवशरत कक रयदी हहै , जबवक चसुटहैल कक आआँख परि ईवंट सवे वद्वारि करिनवे कक मसुख्य भिझूवमकद्वा सह-अवभियसुक फद्वाधजल कक बतद्वायदी रयदी हहै। सझूचनद्वाकतद्वार /पदीवड़ितद्वा नवे अपनद्वा वचवकत्सदीय परिदीकर करिद्वानवे सवे मनद्वा करि वदयद्वा हहै, कवे वल चसुटहैल शककल कद्वा वचवकत्सदीय परिदीकर हहआ हहै। पसुननः उनकद्वा यह भिदी कथन हहै वक आववेदक कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भिदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभिदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भिदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 29.05.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड़ि वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभिदीरि प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोड़िद्वा जद्वाय। 5. उभियपक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यक्तों एववं पररिणस्थवतयक्तों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतक्तों कक प्रकक वत औरि वकसदी भिदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़िछद्वाड़ि कक सवंभिद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष परि व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भिदी दको प्रवतभिझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ि वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीकर कवे ददौरिद्वान अवभियकोजन सद्वाक्ष्यक्तों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभियकोजन सद्वावकयक्तों व पदीवड़ितद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशक्तों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीकर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीकर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भिदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यक्तों सवे पररिवचत वकसदी भिदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियक्तों कको ककोई प्रलकोभिन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यक्तों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 13.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad